NEET paper leak 2026
NEET paper leak 2026 : देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा ‘नीट’ (NEET) में हुए कथित पेपर लीक और व्यापक अनियमितताओं के बीच राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) को लेकर एक बेहद बड़ी और महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट एसोसिएशन ने देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) में एक जनहित याचिका दाखिल की है, जिसमें वर्तमान नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) को पूरी तरह से भंग करने की पुरजोर मांग की गई है।
याचिका में तकनीकी और कानूनी पहलुओं को उठाते हुए कहा गया है कि मौजूदा एनटीए का गठन महज ‘सोसायटी रजिस्ट्रेशन एक्ट 1860’ के तहत एक सीमित दर्जे के साथ किया गया था। इस कमजोर ढांचे के कारण यह संस्था देश के करोड़ों छात्रों के भविष्य और इतनी बड़ी परीक्षाओं की गोपनीयता को सुरक्षित रखने में विफल रही है, इसलिए इसे तत्काल प्रभाव से खत्म कर दिया जाना चाहिए।
सर्वोच्च न्यायालय में दाखिल की गई इस याचिका में केंद्र सरकार को एक विशेष निर्देश देने की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि सरकार को संसद में एक नया और कड़ा विधेयक (कानून) पेश करना चाहिए, जिसके माध्यम से एक सर्वशक्तिमान और नई वैधानिक राष्ट्रीय परीक्षा संस्था का निर्माण किया जा सके।
इस प्रस्तावित नई संस्था के पास स्पष्ट और कड़े कानूनी अधिकार होने चाहिए, साथ ही इसके संचालन में पारदर्शिता के बेहद सख्त नियम लागू होने चाहिए। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस नई एजेंसी को सीधे संसद के प्रति जवाबदेह बनाया जाना चाहिए। डॉक्टरों के संगठन का साफ कहना है कि देश के लाखों होनहार युवाओं के करियर का फैसला करने वाली संस्था के पास एक मजबूत कानूनी ढांचा और अटूट प्रशासनिक जवाबदेही होना बेहद जरूरी है।
यह कानूनी याचिका ऐसे संवेदनशील समय में कोर्ट पहुंची है, जब नीट पेपर लीक मामले की जांच कर रही केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) लगातार चौंकाने वाले खुलासे कर रही है। इस पूरे घोटाले के मुख्य मास्टरमाइंड माने जा रहे लातूर के लेक्चरर पीवी कुलकर्णी से की गई गहन पूछताछ में कई चौंकाने वाली जानकारियां जांच एजेंसियों के हाथ लगी हैं। जांच अधिकारियों के अनुसार, इस पेपर लीक के विशाल आपराधिक नेटवर्क में केवल कुलकर्णी ही नहीं, बल्कि कई अन्य रसूखदार लोगों की भी बड़ी और सक्रिय भूमिका रही है।
खुफिया सूत्रों के मुताबिक, मुख्य आरोपी पीवी कुलकर्णी और गिरफ्तार महिला लेक्चरर मनीषा वाघमारे के अलावा दो और सरकारी लेक्चरर भी इस साजिश को अंजाम दे रहे थे। सीबीआई की टीमें इन दोनों फरार आरोपियों की तलाश में पुणे, लातूर और महाराष्ट्र के कई अन्य संभावित ठिकानों पर लगातार ताबड़तोड़ छापेमारी कर रही हैं। सबसे हैरान करने वाली बात यह सामने आई है कि ये दोनों फरार लेक्चरर एनटीए के साथ सीधे जुड़े हुए थे और परीक्षा के संचालन में अहम जिम्मेदारी संभाल रहे थे।
जांच में यह भी गंभीर आरोप सामने आया है कि पुणे के एक निजी संस्थान के बंद कमरों में पीवी कुलकर्णी, मनीषा वाघमारे और उनके इन दो फरार सहयोगियों ने परीक्षा से ठीक पहले कुछ चुनिंदा छात्रों को इकट्ठा किया था। वहां इन शिक्षकों ने लीक हुए असली प्रश्नपत्र के सवाल और उनके सटीक जवाब छात्रों को बाकायदा एक नोटबुक में बोलकर लिखवाए और याद करवाए थे। इसके अलावा, सीबीआई की वित्तीय जांच में एक और बड़ा पर्दाफाश हुआ है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, पैसे के लेनदेन को छिपाने के लिए मनीषा वाघमारे के नाम पर एक बिल्कुल नया बैंक खाता खुलवाया गया था।
इसी खाते में पेपर खरीदने वाले छात्रों के परिजनों से लाखों रुपये एडवांस के तौर पर ट्रांसफर करवाए गए थे। सीबीआई ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इस संदिग्ध बैंक खाते को पूरी तरह सीज (फ्रीज) कर दिया है और बैंक अधिकारियों की मदद से पैसों के इस अवैध लेनदेन की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हुई है। फिलहाल, सीबीआई की सर्वोच्च प्राथमिकता कुलकर्णी के इन दोनों फरार सहयोगियों को गिरफ्तार करना है, ताकि एनटीए के भीतर बैठे अन्य बड़े चेहरों को बेनकाब किया जा सके।
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