Nehru vs Radhakrishnan
Nehru vs Radhakrishnan: भारतीय इतिहास के पन्नों में एक ऐसा दिन भी दर्ज है जब देश की राजनीति के दिग्गज सफेद जर्सी पहनकर क्रिकेट के मैदान पर उतरे थे। यह वाकया साल 1953 का है, जब भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और तत्कालीन उपराष्ट्रपति डॉ. एस. राधाकृष्णन ने एक मैत्रीपूर्ण क्रिकेट मैच में अपनी टीमों का नेतृत्व किया था।आज के दौर में नेताओं को मैदान पर देखना दुर्लभ है, लेकिन 1953 में दिल्ली के नेशनल स्टेडियम में एक ऐसा नज़ारा दिखा जिसने सबको हैरान कर दिया। जब देश के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और उपराष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णन बाढ़ राहत के लिए क्रिकेट के मैदान पर एक-दूसरे के खिलाफ उतरे।
यह मैच केवल मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि एक नेक काम के लिए खेला गया था। उस समय देश के कई हिस्से भीषण बाढ़ की चपेट में थे। पीड़ितों के लिए राहत कोष (रिलीफ फंड) जुटाने के उद्देश्य से संसद के सदस्यों के बीच इस मुकाबले का आयोजन किया गया था। हाल ही में इस मैच का एक दुर्लभ वीडियो फुटेज सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कांग्रेस नेता जयराम रमेश द्वारा साझा किया गया, जिसे पुरालेख विशेषज्ञ जय गलगली ने खोजा है। इस फुटेज ने उस दौर की यादें ताजा कर दी हैं जब राजनीति में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा और खेल भावना का अद्भुत मेल देखने को मिलता था।
अपने 64वें जन्मदिन से ठीक दो महीने पहले, जवाहरलाल नेहरू पूरे जोश के साथ मैदान पर उतरे। उन्होंने टॉस जीता और पहले बल्लेबाजी करने का निर्णय लिया। मैच के दौरान नेहरू न केवल एक कप्तान के रूप में सक्रिय थे, बल्कि एक क्षेत्ररक्षक के तौर पर भी उन्होंने बाउंड्री तक दौड़ लगाकर चौके रोकने का प्रयास किया। उनकी टीम ने पहली पारी में शानदार खेल दिखाते हुए 3 विकेट पर 220 रन बनाकर पारी घोषित कर दी। इसके जवाब में उपराष्ट्रपति डॉ. राधाकृष्णन की टीम ने पहले दिन के खेल की समाप्ति तक 2 विकेट खोकर 86 रन बना लिए थे।
इस मैच का सबसे दिलचस्प पहलू दूसरी पारी के दौरान देखने को मिला। प्रधानमंत्री नेहरू और तत्कालीन विपक्षी नेता ए.के. गोपालन एक साथ बल्लेबाजी करने मैदान पर उतरे। सत्ता पक्ष और विपक्ष का यह तालमेल देखकर दर्शक दीर्घा में बैठे तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद और कई केंद्रीय मंत्री भी मुस्कुरा उठे। कमेंटेटर ने इस दृश्य पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि “क्रिकेट में राजनीति की कोई जगह नहीं होती।” नेहरू, जो लगभग 40 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद बल्ला थाम रहे थे, उन्होंने मैदान के चारों ओर शॉट लगाकर दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया।
दो दिवसीय यह मुकाबला अंततः ड्रॉ पर समाप्त हुआ। डॉ. राधाकृष्णन की टीम ने पहली पारी में 6 विकेट पर 231 रन बनाए थे, जबकि नेहरू की टीम ने दूसरी पारी में 3 विकेट पर 160 रन बनाकर पारी घोषित की। मैच खत्म होने के बाद नेहरू ने खुद एक ‘नीलामीकर्ता’ (Auctioneer) की भूमिका निभाई ताकि फंड जुटाया जा सके। इस प्रदर्शनी मैच के माध्यम से उस समय लगभग एक लाख रुपये की बड़ी राशि एकत्रित की गई, जो पूरी तरह से बाढ़ राहत कार्यों में खर्च की गई।
नेहरू और राधाकृष्णन द्वारा शुरू की गई यह परंपरा आज भी जीवित है। साल 2024 में भी सांसदों ने तपेदिक (TB) के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए दिल्ली के मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम में एक मैत्रीपूर्ण टी-20 मैच खेला था। उस मैच में अनुराग ठाकुर के नेतृत्व वाली ‘लोकसभा स्पीकर एकादश’ ने शानदार जीत दर्ज की थी, जिसमें ठाकुर ने नाबाद 111 रनों की पारी खेली थी। राजनेताओं का खेल के मैदान पर उतरना न केवल फिटनेस का संदेश देता है, बल्कि सामाजिक उद्देश्यों के प्रति उनकी एकजुटता को भी दर्शाता है।
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