KP Oli Arrested
KP Oli Arrested : नेपाल की राजनीति में एक ऐतिहासिक और युगांतकारी मोड़ आ गया है। प्रधानमंत्री पद की शपथ लेते ही बालेन शाह ने अपने इरादे साफ कर दिए हैं। ‘जेनरेशन जेड’ (Gen Z) आंदोलन के दौरान हुई लापरवाही और प्रशासनिक विफलता को लेकर नई सरकार पूरी तरह से एक्शन मोड में नजर आ रही है। शुक्रवार को हुई नवगठित कैबिनेट की पहली बैठक में बालेन शाह ने स्पष्ट किया कि कानून से ऊपर कोई नहीं है। इस बैठक का मुख्य केंद्र पिछले साल देश को हिला देने वाले युवा आंदोलन की जांच रिपोर्ट को लागू करना था। सरकार के इस तेवर ने नेपाल के पुराने राजनीतिक दिग्गजों के बीच हड़कंप मचा दिया है।
कैबिनेट के फैसले के तुरंत बाद नेपाल पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को गुंडू से हिरासत में ले लिया। उनके साथ ही पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक की भी गिरफ्तारी हुई है। इन दोनों दिग्गजों पर आरोप है कि जब 2025 में युवा बेरोजगारी और भ्रष्टाचार के खिलाफ सड़कों पर थे, तब सत्ता में रहते हुए इन्होंने जानबूझकर लापरवाही बरती, जिससे स्थिति अनियंत्रित हो गई। गिरफ्तारी के दौरान केपी ओली ने कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए इसे ‘प्रतिशोध की राजनीति’ करार दिया और कहा कि वह इस अन्याय के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ेंगे।
सरकार के प्रवक्ता और नवनियुक्त विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री सस्मित पोखरेल ने मीडिया को बताया कि कैबिनेट ने गौरी बहादुर कार्की की अध्यक्षता वाले उच्च स्तरीय जांच आयोग की सिफारिशों को तत्काल प्रभाव से लागू करने का निर्णय लिया है। आयोग ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि तत्कालीन प्रधानमंत्री ओली और गृह मंत्री लेखक आंदोलन को संभालने में विफल रहे। रिपोर्ट में इन पदों पर आसीन व्यक्तियों के लिए अधिकतम 10 साल की कैद की सजा की सिफारिश की गई है। यह पहली बार है जब नेपाल में इतने उच्च स्तर के नेताओं पर इस तरह की कठोर कानूनी कार्रवाई की तलवार लटक रही है।
सिर्फ राजनेता ही नहीं, बल्कि जांच की आंच अब तत्कालीन सुरक्षा अधिकारियों तक भी पहुँच गई है। आयोग ने तत्कालीन नेपाल पुलिस महानिरीक्षक (IGP) चंद्र कुबेर खापुंग सहित कई अन्य शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई की मांग की है। प्रवक्ता पोखरेल के अनुसार, सुरक्षा अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की रूपरेखा तैयार करने के लिए एक विशेष अध्ययन दल का गठन किया जाएगा। हालांकि, अन्य प्रशासनिक सिफारिशों को तुरंत जमीन पर उतारने का आदेश दे दिया गया है। इससे यह साफ है कि बालेन शाह व्यवस्था के शुद्धिकरण के लिए किसी को भी बख्शने के मूड में नहीं हैं।
साल 2025 नेपाल के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हुआ। देश के युवाओं (Gen Z) ने बेरोजगारी, बढ़ते भ्रष्टाचार और राजनीतिक अपारदर्शिता के खिलाफ एक स्वतःस्फूर्त आंदोलन शुरू किया। सोशल मीडिया से शुरू हुआ यह विद्रोह देखते ही देखते सड़कों पर सैलाब बन गया। युवाओं के इस आक्रोश के सामने तत्कालीन ओली सरकार को झुकना पड़ा, उन्हें इस्तीफा देना पड़ा और अंततः संसद भंग करनी पड़ी। इसके बाद सुशीला कार्की को अंतरिम प्रधानमंत्री बनाया गया था। अब बालेन शाह के नेतृत्व में युवाओं की उसी आवाज को न्याय दिलाने की प्रक्रिया शुरू हुई है, जिसने इस पूरे परिवर्तन की नींव रखी थी।
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