Nepal Corruption News
Nepal Corruption News : नेपाल की राजनीति में उस वक्त बड़ा भूचाल आ गया जब बालेन शाह सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउवा और उनकी पत्नी डॉ. आरजू राणा देउवा के खिलाफ भ्रष्टाचार की जांच के आदेश दे दिए। गृह मंत्रालय के कड़े निर्देशों के बाद नेपाल पुलिस ने आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में इस रसूखदार दंपति पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। यह कार्रवाई नेपाल के राजनीतिक इतिहास में एक मील का पत्थर मानी जा रही है, क्योंकि पहली बार किसी पूर्व प्रधानमंत्री के खिलाफ इतने गंभीर वित्तीय अपराधों की जांच हो रही है। सूत्रों के अनुसार, पुलिस अब इंटरपोल की मदद से देउवा दंपति को वापस लाने की कानूनी प्रक्रिया पर भी विचार कर रही है।
नेपाल के संपत्ति शुद्धिकरण विभाग ने देउवा परिवार के वित्तीय साम्राज्य का कच्चा चिट्ठा खोलना शुरू कर दिया है। जांच में सामने आया है कि पिछले महज डेढ़ साल के भीतर शेर बहादुर देउवा, उनकी पत्नी आरजू और बेटे जयवीर देउवा के नाम पर लगभग 73 बीघा बेशकीमती जमीन खरीदी गई है। विभाग ने इन संपत्तियों के दस्तावेजों और भुगतान के स्रोतों को संकलित कर लिया है। जांच की आंच केवल दंपति तक सीमित नहीं है, बल्कि आरजू राणा के भाई प्रदीप और भूषण राणा भी रडार पर हैं। अधिकारियों का मानना है कि इन सभी के बैंक खातों में हुए करोड़ों के संदिग्ध लेन-देन के तार किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय वित्तीय घोटाले से जुड़े हो सकते हैं।
काठमांडू स्थित देउवा के निजी निवास ‘बूढ़ानीलकंठ’ को लेकर भी चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। हाल ही में हुए जेनजी आंदोलन के दौरान इस घर में आगजनी की घटना हुई थी। जांच अधिकारियों को पुख्ता सबूत मिले हैं कि उस वक्त घर में करोड़ों रुपये की नेपाली करेंसी और लाखों अमेरिकी डॉलर रखे थे, जो आग की भेंट चढ़ गए। सबूत नष्ट होने की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने इस घर को गिराने या मरम्मत करने के काम पर फिलहाल पूरी तरह रोक लगा दी है। अधिकारियों का मानना है कि मलबे और अधजले दस्तावेजों से वित्तीय अपराधों के ऐसे महत्वपूर्ण सुराग मिल सकते हैं जो इस मामले की दिशा बदल देंगे।
भ्रष्टाचार की इस लहर में ‘नकली भूटानी शरणार्थी मामला’ एक बार फिर सुर्खियों में है। केंद्रीय अनुसंधान ब्यूरो (CIB) ने इस घोटाले में डॉ. आरजू राणा की संदिग्ध भूमिका की फाइल फिर से खोल दी है। इस हाई-प्रोफाइल मामले में नेपाली और चीनी नागरिकों को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर अमेरिका भेजने का झांसा देकर प्रति व्यक्ति करोड़ों रुपये की वसूली की गई थी। इसी कांड में पूर्व गृहमंत्री बालकृष्ण खांड की गिरफ्तारी पहले ही हो चुकी है। अब आरजू राणा के खिलाफ मिल रहे नए डिजिटल साक्ष्य इस बात की ओर इशारा कर रहे हैं कि इस सिंडिकेट के तार सत्ता के शीर्ष गलियारों तक जुड़े हुए थे।
वर्तमान में शेर बहादुर देउवा और उनका परिवार नेपाल में नहीं बल्कि सिंगापुर में है। उनकी अनुपस्थिति को देखते हुए नेपाल पुलिस ने इंटरपोल को औपचारिक पत्र लिखकर उनकी वापसी के लिए रेड कॉर्नर नोटिस या कूटनीतिक दबाव बनाने की अपील की है। गृह मंत्रालय ने स्पष्ट कर दिया है कि भ्रष्टाचार के इन गंभीर मामलों में जवाबदेही तय करने के लिए देउवा दंपति का नेपाल में उपस्थित होना अनिवार्य है। सरकार का कहना है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है और विदेशी धरती पर बैठकर न्याय की प्रक्रिया से बचना संभव नहीं होगा।
बालेन शाह सरकार की इस आक्रामक कार्रवाई ने आम जनता के बीच सुशासन की नई उम्मीद जगाई है। जहां एक ओर देउवा के समर्थक इसे राजनीतिक प्रतिशोध बता रहे हैं, वहीं भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने वाले संगठन इसे पारदर्शिता की दिशा में साहसिक कदम मान रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या नेपाल पुलिस इंटरपोल के जरिए देउवा को वापस लाने में सफल होती है और क्या ‘बूढ़ानीलकंठ’ निवास के राज कभी सार्वजनिक हो पाएंगे। फिलहाल, नेपाल की पूरी सियासत इस जांच के नतीजों पर टिकी है।
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