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NCERT syllabus update : NCERT की कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक में बड़ा बदलाव किया गया है। अब विद्यार्थियों को सिख और मराठा राजाओं के विस्तृत इतिहास के साथ-साथ भारत के भूले-बिसरे और क्षेत्रीय शासकों के बारे में भी पढ़ने को मिलेगा। इनमें मराठा लीडर्स की सैन्य रणनीति से लेकर गुरु नानक की आध्यात्मिक यात्रा तक की जानकारी शामिल की गई है।
नए बदलाव NCERT की किताब ‘Exploring Society – India and Beyond’ में किए गए हैं, जो सत्र 2025-26 से पढ़ाई जाएगी। पहले मराठा और सिख इतिहास को संक्षेप में शामिल किया गया था, लेकिन अब इसे डीटेल में पढ़ाया जाएगा, ताकि छात्र भारत के विविध इतिहास को बेहतर तरीके से समझ सकें। नए पाठ्यक्रम में ओडिशा के प्रसिद्ध गजपति राजा नरसिंहदेव प्रथम, कर्नाटक की वीरांगना रानी अबक्का 1 और 2 तथा त्रावणकोर के मार्तंड वर्मा जैसे क्षेत्रीय शासकों को स्थान दिया गया है। नरसिंहदेव प्रथम के काल में ही प्रसिद्ध कोणार्क सूर्य मंदिर का निर्माण हुआ था, जिसे अब छात्रों को विस्तार से पढ़ाया जाएगा।
नई किताब में गुरु नानक देव की आध्यात्मिक यात्रा, गुरु गोबिंद सिंह की सैन्य नेतृत्व क्षमता और खालसा पंथ की स्थापना जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं को विस्तार से बताया गया है। इसके साथ ही गुरु तेग बहादुर की शहादत और सिख साम्राज्य का ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष भी पाठ्यक्रम का हिस्सा होगा।
पहले जहां मराठों को केवल डेढ़ पेज में समेट दिया गया था, वहीं अब उन्हें 22 पेजों का विस्तृत स्थान दिया गया है। इसमें छत्रपति शिवाजी महाराज की गुरिल्ला युद्ध नीति, रायगढ़ में उनकी ताजपोशी, प्रशासनिक दक्षता और स्वराज की भावना को केंद्र में रखा गया है।
छात्र अब संभाजी, राजाराम, शाहूजी, ताराबाई, पेशवा बाजीराव प्रथम, महादजी सिंधिया और नाना फडणवीस जैसे मराठा नेताओं के योगदान के बारे में भी जान सकेंगे। पहले इन नामों को सिर्फ उल्लेख मात्र में शामिल किया गया था, लेकिन अब इन पर अलग-अलग अध्याय होंगे।
नई किताब में मुगल शासकों को भी नए नजरिए से प्रस्तुत किया गया है। इसमें अकबर के शासन को सहिष्णुता और कठोरता का मिश्रण बताया गया है, जबकि औरंगजेब को एक सैन्यवादी शासक के रूप में दिखाया गया है, जिसने गैर-इस्लामी प्रथाओं पर रोक लगाई और जजिया टैक्स लगाया।
मुगल शासकों की धार्मिक नीतियों, सांस्कृतिक योगदान और शासकीय निर्णयों की अब आलोचनात्मक व्याख्या की गई है। इससे छात्रों को इतिहास के विभिन्न पहलुओं को समझने का व्यापक दृष्टिकोण मिलेगा।
NCERT का यह प्रयास भारतीय इतिहास को केवल एक सीमित परिप्रेक्ष्य से देखने की बजाय व्यापक और समावेशी दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे छात्रों को भारत की सांस्कृतिक विविधता और संघर्षों की गहराई से समझ मिल सकेगी।
2025-26 सत्र से लागू होने वाली इस नई किताब से उम्मीद की जा रही है कि यह नई पीढ़ी को संतुलित और विस्तृत इतिहास की समझ देगी। NCERT का यह बदलाव न केवल इतिहास के प्रति छात्रों की रुचि को बढ़ाएगा, बल्कि उन्हें एक समग्र दृष्टिकोण भी प्रदान करेगा।
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