New Babri Masjid West Bengal
New Babri Masjid West Bengal: पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले का बेलडांगा इलाका इस समय पूरे देश में चर्चा और बहस का केंद्र बना हुआ है। इसका मुख्य कारण तृणमूल कांग्रेस के निलंबित विधायक हुमायूं कबीर द्वारा एक नई मस्जिद की आधारशिला रखा जाना है, जिसे ‘बाबरी मस्जिद’ का नाम दिया गया है। उत्तर प्रदेश के अयोध्या में दशकों तक चले विवाद के शांतिपूर्ण समाधान के बाद, बंगाल की धरती पर इसी नाम से मस्जिद की नींव रखना कई सवाल खड़े कर रहा है। इस घटना ने न केवल धार्मिक बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी तनाव पैदा कर दिया है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने इस संवेदनशील मुद्दे पर अपनी चुप्पी तोड़ी है। भागवत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद का पुनर्निर्माण किसी धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि एक गहरी ‘राजनीतिक साजिश’ है। उन्होंने कहा कि पुराने विवादों को फिर से जीवित करना देश की एकता के लिए घातक है। संघ प्रमुख के अनुसार, यह कदम केवल ‘वोट बैंक’ की राजनीति को साधने के लिए उठाया जा रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस तरह के कार्यों से न तो मुसलमानों का कोई भला होने वाला है और न ही हिंदुओं का; इससे केवल समाज में वैमनस्य बढ़ेगा।
धार्मिक स्थलों के निर्माण में सरकारी पैसे के उपयोग पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में मोहन भागवत ने संवैधानिक मर्यादाओं और ऐतिहासिक उदाहरणों का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि “नियम यही है कि सरकार को किसी भी मंदिर या धार्मिक स्थल का निर्माण नहीं करना चाहिए।” उन्होंने सोमनाथ मंदिर का उदाहरण देते हुए बताया कि सरदार वल्लभभाई पटेल के समय भी उद्घाटन में राष्ट्रपति शामिल हुए थे, लेकिन सरकारी खजाने से एक रुपया भी खर्च नहीं किया गया था। ठीक इसी तरह, अयोध्या के राम मंदिर का निर्माण भी सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार एक स्वतंत्र ट्रस्ट द्वारा किया गया है, जिसमें जनता का योगदान है, सरकार का पैसा नहीं।
इस विवाद की जड़ में टीएमसी के निलंबित विधायक हुमायूं कबीर हैं, जिन्होंने इस मस्जिद की नींव रखकर इसे ‘बाबरी’ नाम दिया। आलोचकों का मानना है कि यह नाम जानबूझकर उकसावे की कार्रवाई के तौर पर चुना गया है। बेलडांगा, जो पहले से ही सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र रहा है, वहां इस तरह का निर्माण सामाजिक ताने-बाने को खतरे में डाल सकता है। भागवत ने आशंका जताई कि ऐसे कदम केवल ध्रुवीकरण करने और राजनीतिक लाभ उठाने के लिए उठाए जाते हैं, जिनका जनता की भलाई से कोई लेना-देना नहीं होता।
पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी ने भी इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि बेलडांगा में रखी गई यह आधारशिला बंगाल में ‘संघर्ष भड़काने का एक सोची-समझी कोशिश’ है। भाजपा नेताओं का आरोप है कि राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी के नेता जानबूझकर ऐसे विवादों को हवा दे रहे हैं ताकि ध्रुवीकरण के जरिए राजनीतिक रोटियां सेंकी जा सकें। सुवेंदु अधिकारी ने प्रशासन से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है ताकि क्षेत्र की शांति भंग न हो।
मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद के नाम पर शुरू हुआ यह नया अध्याय भारतीय लोकतंत्र और सामाजिक सद्भाव के लिए एक बड़ी चुनौती है। जहाँ मोहन भागवत ने इसे कूटनीतिक और ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में गलत बताया है, वहीं स्थानीय राजनीति इसे अपने पक्ष में मोड़ने की कोशिश कर रही है। भारत जैसे देश में, जहाँ अयोध्या विवाद का पटाक्षेप हो चुका है, वहां उसी नाम का प्रयोग कर नए विवाद को जन्म देना विकास की राह में बाधा बन सकता है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य सरकार और कानून प्रवर्तन एजेंसियां इस बढ़ते तनाव को कैसे नियंत्रित करती हैं।
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