NASA Artemis II Delay
NASA Artemis II Delay: अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) के ऐतिहासिक चंद्रमा मिशन, आर्टेमिस II (Artemis II) को एक बड़ा झटका लगा है। अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा की कक्षा के चारों ओर भेजने के इस बहुप्रतीक्षित मिशन को तकनीकी खामियों के चलते कम से कम एक महीने के लिए टाल दिया गया है। पहले यह मिशन अगले सप्ताह लॉन्च होने वाला था, लेकिन अब ईंधन रिसाव और अन्य मैकेनिकल समस्याओं के कारण इसे मार्च 2026 तक के लिए आगे बढ़ा दिया गया है। नासा का कहना है कि अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा सर्वोपरि है, इसलिए सभी खामियों को पूरी तरह ठीक करने के बाद ही रॉकेट उड़ान भरेगा।
नासा के इंजीनियरों ने इस खराबी का पता ‘वेट ड्रेस रिहर्सल’ (Wet Dress Rehearsal) के दौरान लगाया। यह लॉन्च से पहले की एक अनिवार्य प्रक्रिया है जिसमें रॉकेट में वास्तविक ईंधन भरकर उसकी जांच की जाती है। 98 मीटर ऊंचे स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) रॉकेट में जब लगभग 2.6 मिलियन लीटर लिक्विड हाइड्रोजन और लिक्विड ऑक्सीजन भरी जा रही थी, तभी हाइड्रोजन के रिसाव की सूचना मिली। इसके अतिरिक्त, रॉकेट के शीर्ष पर स्थित ओरियन कैप्सूल के एक महत्वपूर्ण वॉल्व में भी गड़बड़ी पाई गई है। इसी कैप्सूल में चार अंतरिक्ष यात्रियों को 10 दिनों तक रहना है, इसलिए नासा कोई जोखिम नहीं लेना चाहता।
आर्टेमिस II केवल एक वैज्ञानिक मिशन नहीं है, बल्कि यह विविधता और समानता का भी प्रतीक है। साल 1972 के अपोलो-17 के बाद यह पहला मिशन होगा जो इंसानों को चंद्रमा के इतना करीब ले जाएगा। इस मिशन का नेतृत्व रीड वाइजमैन करेंगे। उनके साथ क्रिस्टीना कोच (चंद्रमा की कक्षा तक पहुँचने वाली पहली महिला) और विक्टर ग्लोवर (पहले अश्वेत अंतरिक्ष यात्री) इतिहास रचने के लिए तैयार हैं। इसके अलावा, कनाडा के जेरेमी हैनसेन चंद्रमा की यात्रा करने वाले पहले गैर-अमेरिकी यात्री बनेंगे। इस चालक दल की सुरक्षा नासा की प्राथमिकता है, यही वजह है कि डेटा की गहन समीक्षा की जा रही है।
नासा के लिए लिक्विड हाइड्रोजन का रिसाव एक पुरानी और सिरदर्द भरी समस्या रही है। इससे पहले साल 2022 में, जब बिना चालक दल वाले आर्टेमिस I मिशन की तैयारी चल रही थी, तब भी इसी तरह के लीकेज के कारण कई बार लॉन्चिंग टालनी पड़ी थी। लिक्विड हाइड्रोजन को बहुत ही कम तापमान पर रखा जाता है, जिससे इसके रिसाव की संभावना बढ़ जाती है। इंजीनियर अब इस ‘अदृश्य’ रिसाव के मूल कारण को खोजने में जुटे हैं ताकि मार्च में होने वाली लॉन्चिंग के दौरान कोई बाधा न आए।
इस देरी का सबसे ज्यादा असर मिशन पर जाने वाले अंतरिक्ष यात्रियों पर पड़ा है। वे पिछले दो हफ्तों से कड़े क्वारंटाइन में थे ताकि संक्रमण से बचा जा सके। अब लॉन्च टलने के बाद उन्हें वापस अपने सामान्य जीवन में लौटना होगा और मार्च की लॉन्चिंग से दो हफ्ते पहले फिर से क्वारंटाइन होना पड़ेगा। आर्टेमिस II की सफलता नासा के अगले बड़े लक्ष्य, आर्टेमिस III की नींव रखेगी, जिसका उद्देश्य चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर इंसानों को उतारना और वहां एक स्थायी बेस कैंप बनाना है।
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