Middle East Politics : इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक बेहद चौंकाने वाला और सनसनीखेज दावा किया है। यरूशलम में आयोजित ‘जेएनएस इंटरनेशनल पॉलिसी समिट 2026’ के दौरान उन्होंने कहा कि ईरान के लिए परमाणु हथियार संपन्न राष्ट्र बनना अब पहले की तुलना में कहीं अधिक कठिन हो गया है। नेतन्याहू ने इस उपलब्धि का श्रेय उन गुप्त सैन्य अभियानों को दिया, जिनमें ईरान के 20 प्रमुख परमाणु वैज्ञानिक मारे गए। इजरायली पीएम कार्यालय द्वारा जारी वीडियो में नेतन्याहू ने स्पष्ट किया कि इजरायल ने अमेरिका के साथ मिलकर अपने इतिहास का सबसे बड़ा हवाई हमला किया, जिससे ईरान के परमाणु ढांचे को न केवल गंभीर नुकसान पहुंचा है, बल्कि उसका परमाणु कार्यक्रम भी कई साल पीछे चला गया है।

‘ऑपरेशन राइजिंग लायन’ और ‘ऑपरेशन रोअरिंग लायन’ का खुलासा
नेतन्याहू ने अपने संबोधन में दो बड़े गुप्त अभियानों का जिक्र किया—’ऑपरेशन राइजिंग लायन’ और ‘ऑपरेशन रोअरिंग लायन’। उन्होंने दावा किया कि इन अभियानों के जरिए इजरायल ने ईरान के 12 और 8 वैज्ञानिकों को क्रमशः निशाना बनाया, जो ईरान के परमाणु कार्यक्रम के लिए रीढ़ की हड्डी के समान थे। नेतन्याहू का मानना है कि किसी भी देश के लिए अपने प्रमुख वैज्ञानिकों को खोना एक ऐसी अपूरणीय क्षति है, जिसके बाद परमाणु हथियार कार्यक्रम को गति देना लगभग नामुमकिन हो जाता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान को तबाह और बर्बाद करना उनकी सुरक्षा नीति का एक अनिवार्य हिस्सा है, जिसे वे हर कीमत पर पूरा करेंगे।

लेबनान में बफर जोन: जब तक जरूरत, तब तक मौजूदगी
इजरायल के प्रधानमंत्री ने दक्षिणी लेबनान में बनाए गए सुरक्षा बफर जोन को लेकर भी अपनी स्थिति स्पष्ट की। यह बफर जोन लगभग 602 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है, जो लेबनान के कुल क्षेत्रफल का लगभग 6 प्रतिशत हिस्सा है। नेतन्याहू ने साफ शब्दों में कहा कि इजरायली सेना इस क्षेत्र से तब तक नहीं हटेगी, जब तक उन्हें यह महसूस नहीं होता कि उनकी उत्तरी सीमा पूरी तरह सुरक्षित है। उन्होंने किसी भी निश्चित समय-सीमा को तय करने से इनकार करते हुए कहा कि इजरायल का निर्णय पूरी तरह से जमीनी सुरक्षा स्थिति के आकलन पर आधारित होगा। इस कदम का मुख्य उद्देश्य संभावित खतरों को सीमा से दूर रखना है।
राष्ट्रीय हित सर्वोपरि: अमेरिका और इजरायल के संबंधों पर रुख
अपने भाषण के दौरान नेतन्याहू ने इजरायल की संप्रभुता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका और इजरायल दोनों ही आजाद और संप्रभु राष्ट्र हैं, जो आपसी सहयोग में विश्वास रखते हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इजरायल के लिए उसके अपने राष्ट्रीय हित सर्वोपरि हैं। अपने बड़े भाई और इजरायली हीरो, लेफ्टिनेंट कर्नल योनी नेतन्याहू की बरसी पर आयोजित स्मृति समारोह में उन्होंने भावनात्मक संकल्प लिया। उन्होंने कहा कि अपने भाई को खोने के पचास साल बाद भी उनका यह संकल्प अटूट है कि वे किसी भी स्थिति में ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं देंगे। नेतन्याहू की इन टिप्पणियों ने मध्य-पूर्व की भू-राजनीतिक स्थिति में एक बार फिर गर्माहट पैदा कर दी है।
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