Naxal Surrender: छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में नक्सल मोर्चे पर सुरक्षा बलों को एक ऐतिहासिक और निर्णायक कामयाबी मिली है। सोमवार को एक बड़े घटनाक्रम में 9 सक्रिय नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया। आत्मसमर्पण करने वाले इन नक्सलियों में 6 महिलाएं भी शामिल हैं, जो लंबे समय से सुरक्षा बलों के लिए चुनौती बनी हुई थीं। इन सभी नक्सलियों पर कुल मिलाकर 45 लाख रुपये का इनाम घोषित था। आत्मसमर्पण की यह प्रक्रिया न केवल जिले में शांति बहाली की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि यह नक्सलियों के गिरते मनोबल और सुरक्षा बलों की बढ़ती पैठ का भी प्रमाण है।
हथियारों का जखीरा सौंपा: डीवीसी सदस्य बलदेव और अंजू का सरेंडर
आत्मसमर्पण करने वाले दस्ते का नेतृत्व डीवीसी (DVC) सदस्य बलदेव और अंजू कर रहे थे। इन दोनों पर शासन की ओर से 8-8 लाख रुपये का इनाम घोषित था। ये नक्सली अपने साथ आधुनिक हथियारों का जखीरा भी लेकर आए, जिसमें 3 घातक एके-47 राइफल, 2 एसएलआर (SLR) और 1 .303 राइफल शामिल है। ओडिशा बॉर्डर पर सक्रिय रहने वाले इस समूह के पास इतने आधुनिक हथियारों का होना इनकी मारक क्षमता को दर्शाता था, लेकिन अब इन हथियारों का सरेंडर होना नक्सली नेटवर्क के लिए एक अपूर्णीय क्षति है।
परिजनों की अपील और एसपी की सूझबूझ लाई रंग
इस सफल आत्मसमर्पण की पटकथा तब लिखी गई जब सरेंडर से दो दिन पहले बलदेव और अंजू के परिजनों ने सार्वजनिक रूप से उनसे घर वापसी की भावुक अपील की थी। इसके साथ ही, रविवार को एसपी वेदव्रत सिरमौर्य खुद संवेदनशील क्षेत्र ‘राजा डेरा’ गांव पहुंचे और ग्रामीणों से सीधा संवाद किया। पुलिस के बढ़ते विश्वास और परिवार के दबाव के चलते सोमवार सुबह 11 बजे नक्सलियों ने राजा डेरा गांव पहुंचकर समर्पण की इच्छा जताई। इसके बाद सभी नक्सलियों को सुरक्षित वाहन से जिला मुख्यालय ले जाया गया, जहाँ उन्होंने आईजी अमरेश मिश्रा के समक्ष अपने हथियार डाल दिए।
नक्सल मुक्त होने की दहलीज पर गरियाबंद जिला
9 प्रमुख नक्सलियों के इस आत्मसमर्पण के साथ ही गरियाबंद जिला अब नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त होने के करीब पहुंच गया है। आईजी अमरेश मिश्रा ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि हालांकि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए जिले को तुरंत आधिकारिक रूप से नक्सल मुक्त घोषित नहीं किया जा सकता, लेकिन अब पुलिस की सूची में गरियाबंद में सक्रिय किसी भी बड़े नक्सली का नाम शेष नहीं है। ऐसी प्रबल संभावना जताई जा रही है कि आने वाले गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) के अवसर पर शासन द्वारा गरियाबंद को औपचारिक रूप से नक्सल मुक्त जिला घोषित किया जा सकता है।
खूनी संघर्ष के गवाह रहे भालूडीगी और राजाडेरा में लौटेगी शांति
गरियाबंद के भालूडीगी और राजाडेरा की पहाड़ियां कभी खूनी संघर्ष का केंद्र हुआ करती थीं। इसी इलाके में सुरक्षा बलों ने पूर्व में हुई मुठभेड़ों में 2 सेंट्रल कमेटी सदस्यों सहित 20 से अधिक नक्सलियों को ढेर किया था। पिछले कुछ महीनों से सुरक्षा एजेंसियां इन पहाड़ियों में सक्रिय अंतिम टुकड़ियों पर नजर बनाए हुए थीं। इस सरेंडर में बलदेव, अंजू, सरुपा, रतना, गोविंदा, सोनी, उर्षा, नविता और डमरु जैसे कट्टर कैडर शामिल हैं। पुलिस अब अन्य सक्रिय नक्सलियों, जैसे उषा, के परिजनों के माध्यम से भी संपर्क साध रही है ताकि शेष बचे लोग भी समाज की मुख्यधारा में शामिल हो सकें।
















