Biju Patnaik Controversy
Biju Patnaik Controversy: ओडिशा की राजनीति में इन दिनों पूर्व मुख्यमंत्री बीजू पटनायक के अतीत को लेकर एक बड़ा सियासी संग्राम छिड़ा हुआ है। बीजू जनता दल (BJD) के प्रमुख नवीन पटनायक ने सोमवार, 30 मार्च 2026 को भाजपा सांसद निशिकांत दुबे की तीखी आलोचना की। विवाद की जड़ निशिकांत दुबे का वह बयान है जिसमें उन्होंने महान स्वतंत्रता सेनानी और पूर्व मुख्यमंत्री बीजू पटनायक के 1962 के युद्ध के दौरान की भूमिका पर सवाल उठाए थे। नवीन पटनायक ने भुवनेश्वर में मीडिया से बात करते हुए इस बयान को न केवल मनगढ़ंत बताया, बल्कि सांसद की मानसिक स्थिति पर भी कटाक्ष किया।
निशिकांत दुबे की टिप्पणियों पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए नवीन पटनायक ने कहा कि बीजेपी सांसद का बयान बेहद आपत्तिजनक है। उन्होंने अपने बचपन की यादें साझा करते हुए बताया, “मैं उस समय लगभग 13 वर्ष का था और मुझे अच्छी तरह याद है कि 1962 के चीनी आक्रमण को लेकर बिजू बाबू कितने क्रोधित थे। उन्होंने देश की सुरक्षा के लिए जो किया, वह इतिहास में दर्ज है।” नवीन पटनायक ने कड़े शब्दों में कहा कि जो व्यक्ति ऐसे महान व्यक्तित्व पर कीचड़ उछाल रहा है, उसे निश्चित रूप से एक मानसिक चिकित्सक (Mental Doctor) की सलाह लेनी चाहिए।
निशिकांत दुबे के बयान की गूंज सोमवार को संसद के उच्च सदन ‘राज्यसभा’ में भी सुनाई दी। जैसे ही सदन की कार्यवाही शुरू हुई, बीजद सांसद सस्मित पात्रा ने इस मुद्दे को पुरजोर तरीके से उठाया। पात्रा ने आरोप लगाया कि निशिकांत दुबे ने बीजू पटनायक को ‘सीआईए एजेंट’ बताकर उनका और पूरे ओडिशा का अपमान किया है। उन्होंने इस बयान को पूरी तरह गलत और निराधार करार दिया। विरोध स्वरूप बीजद सांसदों ने सदन से वॉकआउट कर दिया। इससे पहले 28 मार्च को सस्मित पात्रा ने विरोध स्वरूप निशिकांत दुबे की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति से अपना इस्तीफा भी सौंप दिया था।
दरअसल, यह पूरा विवाद 27 मार्च को शुरू हुआ जब निशिकांत दुबे ने मीडिया के सामने कुछ कथित दस्तावेज पेश किए। उन्होंने दावा किया कि 1962 का भारत-चीन युद्ध प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने अमेरिकी पैसे और सीआईए की मदद से लड़ा था। दुबे ने आरोप लगाया कि उस समय ओडिशा के मुख्यमंत्री रहे बीजू पटनायक अमेरिकी सरकार, सीआईए और नेहरू के बीच एक गुप्त कड़ी के रूप में काम कर रहे थे। उन्होंने सोशल मीडिया पर नेहरू के दो पत्रों का हवाला देते हुए कहा कि ये पत्र अमेरिकी राजदूत को दिए गए निर्देशों की पुष्टि करते हैं।
भाजपा सांसद ने अपने दावों को आगे बढ़ाते हुए कहा कि 1963-64 में अमेरिका के निर्देश पर नंदा देवी पर्वत पर एक न्यूक्लियर डिवाइस (परमाणु उपकरण) लगाया गया था, जो आज तक लापता है। उन्होंने ओडिशा के ‘चारबतिया एयरबेस’ का जिक्र करते हुए कहा कि बीजू पटनायक की देखरेख में इसे अमेरिकी U-2 जासूसी विमानों के लिए विकसित किया गया था। दुबे के अनुसार, 1963 से 1979 तक अमेरिका ने इस एयरबेस का इस्तेमाल भारत की जासूसी गतिविधियों के लिए किया था। इन आरोपों ने न केवल बीजू पटनायक बल्कि नेहरू युग की विदेश नीति पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
राजनीतिक विवादों से इतर, बीजू पटनायक का इतिहास बेहद गौरवशाली रहा है। वे दो बार ओडिशा के मुख्यमंत्री रहे और एक कुशल एविएटर (विमान चालक) के रूप में विख्यात थे। 1947 में इंडोनेशियाई स्वतंत्रता सेनानियों को बचाने के लिए जकार्ता की उनकी साहसी उड़ान आज भी वीरता की मिसाल मानी जाती है। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान भी उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उनके निधन के बाद उनके बेटे नवीन पटनायक ने 1997 में बीजद की स्थापना की और लगातार 24 वर्षों तक ओडिशा के मुख्यमंत्री रहकर रिकॉर्ड बनाया।
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