Namrata Jain IAS: छत्तीसगढ़ के सबसे चुनौतीपूर्ण और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शुमार नारायणपुर जिले की नई कलेक्टर नम्रता जैन इन दिनों अपने काम करने के खास अंदाज को लेकर चर्चा में हैं। आमतौर पर आईएएस अधिकारी एयरकंडीशन दफ्तरों से सरकार चलाने के लिए जाने जाते हैं, लेकिन नम्रता जैन ने कार्यभार संभालते ही इस धारणा को बदल दिया है। वे नक्सलियों के गढ़ माने जाने वाले अबूझमाड़ के उन इलाकों में खुद पहुंच रही हैं, जहाँ कभी गोलियों की गूंज और दहशत का साया रहता था। बस्तर की ही रहने वाली नम्रता जैन ने पदभार ग्रहण करते ही स्पष्ट कर दिया है कि उनकी प्राथमिकता अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक शासन की योजनाओं को पहुँचाना है।
110 किमी का दुर्गम सफर: बाइक पर सवार होकर पहुँचीं जाटलूर और कुरमेल
हाल ही में कलेक्टर नम्रता जैन का एक साहसिक रूप तब देखने को मिला, जब वे जिला मुख्यालय से करीब 110 किलोमीटर दूर अबूझमाड़ के अंदरूनी गांवों के दौरे पर निकलीं। सड़कों के अभाव और उबड़-खाबड़ रास्तों के कारण उन्होंने कार छोड़कर बाइक का सहारा लिया। जाटलूर, ढोंढरबेड़ा और कुरमेल जैसे गांवों में जब कलेक्टर खुद बाइक पर बैठकर पहुँचीं, तो ग्रामीण उन्हें देखकर दंग रह गए। यह वही इलाका है जहाँ वर्षों से विकास की किरण नहीं पहुँची थी। नक्सलियों के डर के कारण यहाँ प्रशासनिक अधिकारियों का आना-जाना दुर्लभ था, लेकिन कलेक्टर ने बिना किसी खौफ के इन गांवों का दौरा कर जनता का दिल जीत लिया।
ग्राउंड जीरो पर जांच: खुद चलाया हैंडपंप और चखा पानी का स्वाद
ग्रामीणों के बीच पहुँचकर नम्रता जैन एक कलेक्टर के बजाय एक जागरूक नागरिक की तरह पेश आईं। उन्होंने गांवों में बुनियादी सुविधाओं का जायजा लेने के लिए खुद हैंडपंप चलाकर देखा कि पानी आ रहा है या नहीं, और पानी की गुणवत्ता जांचने के लिए उसे चखा भी। ग्रामीणों से सीधा संवाद करते हुए उन्होंने उनकी समस्याओं को सुना और अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि इन सुदूर अंचलों में स्वास्थ्य, बिजली और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं की पहुंच सुनिश्चित करना हमारी पहली जिम्मेदारी है। उन्होंने आश्वासन दिया कि विकास के इस रास्ते में किसी भी तरह की बाधा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
बच्चों के बीच बनीं शिक्षिका: राष्ट्रगान गाया और पढ़ाई का महत्व समझाया
दौरे के दौरान एक भावुक पल तब आया जब कलेक्टर बच्चों के बीच जा बैठीं। उन्होंने बच्चों के साथ मिलकर राष्ट्रगान गाया और एक शिक्षिका की भूमिका निभाते हुए उन्हें पढ़ाया भी। बच्चों के साथ बिताए गए इन पलों ने ग्रामीणों के मन में प्रशासन के प्रति विश्वास पैदा किया है। नम्रता जैन खुद बस्तर के गीदम की रहने वाली हैं, इसलिए वे नक्सलवाद के दंश और ग्रामीण जीवन की कठिनाइयों को बखूबी समझती हैं। उन्होंने बच्चों को प्रेरित करते हुए कहा कि शिक्षा ही वह हथियार है जिससे वे अपनी और अपने क्षेत्र की किस्मत बदल सकते हैं।
अबूझमाड़ में उम्मीद की नई सुबह: नक्सलवाद के बाद अब विकास की बारी
अबूझमाड़ जिसे ‘अनजान प्रदेश’ कहा जाता है, वहाँ अब बदलाव की बयार बहती दिख रही है। नक्सलवाद के बादल धीरे-धीरे छंट रहे हैं और नम्रता जैन जैसी सक्रिय अधिकारी के नेतृत्व में ग्रामीण विकास की उम्मीद कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पहली बार किसी कलेक्टर को उन्होंने अपने घर के पास इतने सरल अंदाज में देखा है। कलेक्टर के इस कड़े तेवर और जमीनी जुड़ाव ने विभाग के अन्य अफसरों को भी सक्रिय कर दिया है। अब देखना होगा कि आने वाले समय में अबूझमाड़ की तस्वीर कितनी तेजी से बदलती है।
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