Nepal Election 2026
Nepal Election 2026 : नेपाल में 5 मार्च को होने वाले ऐतिहासिक संसदीय चुनावों से ठीक पहले राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। इस चुनावी रण में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब काठमांडू के लोकप्रिय मेयर और युवा नेता बालेन शाह ने एक साहसिक निर्णय लिया। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के मजबूत गढ़, झापा-5 से अपनी उम्मीदवारी पेश करते हुए अपने चुनावी घोषणापत्र से अरबों रुपये की चीनी औद्योगिक परियोजना को पूरी तरह बाहर कर दिया है। बालेन शाह का यह कदम चीन की महत्वाकांक्षी ‘बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव’ (BRI) के लिए एक गंभीर रणनीतिक झटका माना जा रहा है। यह फैसला नेपाल की संप्रभुता और विदेशी निवेश के प्रति एक नई सोच को दर्शाता है।
35 वर्षीय इंजीनियर और रैपर से राजनेता बने बालेन शाह आज नेपाल की ‘जेन-ज़ी’ पीढ़ी और युवाओं के बीच एक आइकन बन चुके हैं। झापा-5 में उनका मुकाबला सीधे तौर पर दिग्गज नेता केपी शर्मा ओली से है। जहाँ ओली ने अपने 41-सूत्रीय विजन पत्र में चीन समर्थित इंडस्ट्रियल पार्क को पूरा करने का वादा किया है, वहीं बालेन शाह की ‘राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी’ (RSP) ने इसे सिरे से खारिज कर दिया है। बालेन शाह का यह रुख ओली के बीजिंग के प्रति झुकाव और उनकी चीन-केंद्रित नीतियों को एक सीधी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।
दमक इंडस्ट्रियल पार्क, जिसे अब ‘नेपाल-चीन फ्रेंडशिप इंडस्ट्रियल पार्क’ के नाम से जाना जाता है, अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण अंतरराष्ट्रीय विवादों में है। यह प्रस्तावित पार्क नेपाल-भारत सीमा के अत्यंत निकट और सामरिक रूप से संवेदनशील सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) के पास स्थित है। नई दिल्ली ने इस स्थान को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक ‘रेड लाइन’ घोषित किया है। भारत ने पहले ही नेपाल के प्रमुख राजनीतिक दलों को इस संवेदनशील क्षेत्र में चीनी उपस्थिति के खतरों से आगाह कर दिया था। बालेन शाह द्वारा इसे घोषणापत्र से हटाना भारत की सुरक्षा चिंताओं के प्रति संवेदनशीलता को भी दर्शाता है।
नेपाल में बीआरआई (BRI) परियोजनाओं को लेकर अब संदेह के बादल मंडराने लगे हैं। श्रीलंका जैसे देशों की आर्थिक दुर्दशा को देखते हुए नेपाल का एक बड़ा वर्ग चीनी वाणिज्यिक ऋण लेने के खिलाफ है। इस इंडस्ट्रियल पार्क के लिए चीन द्वारा मांगी गई भारी कर छूट और ऋण की कड़ी शर्तों का नेपाल के वित्त मंत्रालय ने भी कड़ा विरोध किया था। बालेन शाह के सहयोगियों का तर्क है कि वे देश को किसी भी प्रकार के ‘डेब्ट ट्रैप’ (कर्ज के जाल) में नहीं धकेलना चाहते। यही कारण है कि वित्तीय अस्पष्टता के चलते इस प्रोजेक्ट को चुनावी वादों से अलग रखा गया है।
एक तरफ जहाँ चीन बड़े वादे करता है, वहीं धरातल पर उसकी बीआरआई परियोजनाओं की रफ्तार बेहद सुस्त रही है। अब तक नेपाल में ऐसी कोई भी बड़ी परियोजना पूरी नहीं हो सकी है जिससे देश को वास्तविक आर्थिक लाभ हो। बालेन शाह की बढ़ती लोकप्रियता और चीनी निवेश पर उनका कड़ा रुख नेपाल की भविष्य की विदेश नीति में एक बड़े बदलाव का संकेत है। युवाओं की पहली पसंद बनकर उभरे बालेन शाह अब भ्रष्टाचार विरोधी छवि और ‘राष्ट्र प्रथम’ की नीति के साथ ओली के साम्राज्य को हिलाने के लिए तैयार हैं।
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