Naxalism End in Bastar
Naxalism End in Bastar: लाल आतंक के खिलाफ जारी निर्णायक जंग में सुरक्षा बलों को एक और ऐतिहासिक सफलता मिली है। छत्तीसगढ़ और आंध्र प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों में नक्सलियों के पैर उखड़ते नजर आ रहे हैं। रविवार और सोमवार के घटनाक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि माओवादियों का ईको-सिस्टम अब पूरी तरह ध्वस्त होने की कगार पर है। एक तरफ जहां 36 साल से संगठन को सींचने वाले बड़े लीडर्स आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौट रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ सुरक्षा बल उनके छिपे हुए आधुनिक हथियारों के भंडारों को नष्ट कर रहे हैं। 31 मार्च 2026 की डेडलाइन से ठीक पहले यह कामयाबी सुरक्षा बलों के मनोबल को सातवें आसमान पर ले गई है।
आंध्र प्रदेश पुलिस के सामने रविवार को एक बड़ी सफलता तब आई जब कुल 48 लाख रुपये के संयुक्त इनामी 9 नक्सलियों ने अपने हथियार डाल दिए। इनमें सबसे प्रमुख नाम चेल्लुरी नारायण राव उर्फ ‘सुरेश’ का है। सुरेश पिछले 36 वर्षों से नक्सली विचारधारा से जुड़ा था और वर्तमान में सेंट्रल कमेटी मेंबर व AOBSZC के सचिव पद पर कार्यरत था। अकेले सुरेश पर 25 लाख रुपये का इनाम घोषित था। उसके साथ आत्मसमर्पण करने वाले अन्य 8 नक्सलियों में कार्तम लच्छू (5 लाख), कार्तम आदमे, मुचाकी मासा, पोडियम राजे और मडवी जोगी (सभी 4-4 लाख) शामिल हैं। विशेष बात यह है कि सरेंडर करने वाले 9 में से 8 नक्सली छत्तीसगढ़ के सुकमा और बीजापुर जिलों के मूल निवासी हैं।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, चेल्लुरी नारायण राव उर्फ सुरेश का नाम कई खौफनाक वारदातों में दर्ज है। वह साल 2018 में आंध्र प्रदेश के तत्कालीन विधायक किदारी सर्वेश्वर राव और पूर्व विधायक सिवेरी सोमेश्वर राव की नृशंस हत्या का मुख्य आरोपी रहा है। इसके अतिरिक्त, उसने पुलिस पार्टियों पर कई घातक एंबुश (घात लगाकर हमला) किए थे। नक्सलियों ने सरेंडर के पीछे संगठन में बड़े नेताओं की कमी, गिरती हुई जन-समर्थन की भावना और सरकार की पुनर्वास नीति के प्रति बढ़ते विश्वास को मुख्य वजह बताया है।
सोमवार को छत्तीसगढ़ के मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले में पुलिस, डीआरजी और आईटीबीपी के संयुक्त दल ने एक गुप्त सूचना के आधार पर कोवाचीटोला और मदनवाड़ा के जंगलों में सर्च ऑपरेशन चलाया। करीब 5 घंटे की मशक्कत के बाद नाले के किनारे एक पुराने पेड़ के नीचे छिपाकर रखे गए घातक हथियारों का भंडार मिला। बरामद सामान में एक एके-47 राइफल (भरी हुई मैगजीन के साथ), एक इंसास राइफल और भारी मात्रा में जिंदा कारतूस शामिल हैं। एसएसपी यशपाल सिंह ने दावा किया है कि इस बरामदगी के बाद जिले में माओवादी सक्रियता अब नगण्य हो गई है और जिला 31 मार्च तक पूरी तरह ‘नक्सल मुक्त’ होने की ओर अग्रसर है।
इससे पहले 25 मार्च को बस्तर के सबसे बड़े नक्सली लीडर पापाराव ने 17 अन्य साथियों के साथ सरेंडर किया था। पापाराव के हथियार डालने के बाद संगठन में अब कोई बड़ा रणनीतिकार नहीं बचा है। पिछले एक साल में 100 से अधिक नक्सलियों ने मुख्यधारा में वापसी की है और दर्जनों मुठभेड़ों में मारे गए हैं। वर्तमान में मोहला-मानपुर जिले का कोई भी मूल निवासी अब नक्सल संगठन का हिस्सा नहीं है। ओडिशा और छत्तीसगढ़ के संयुक्त दबाव के कारण अब माओवादी कैडर पूरी तरह से बैकफुट पर है।
नक्सलियों के पूर्ण सफाए के लिए सरकार ने 31 मार्च 2026 की समय-सीमा तय की है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए सुरक्षा बल ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपना रहे हैं। लगातार होते सरेंडर और आधुनिक हथियारों की बरामदगी यह दर्शाती है कि नक्सलियों का सूचना तंत्र और रसद आपूर्ति अब खत्म हो चुकी है। सरकार की बेहतर पुनर्वास नीति के कारण भटक चुके युवा अब हिंसा का रास्ता छोड़ सम्मानजनक जीवन की ओर कदम बढ़ा रहे हैं।
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