UP Politics: उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने की कोशिशों में जुटी कांग्रेस पार्टी को शनिवार को एक बहुत बड़ा झटका लगा है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के पूर्व प्रांतीय अध्यक्ष और पार्टी के कद्दावर मुस्लिम चेहरे नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। सिद्दीकी ने अपना त्यागपत्र कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड्गे, सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडेय को भेज दिया है। उनके इस अचानक लिए गए फैसले ने न केवल लखनऊ से लेकर दिल्ली तक के सियासी गलियारों में हलचल पैदा कर दी है, बल्कि पार्टी के भविष्य की चुनावी रणनीतियों पर भी सवालिया निशान लगा दिए हैं।
इस्तीफे की अंदरूनी कहानी: क्या ‘साइडलाइन’ किए जाने से थे नाराज?
नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने अपने आधिकारिक त्यागपत्र में इस्तीफे के किसी विशिष्ट कारण का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हैं। सूत्रों का दावा है कि सिद्दीकी पिछले काफी समय से खुद को पार्टी के भीतर उपेक्षित और ‘साइडलाइन’ महसूस कर रहे थे। एक वरिष्ठ नेता होने के नाते उन्हें उम्मीद थी कि महत्वपूर्ण संगठनात्मक निर्णयों में उनकी भूमिका प्रभावी होगी, लेकिन ऐसा न होने पर उनकी नाराजगी बढ़ती गई। अंततः उन्होंने अपने समर्थकों के साथ कांग्रेस का दामन छोड़ने का फैसला किया। उनकी यह विदाई ऐसे समय में हुई है जब कांग्रेस उत्तर प्रदेश में गठबंधन और संगठन विस्तार के जरिए खुद को मजबूत करने का दावा कर रही थी।
पश्चिमी यूपी और बुंदेलखंड में सियासी रसूख: अल्पसंख्यक वोटों पर पड़ेगा असर
नसीमुद्दीन सिद्दीकी का पार्टी छोड़ना कांग्रेस के लिए केवल एक नेता का जाना भर नहीं है, बल्कि एक बड़े वोट बैंक का खिसकना भी हो सकता है। सिद्दीकी का प्रभाव न केवल बुंदेलखंड के जिलों में है, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में भी उनका एक मजबूत नेटवर्क है। उत्तर प्रदेश जैसे राज्य में, जहां अल्पसंख्यक वोट चुनाव के परिणाम तय करने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं, वहां सिद्दीकी जैसे अनुभवी नेता का हटना कांग्रेस की सोशल इंजीनियरिंग को बिगाड़ सकता है। आगामी विधानसभा चुनावों से ठीक एक साल पहले यह घटनाक्रम पार्टी के लिए एक बड़े ‘सेटबैक’ के रूप में देखा जा रहा है।
अजय राय की ‘डैमेज कंट्रोल’ की कोशिश: मनाने की कवायद जारी
इस्तीफे की खबर मिलते ही यूपी कांग्रेस कमेटी में हड़कंप मच गया है। प्रदेश अध्यक्ष अजय राय सक्रिय हो गए हैं और माना जा रहा है कि वह जल्द ही नसीमुद्दीन सिद्दीकी को मनाने उनके आवास पर जा सकते हैं। अजय राय की कार्यशैली रही है कि वे नाराज नेताओं के घर जाकर संवाद स्थापित करते हैं, लेकिन इस बार मामला काफी गंभीर प्रतीत होता है। सिद्दीकी ने जिस तरह सामूहिक रूप से सभी शीर्ष नेताओं को पत्र भेजा है, उससे साफ है कि वह मन बना चुके हैं। अब देखना यह होगा कि क्या कांग्रेस नेतृत्व उन्हें रोकने में सफल होता है या सिद्दीकी किसी नए राजनीतिक ठिकाने की तलाश करेंगे।
आगामी विधानसभा चुनाव और कांग्रेस की बढ़ती चुनौतियां
एक तरफ जहां कांग्रेस आगामी विधानसभा चुनाव के लिए ‘यूपी जोड़ो’ और विभिन्न अभियानों के जरिए जनता के बीच पहुंच रही है, वहीं पार्टी के भीतर से ही दिग्गजों का पलायन संगठन की आंतरिक कमजोरी को दर्शाता है। सिद्दीकी से पहले भी कई वरिष्ठ नेता संगठन छोड़ चुके हैं। यदि कांग्रेस समय रहते अपने पुराने और अनुभवी नेताओं को विश्वास में लेने में विफल रहती है, तो आगामी चुनावों में सत्ता की दौड़ में शामिल होना उसके लिए और भी चुनौतीपूर्ण हो जाएगा। नसीमुद्दीन सिद्दीकी का अगला कदम क्या होगा, इस पर सभी राजनीतिक दलों की नजरें टिकी हुई हैं।
















