Naxalism End
Naxalism End: आज लोकसभा में गृह मंत्रालय ने वामपंथी उग्रवाद (Left Wing Extremism – LWE) के उन्मूलन और आत्मसमर्पण/पुनर्वासन की प्रगति पर एक विस्तृत जवाब प्रस्तुत किया। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि वामपंथी उग्रवादी न तो भारत के संविधान में विश्वास रखते हैं और न ही लोकतांत्रिक मूल्यों में। सरकार ने कहा कि इन उग्रवादियों ने पिछले वर्षों में हजारों निर्दोष नागरिकों की हत्या की है, जिससे हजारों बच्चे अनाथ हुए और महिलाओं का सुहाग उजड़ गया।
सरकार ने दावा किया कि सुरक्षा बलों की लगातार और प्रभावी कार्रवाई के कारण वामपंथी संगठनों की ताकत काफी कमजोर हुई है, और बड़ी संख्या में उनके कैडर अब आत्मसमर्पण कर रहे हैं। सरकार सरेंडर करने वाले माओवादियों के लिए व्यापक पुनर्वास योजनाएँ चला रही है।
गृह मंत्रालय द्वारा जारी आँकड़ों के अनुसार, उग्रवादियों की सुरक्षा बलों से मुकाबला करने की क्षमता अब लगभग समाप्त हो चुकी है।
न्यूट्रलाइज़ किए गए शीर्ष नेता: जून 2019 से अब तक 29 शीर्ष नक्सली लीडर न्यूट्रलाइज़ किए जा चुके हैं, जिनमें से 14 इसी साल मारे गए हैं।
कुल हताहत/गिरफ्तार/आत्मसमर्पण: 2019 से अब तक 1,106 उग्रवादी मारे गए, 7,311 गिरफ्तार हुए, और 5,571 ने हथियार डाल दिए हैं।
आत्मसमर्पण करने वाले उग्रवादियों को मुख्यधारा में वापस लाने के लिए सरकार वित्तीय सहायता मुहैया करा रही है:
उच्च कैडर को ₹5 लाख और अन्य कैडर को ₹2.5 लाख की राशि।
हथियार के साथ आत्मसमर्पण करने पर अतिरिक्त राशि दी जाती है।
पुनर्वास अवधि में तीन साल तक ₹10,000 मासिक वजीफा भी दिया जाता है।
केवल इसी साल (2025 में) 2,167 माओवादी पुनर्वास योजना का लाभ लेकर मुख्यधारा में लौट चुके हैं।
सरकार ने बताया कि 1967 से चली आ रही वामपंथी उग्रवाद की समस्या ने एक समय पशुपतिनाथ से लेकर तिरुपति तक के विशाल इलाके को ‘रेड कॉरिडोर’ बना दिया था। सरकार का दावा है कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व और गृह मंत्री के मार्गदर्शन में मार्च 2026 तक उग्रवाद का पूरी तरह सफाया हो जाएगा।
गृह मंत्रालय ने पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि वे इसे केवल राज्य का विषय मानती रहीं, जिससे कोई राष्ट्रीय नीति नहीं बन पाई। इसके विपरीत, मोदी सरकार ने 2015 में ‘Whole of Government’ (पूरे सरकार) का दृष्टिकोण अपनाया, जिसके तहत सुरक्षा और विकास दोनों मोर्चों पर व्यापक रणनीति लागू की गई।
केंद्र सरकार ने उग्रवाद को खत्म करने के लिए सुरक्षा और विकास के मोर्चे पर कई बड़े कदम उठाए हैं:
सुरक्षा बल: प्रभावित राज्यों में 574 CAPF कंपनियों की तैनाती। CRPF की बस्तरिया बटालियन का गठन।
आधारभूत संरचना: सुरक्षा संबंधी व्यय और विशेष अवसंरचना योजनाओं के तहत हजारों करोड़ रुपये की मंजूरी। 706 किलेबंद पुलिस स्टेशन का निर्माण।
कनेक्टिविटी: 17,573 किलोमीटर सड़क निर्माण का 85% कार्य पूर्ण। 10,651 मोबाइल टावर स्थापित।
शैक्षिक और वित्तीय पहुँच: 46 आईटीआई, 49 कौशल केंद्र, 11 केंद्रीय विद्यालय, 6 नवोदय और 258 एकलव्य विद्यालय स्थापित। साथ ही, 6,025 डाकघर, 1,804 बैंक शाखाएं और 1,321 एटीएम की स्थापना की गई है।
गृह मंत्रालय ने तुलनात्मक आँकड़े प्रस्तुत करते हुए वामपंथी उग्रवाद में आई अभूतपूर्व गिरावट का दावा किया:
हिंसा में कमी (2010 की तुलना में 2024 तक): 81% की गिरावट।
तुलनात्मक गिरावट (जून 2004–मई 2014 बनाम जून 2015–मई 2025):
हिंसक घटनाएं: 56% कमी।
नागरिक मौतें: 70% कमी।
सुरक्षा बलों की मौत: 75% कमी।
कुल मौतें: 71% कमी।
भौगोलिक सिकुड़न (2014 से 2025 तक): प्रभावित राज्यों की संख्या 10 से घटकर 5, प्रभावित जिलों की संख्या 126 से घटकर 11, और प्रभावित थानों की संख्या 465 से घटकर 106 हो गई है।गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने लोकसभा में इन सभी तारांकित प्रश्नों के जवाब दिए।
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