Nandigram Bypoll : पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस गुट की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री और भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी से मुलाकात की। यह मुलाकात उस समय हुई है, जब कुछ दिन पहले ही ममता बनर्जी के खेमे ने संचिता प्रधान डे को नंदीग्राम उपचुनाव के लिए अपना उम्मीदवार घोषित किया था।
करीब एक घंटे तक चली मुलाकात से बढ़ीं राजनीतिक अटकलें
रिपोर्टों के मुताबिक, संचिता प्रधान और सुवेंदु अधिकारी के बीच मुलाकात काफी देर तक चली। इसके बाद नंदीग्राम के राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया। नामांकन वापसी की अंतिम तारीख नजदीक होने के कारण इस मुलाकात को चुनावी नजरिए से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं के बीच किन मुद्दों पर बातचीत हुई, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
नामांकन वापस लेने की खबर से बदला चुनावी समीकरण
कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि सुवेंदु अधिकारी से मुलाकात के बाद संचिता प्रधान डे ने नंदीग्राम उपचुनाव से अपना नामांकन वापस ले लिया है। हालांकि, उपलब्ध आधिकारिक जानकारी में इस वापसी की स्वतंत्र पुष्टि स्पष्ट रूप से नहीं हुई है। इसलिए फिलहाल इसे सामने आई रिपोर्ट के तौर पर ही देखा जा रहा है। संचिता की उम्मीदवारी से जुड़े घटनाक्रम पर चुनाव अधिकारियों की अंतिम स्थिति महत्वपूर्ण होगी।
नंदीग्राम सीट पर पहले भी आमने-सामने रहे हैं ममता और सुवेंदु
नंदीग्राम विधानसभा सीट पश्चिम बंगाल की राजनीति में बेहद महत्वपूर्ण रही है। 2021 के विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी और सुवेंदु अधिकारी के बीच इसी सीट पर सीधा मुकाबला हुआ था। अब मौजूदा उपचुनाव एक बार फिर इस सीट को राज्य की सियासत के केंद्र में ले आया है। सुवेंदु अधिकारी के सीट छोड़ने के बाद यहां उपचुनाव कराया जा रहा है।
ममता ने संचिता प्रधान डे को बनाया था उम्मीदवार
ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले TMC गुट ने 13 सितंबर को नंदीग्राम से संचिता प्रधान डे को उम्मीदवार घोषित किया था। उनके साथ रेजीनगर विधानसभा सीट से रबीउल आलम चौधरी को प्रत्याशी बनाया गया था। उस समय यह भी स्पष्ट हो गया था कि ममता बनर्जी खुद नंदीग्राम से उपचुनाव नहीं लड़ेंगी। नंदीग्राम में मतदान 6 अक्टूबर को होना निर्धारित है।
संचिता प्रधान डे की राजनीतिक पृष्ठभूमि भी चर्चा में
संचिता प्रधान डे का नाम उम्मीदवार बनाए जाने के बाद उनकी व्यक्तिगत और पेशेवर पृष्ठभूमि भी चर्चा में रही। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार वह शिक्षक भर्ती मामले से प्रभावित शिक्षकों में शामिल रही हैं और बाद में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद नौकरी बहाल होने की जानकारी सामने आई थी। उन्हें नंदीग्राम से नया चेहरा बनाकर उतारना ममता खेमे की चुनावी रणनीति का हिस्सा माना गया था।
चुनाव आयोग के फैसले के बीच बढ़ी नंदीग्राम की अहमियत
नंदीग्राम उपचुनाव ऐसे समय हो रहा है, जब तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर दोनों गुटों के बीच विवाद चल रहा है। चुनाव आयोग ने अंतरिम व्यवस्था के तहत दोनों गुटों को अलग-अलग नाम और चुनाव चिन्ह आवंटित किए हैं। ऐसे में उम्मीदवारों और उनके राजनीतिक कदमों पर भी नजर बनी हुई है।
अब अगले कदम पर टिकी सभी की नजरें
संचिता प्रधान डे की सुवेंदु अधिकारी से मुलाकात और उनके नामांकन को लेकर सामने आई रिपोर्टों ने नंदीग्राम उपचुनाव को और चर्चा में ला दिया है। फिलहाल यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नामांकन वापसी की आधिकारिक स्थिति क्या रहती है और आगे संचिता प्रधान डे की राजनीतिक भूमिका क्या होती है। चुनावी प्रक्रिया में अंतिम स्थिति संबंधित निर्वाचन अधिकारियों के फैसलों से स्पष्ट होगी।
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