Nagpur Crime
Nagpur Crime: महाराष्ट्र के नागपुर शहर से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने मानवता और रिश्तों को शर्मसार कर दिया है। दक्षिण नागपुर के एक इलाके में एक 12 वर्षीय मासूम बच्चे को उसके ही जन्मदाताओं ने पिछले दो महीनों से जंजीरों और रस्सियों से बांधकर कैद कर रखा था। शुक्रवार को जब पुलिस और बाल संरक्षण विभाग की टीम मौके पर पहुँची, तो वहां का नजारा देखकर अधिकारियों की रूह कांप गई। यह घटना आधुनिक समाज में बच्चों के प्रति बढ़ती संवेदनहीनता और अमानवीयता का एक भयावह उदाहरण है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, बच्चे के माता-पिता उसकी कुछ आदतों से परेशान थे। बताया जा रहा है कि बच्चा मोबाइल चोरी जैसी छोटी-मोटी घटनाओं और असामान्य व्यवहार में लिप्त था। अपनी संतान को सुधारने या किसी विशेषज्ञ की सलाह लेने के बजाय, दिहाड़ी मजदूरी करने वाले माता-पिता ने बेहद क्रूर रास्ता चुना। वे रोज सुबह 9 बजे काम पर जाने से पहले अपने ही कलेजे के टुकड़े को जंजीरों से जकड़ देते थे। रेस्क्यू के समय बच्चा एक बाल्टी पर खड़ा पाया गया, जो उसकी यातना की पराकाष्ठा को दर्शाता है।
इस अमानवीय कृत्य का खुलासा तब हुआ जब चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 पर एक जागरूक नागरिक ने गोपनीय सूचना दी। सूचना मिलते ही जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी सुनील मेसरे के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई। इस टीम में जिला बाल संरक्षण अधिकारी मुश्ताक पठान, साधना हटवार और सुजाता गुल्हाने जैसे विशेषज्ञ शामिल थे। पुलिस के साथ मिलकर टीम ने घर पर छापा मारा और बच्चे को उस नर्क जैसी स्थिति से आजाद कराया।
जांच में यह भी सामने आया है कि माता-पिता ने बच्चे की शिक्षा पर पूरी तरह से रोक लगा दी थी। उसे स्कूल भेजने के बजाय घर के भीतर कैद कर दिया गया था। अजनी पुलिस के अनुसार, पहले भी दो बार बच्चे के व्यवहार को लेकर थाने में शिकायतें आई थीं, लेकिन माता-पिता ने कभी भी किसी सामाजिक संस्था या काउंसलर से संपर्क नहीं किया। उन्होंने कानून को अपने हाथ में लेते हुए बच्चे को शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित करना शुरू कर दिया।
रेस्क्यू के बाद बच्चे को तत्काल चिकित्सा सहायता प्रदान की गई। मेडिकल परीक्षण के दौरान बच्चे के हाथ-पैरों पर जंजीरों और रस्सियों के गहरे निशान मिले हैं, जो महीनों तक चली इस यातना की गवाही दे रहे हैं। फिलहाल बच्चे को एक सुरक्षित आश्रय गृह (Shelter Home) में रखा गया है, जहाँ डॉक्टरों की देखरेख में उसका उपचार चल रहा है। शारीरिक घावों के साथ-साथ बच्चे के मन पर पड़े गहरे आघात को ठीक करने के लिए पेशेवर काउंसलिंग की व्यवस्था भी की गई है।
अजनी पुलिस थाने में आरोपी माता-पिता के खिलाफ किशोर न्याय अधिनियम (Juvenile Justice Act) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। वरिष्ठ निरीक्षक नितिन राजकुमार ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे बाल कल्याण समिति (CWC) को सौंप दिया गया है। समिति अब बच्चे के भविष्य और उसके पुनर्वास पर अंतिम निर्णय लेगी। यह घटना समाज के लिए एक चेतावनी है कि अनुशासन के नाम पर की जाने वाली हिंसा किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।
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