Nashik Sex Scandal
Nashik Sex Scandal: महाराष्ट्र के नासिक में ‘ढोंगी बाबा’ अशोक खरात के यौन शोषण मामले की जांच जैसे-जैसे गहरा रही है, राज्य की राजनीति में भूचाल आता दिख रहा है। विशेष जांच दल (SIT) को फॉरेंसिक टीम से प्राप्त मोबाइल क्लोन डेटा की विस्तृत रिपोर्ट में बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, महाराष्ट्र के लगभग 40 से 45 कद्दावर राजनीतिक नेता खरात के नियमित और सीधे संपर्क में थे। इन डिजिटल सबूतों ने स्पष्ट कर दिया है कि खरात का रसूख केवल धार्मिक प्रवचनों तक सीमित नहीं था, बल्कि सत्ता की सीढ़ियों तक उसकी गहरी पैठ थी। इस खुलासे के बाद कई बड़े नामों के चेहरे बेनकाब होने का डर सताने लगा है।
जांच के दौरान पुलिस को डिजिटल साक्ष्यों के माध्यम से पता चला है कि अशोक खरात बेहद शातिर तरीके से अपना नेटवर्क चला रहा था। उसने अपने मोबाइल में कई प्रभावशाली राजनेताओं और रसूखदार व्यक्तियों के नंबर असली नाम के बजाय ‘कोडवर्ड’ में सेव कर रखे थे। एसआईटी की तकनीकी टीम अब इन गुप्त कोड्स को डिकोड करने की चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया में जुटी है ताकि संबंधित व्यक्तियों की सटीक पहचान की जा सके। सूत्रों की मानें तो इन नंबरों के पीछे सत्ताधारी और विपक्षी, दोनों ही गुटों के दिग्गज शामिल हो सकते हैं, जो खरात के साथ गुप्त रणनीतियां साझा करते थे।
अशोक खरात की बेटी के विवाह की निमंत्रण पत्रिका (Wedding Card) ने इस मामले में आग में घी डालने का काम किया है। इस कार्ड में राज्य के कई नामी गिरामी नेताओं के नाम सम्मानपूर्वक शामिल किए गए थे। जांच में यह भी सामने आया है कि कई नेता महत्वपूर्ण राजनीतिक निर्णय लेने, चुनाव के लिए उम्मीदवारी का पर्चा भरने और यहाँ तक कि शपथ ग्रहण जैसे कार्यों के लिए शुभ समय तय करने हेतु खरात से सलाह लेते थे। खरात के इशारों पर कई बड़े राजनीतिक दांव-पेंच चले जाते थे, जो उसकी काली करतूतों को संरक्षण देने का एक मुख्य कारण माना जा रहा है।
अशोक खरात के आश्रम के भीतर चलने वाले काले कारनामों के तौर-तरीकों ने मानवता को शर्मसार कर दिया है। एसआईटी की पूछताछ में सामने आया है कि आश्रम का स्टाफ कुछ खास इशारों पर काम करता था। आश्रम में ‘झूमर की लाइट बंद’ होने का एक गुप्त मतलब होता था—’नो एंट्री’। यह एक ऐसा कोड था जिसका पालन वहां का सुरक्षा स्टाफ और कर्मचारी बड़ी सख्ती से करते थे। इस दौरान आश्रम के भीतर क्या होता था, इसकी जानकारी किसी को नहीं होती थी। पुलिस अब उन कॉल रिकॉर्ड्स को खंगाल रही है जिनसे यह पता चल सके कि इन ‘नो एंट्री’ सत्रों के दौरान कौन-कौन से वीआईपी मेहमान वहां मौजूद रहते थे।
यौन शोषण मामले की आंच अब नासिक के चिकित्सा जगत तक भी पहुँच गई है। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, एसआईटी अब नासिक के कुछ जाने-माने और प्रतिष्ठित डॉक्टरों की भूमिका की जांच कर रही है। पुलिस को संदेह है कि खरात महिलाओं को अपने जाल में फंसाने और उन्हें नियंत्रित करने के लिए नशीली दवाओं या विशिष्ट औषधियों का सहारा लेता था। जांच इस दिशा में भी की जा रही है कि क्या पीड़ित महिलाओं को गर्भधारण से रोकने के लिए अवैध तरीके से गोलियां दी जाती थीं? पुलिस यह पता लगा रही है कि किन डॉक्टरों की मिलीभगत से ये प्रतिबंधित दवाएं खरात को उपलब्ध कराई जा रही थीं।
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