IT Rules 2026
IT Rules 2026: केंद्र सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) नियम-2021 में संशोधन के लिए एक नया मसौदा जारी किया है, जिसका सीधा उद्देश्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही तय करना है। इस नए बदलाव के बाद, फेसबुक, एक्स (ट्विटर) और यूट्यूब जैसे सोशल मीडिया दिग्गज अब सरकार द्वारा जारी किए गए निर्देशों, एडवाइजरी या गाइडलाइंस की अनदेखी नहीं कर पाएंगे। अब तक ये कंपनियां सरकारी आदेशों को केवल एक ‘सलाह’ के रूप में लेती रही हैं, लेकिन नए नियमों के लागू होने के बाद इन्हें कानूनी रूप से बाध्यकारी माना जाएगा। यदि कोई प्लेटफॉर्म इन नियमों का उल्लंघन करता है, तो संबंधित डिजिटल मीडिया कंपनी को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया जाएगा और उन पर कठोर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
प्रस्तावित नियमों में सबसे क्रांतिकारी बदलाव ‘सेफ हार्बर’ (Safe Harbour) प्रावधान को लेकर है। वर्तमान में, सेफ हार्बर एक ऐसा कानूनी सुरक्षा कवच है जो सोशल मीडिया कंपनियों को उनके यूजर्स द्वारा पोस्ट की गई किसी भी अवैध या आपत्तिजनक सामग्री के लिए कानूनी जिम्मेदारी से बचाता है। लेकिन नए मसौदे के अनुसार, यदि कंपनियां सरकारी निर्देशों का पालन नहीं करती हैं, तो उनसे यह सुरक्षा कवच छीन लिया जाएगा। इसका अर्थ यह है कि प्लेटफॉर्म अपने यूजर्स द्वारा पोस्ट किए गए हर एक कंटेंट के लिए कानूनी रूप से खुद उत्तरदायी होंगे। सरकार ने इस मसौदे पर आम जनता और हितधारकों से 14 अप्रैल तक सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं।
नए नियमों के तहत डेटा प्रबंधन को लेकर भी सख्ती बरती गई है। यदि किसी अन्य कानून (जैसे वित्त, टैक्स या आपराधिक जांच) के तहत डेटा को सुरक्षित रखना अनिवार्य है, तो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म उसे अपनी मर्जी से डिलीट नहीं कर सकेंगे। इसके अलावा, डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड का दायरा भी बढ़ा दिया गया है। पहले यह केवल न्यूज पब्लिशर्स पर लागू होता था, लेकिन अब सोशल मीडिया पर समाचार या समसामयिक घटनाओं (Current Affairs) को पोस्ट करने वाले व्यक्तिगत यूजर्स भी इसके दायरे में आएंगे। इससे सूचनाओं की प्रमाणिकता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
प्रस्तावित बदलावों में सरकार को यह शक्ति दी गई है कि वह किसी भी आपत्तिजनक कंटेंट से जुड़े मामले को सीधे ‘समीक्षा कमेटी’ के पास भेज सकती है। इसके लिए सरकार को किसी औपचारिक शिकायत या यूजर की रिपोर्ट का इंतजार करने की जरूरत नहीं होगी। सरकार स्वतः संज्ञान लेकर किसी भी पोस्ट की समीक्षा कर सकती है और उसे हटाने या ब्लॉक करने का आदेश दे सकती है। यह कदम डिजिटल स्पेस में सरकारी निगरानी को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में देखा जा रहा है।
आईटी नियमों में इन बदलावों की घोषणा होते ही विरोध के स्वर भी तेज हो गए हैं। ‘इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन’ (IFF) ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि सरकार इन नियमों के जरिए ऑनलाइन कंटेंट पर ‘सेंसरशिप’ थोपना चाहती है। फाउंडेशन का मानना है कि इन बदलावों का असली मकसद सरकार के खिलाफ किए जाने वाले तंज, मखौल या आलोचनात्मक पोस्ट पर अंकुश लगाना है। सेफ हार्बर प्रावधान को कमजोर करना आम यूजर्स की अभिव्यक्ति की आजादी पर नकेल कसने जैसा है। आलोचकों का कहना है कि इससे सोशल मीडिया कंपनियां कानूनी डर के कारण यूजर्स के वैध कंटेंट को भी हटाने लगेंगी, जिससे इंटरनेट की स्वतंत्रता प्रभावित होगी।
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