National Child Award
National Child Award 2025: छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल की बेटी योगिता मंडावी ने अपनी असाधारण प्रतिभा से पूरे प्रदेश का मान बढ़ाया है। 26 दिसंबर को ‘वीर बाल दिवस’ के ऐतिहासिक अवसर पर देश की राजधानी दिल्ली स्थित भारत मंडपम में एक विशेष गरिमामय समारोह का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने योगिता मंडावी को खेल (जूडो) के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट और साहसिक प्रदर्शन के लिए प्रतिष्ठित ‘प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार’ से सम्मानित किया। यह पुरस्कार उन बच्चों को दिया जाता है जिन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में असाधारण उपलब्धि हासिल की हो।
योगिता की सफलता की कहानी जितनी प्रेरणादायक है, उतनी ही चुनौतीपूर्ण भी रही है। कोंडागांव जिले की रहने वाली योगिता ने बचपन में ही उन दुखों का सामना किया, जिनकी कल्पना भी कठिन है। जब वह मात्र चार वर्ष की थीं, तब उनके माता-पिता का निधन हो गया। सिर से साया उठने के बाद उनकी जिम्मेदारी राज्य बाल कल्याण परिषद ने उठाई। योगिता की परवरिश जिले में संचालित ‘बालिका गृह’ में हुई। सुख-सुविधाओं के अभाव और पारिवारिक विछोह के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी और खेलों को अपना संबल बनाया।
एक अनाथालय में रहते हुए खेल की दुनिया में अपनी जगह बनाना योगिता के लिए आसान नहीं था। हालांकि, उनकी लगन और मेहनत ने हर बाधा को छोटा कर दिया। मात्र 13 वर्ष की अल्पायु में ही उन्होंने अपनी शारीरिक क्षमता और तकनीक के दम पर राज्य स्तर के बेहतरीन खिलाड़ियों के बीच अपनी पहचान स्थापित कर ली थी। उनके प्रशिक्षकों के अनुसार, योगिता के भीतर सीखने की तीव्र इच्छाशक्ति थी, जिसने उन्हें अभ्यास सत्रों में घंटों पसीना बहाने के लिए प्रेरित किया। इसी समर्पण का परिणाम है कि आज वह राष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ का चेहरा बनी हैं।
योगिता मंडावी की प्रतिभा का लोहा तब माना गया जब उन्होंने राष्ट्रीय पटल पर अपनी धमक दिखाई। 14 वर्ष की होते-होते उन्होंने राष्ट्रीय स्तर की जूडो प्रतियोगिताओं में पदक जीतना शुरू कर दिया था। उनके लगातार शानदार प्रदर्शन और विभिन्न चैंपियनशिप में हासिल किए गए पदकों ने चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। उनके इसी निरंतर प्रदर्शन और खेल के प्रति अटूट निष्ठा को आधार मानकर उन्हें इस वर्ष के प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार के लिए चयनित किया गया।
योगिता को मिला यह सम्मान केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों और जनजातीय समुदायों की उन हज़ारों बेटियों के लिए एक उम्मीद की किरण है, जो अभावों में जी रही हैं। यह पुरस्कार यह संदेश देता है कि यदि लक्ष्य के प्रति ईमानदारी और मेहनत हो, तो कठिन से कठिन परिस्थितियाँ भी सफलता के मार्ग में बाधा नहीं बन सकतीं। राष्ट्रपति से पुरस्कार प्राप्त करने के बाद अब योगिता का लक्ष्य ओलंपिक जैसे अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भारत का प्रतिनिधित्व करना है।
योगिता की इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर कोंडागांव जिला प्रशासन सहित पूरे प्रदेश में हर्ष का माहौल है। बालिका गृह के संचालक और उनके कोच ने इस गौरवपूर्ण क्षण पर खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि योगिता ने यह साबित कर दिया है कि प्रतिभा किसी पहचान या सुख-सुविधा की मोहताज नहीं होती। छत्तीसगढ़ सरकार ने भी उनकी इस उपलब्धि की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है और उन्हें आगे की ट्रेनिंग के लिए हर संभव सहायता प्रदान करने का आश्वासन दिया है।
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