Netanyahu Death Rumors: मध्य-पूर्व में जारी भीषण रक्तपात और इजरायल-ईरान के बीच सीधे सैन्य संघर्ष के बीच एक नई सनसनीखेज खबर ने दुनिया भर का ध्यान खींचा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की हत्या किए जाने की अफवाहें तेजी से फैल रही हैं। विशेष रूप से ईरानी नागरिकों और वहां के सोशल मीडिया हैंडल्स द्वारा यह दावा किया जा रहा है कि ईरान ने अपनी कार्रवाई में नेतन्याहू को मार गिराया है। इन दावों को इस बात से बल मिल रहा है कि पिछले कुछ दिनों से नेतन्याहू किसी सार्वजनिक मंच या मीडिया के सामने नहीं आए हैं। हालांकि, इजरायल की ओर से आधिकारिक तौर पर इन दावों की कोई पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन युद्ध के इस माहौल में ऐसी अफवाहों ने मनोवैज्ञानिक युद्ध को एक नए स्तर पर पहुंचा दिया है।

ईरानी दूतावास की रहस्यमयी प्रतिक्रिया: अस्तित्व पर दागे सवाल
इन बढ़ती अफवाहों के बीच दक्षिण अफ्रीका स्थित ईरानी दूतावास का एक आधिकारिक बयान सामने आया है, जिसने स्थिति को और अधिक पेचीदा बना दिया है। दूतावास ने ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर साझा की गई अपनी पोस्ट में नेतन्याहू की मौत की न तो पुष्टि की और न ही इसे सिरे से खारिज किया। दूतावास ने लिखा, “यह बिल्कुल भी मायने नहीं रखता कि नेतन्याहू मार दिए गए या जिंदा हैं। एक मिनाबी लड़की का एक बाल भी उसके पूरे अस्तित्व से कहीं अधिक मूल्यवान है।” यह तीखी प्रतिक्रिया दर्शाती है कि ईरान इस समय रणनीतिक लाभ से अधिक भावनात्मक और प्रतिशोधात्मक मुद्रा में है। यह बयान सीधे तौर पर नेतन्याहू की सत्ता और उनके जीवन को ईरानी नागरिकों के जीवन की तुलना में ‘तुच्छ’ बताने की कोशिश है।
मिनाब स्कूल हमला: 150 बच्चियों की मौत का गहराता जख्म
ईरानी दूतावास और वहां के नेतृत्व के इस आक्रोश के पीछे मिनाब शहर में हुई एक अत्यंत दुखद घटना है। हाल ही में ईरान के मिनाब शहर में एक स्कूल पर हुए कथित इजरायली और अमेरिकी हमले में 150 से अधिक स्कूली बच्चियों की जान चली गई थी। इस घटना ने पूरे ईरान में शोक और क्रोध की लहर पैदा कर दी है। ईरानी सोशल मीडिया यूजर्स इन बच्चियों की मौत को अपनी राष्ट्रीय अस्मिता पर हमला मान रहे हैं। दूतावास का बयान इसी दर्द और गुस्से को प्रतिध्वनित करता है, जहाँ वे एक राजनेता की मौत की खबरों के बजाय अपने मासूम बच्चों के बलिदान को सर्वोपरि रख रहे हैं।
मुज्तबा खामेनेई का प्रण: पिता की शहादत और मासूमों का प्रतिशोध
ईरान के नवनियुक्त सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई ने कमान संभालते ही कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। उन्होंने अपने पिता सैय्यद अयातुल्ला अली खामेनेई और अन्य उच्चाधिकारियों की शहादत का बदला लेने की सार्वजनिक कसम खाई है। अपने हालिया संबोधन में मुज्तबा ने स्पष्ट किया कि इजरायल और अमेरिका को मिनाब की उन मासूम बच्चियों की मौत की भारी कीमत चुकानी होगी। मुज्तबा के इस कड़े तेवर के बाद ही सोशल मीडिया पर नेतन्याहू की मौत के दावों वाली पोस्ट की बाढ़ आ गई है। ईरानी जनता इसे अपने नए नेता की प्रतिज्ञा के क्रियान्वयन के रूप में देख रही है।
कूटनीतिक सन्नाटा और अनिश्चितता का माहौल
फिलहाल, बेंजामिन नेतन्याहू की सलामती को लेकर रहस्य बना हुआ है। इजरायल में उनके समर्थकों और वैश्विक कूटनीतिज्ञों की नजरें यरूशलेम से आने वाले किसी भी आधिकारिक बयान पर टिकी हैं। युद्ध के समय में ऐसी अफवाहें अक्सर दुश्मन देश का मनोबल गिराने के लिए फैलाई जाती हैं। यदि नेतन्याहू जल्द ही सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आते हैं, तो यह कूटनीतिक अस्थिरता और बढ़ सकती है। दूसरी ओर, ईरान ने अपनी आक्रामकता कम करने के कोई संकेत नहीं दिए हैं, जिससे स्पष्ट है कि आने वाले दिन इस वैश्विक संघर्ष के लिए और भी निर्णायक साबित होने वाले हैं।


















