Madhya Pradesh : आठ किलोमीटर सड़क 40 घंटे तक जाम रही। करीब 4 हजार वाहन ट्रैफिक जाम में रुके रहे। मध्य प्रदेश के इंदौर में ट्रैफिक जाम में बीमार होकर तीन लोगों की मौत का आरोप लगा है। कोर्ट का सामना करते हुए नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने ‘हैरान’ करने वाला तर्क दिया। उनका दावा है कि लोग बिना काम के बहुत जल्दी सड़कों पर निकल रहे हैं!
इंदौर-देवास नेशनल हाईवे पर छह लेन की सड़क का निर्माण चल रहा है। दूसरी ओर भारी बारिश के कारण कई सड़कों पर पानी जमा हो गया है। गुरुवार शाम से ही नेशनल हाईवे पर ट्रैफिक जाम लगना शुरू हो गया था। शुक्रवार को करीब आठ किलोमीटर तक सड़क पर चार हजार वाहन रुके रहे। कथित तौर पर, काफी देर तक ट्रैफिक जाम में फंसे रहने के कारण संदीप पटेल नाम का व्यक्ति बीमार पड़ गया। उसे रेस्क्यू कर अस्पताल ले जाया जा रहा था। लेकिन सड़क पर ही हार्ट अटैक से उसकी मौत हो गई। शुक्रवार सुबह बलराम पटेल और कमल पांचाल नाम के दो और लोग बीमार पड़ गए। उन्हें जाम से निकालकर अस्पताल में भर्ती कराया गया। लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। इस घटना को लेकर मध्य प्रदेश में हड़कंप मचा हुआ है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है।
इस मामले की सुनवाई सोमवार को जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस विनोद कुमार द्विवेदी की बेंच ने की। कोर्ट के समन पर विभिन्न पक्षकार पेश हुए। इनमें एनएचएआई के अधिकारी (दिल्ली और इंदौर कार्यालय), सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय, इंदौर के जिला मजिस्ट्रेट, इंदौर के पुलिस कमिश्नर आदि शामिल थे। ट्रैफिक जाम और मौतों के बारे में पूछे जाने पर राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण का जवाब, “लोग बिना काम के सड़कों पर क्यों निकल रहे हैं?” ने कोर्ट रूम में हंगामा मचा दिया। प्रतिवादी के वकील ने कहा, “क्या ऐसा लगता है कि कोई बिना किसी कारण के जानबूझकर इस ट्रैफिक जाम में निकल रहा है?”
मृतक बलराम के भतीजे सुमित पटेल राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की इस दलील से नाराज हैं। उन्होंने कहा, ”बिना किसी कारण के सड़कों पर घूमने का समय किसे है? हम एक व्यक्ति को बचाने के लिए सड़क पर निकले थे। एक बीमार परिवार के सदस्य को अस्पताल ले जाया जा रहा था। बदइंतजामी के बाद कोई इस तरह का तर्क दे तो और क्या कह सकता है।” दरअसल, कई लोग राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की इस तरह की टिप्पणियों को असंवेदनशील मानते हैं। कोर्ट ने कहा कि सितंबर तक वैकल्पिक सड़क का काम पूरा करने का आदेश दिया गया था। वह काम अभी भी अधूरा है।
एनएचएआई ने काम पूरा होने में देरी के लिए कर्मचारियों की 10 दिन की हड़ताल को जिम्मेदार ठहराया है। हालांकि, कोर्ट काम में देरी के पीछे इस तर्क से संतुष्ट नहीं है। वादी की ओर से पेश हुए अधिवक्ता गिरीश पटवर्धन ने कहा, ”हाईकोर्ट ने एनएचएआई, इंदौर पुलिस कमिश्नर और इंदौर कलेक्टर को नोटिस जारी किया है। एक सप्ताह के भीतर उनसे जवाब तलब किया है। साथ ही कोर्ट ने टोल कंपनी और सड़क निर्माण कंपनी को मामले में ‘पक्ष’ बनाने का आदेश दिया है।
हाईकोर्ट ने एनएचएआई को सड़क ठेकेदारों और टोल ऑपरेटरों को नोटिस जारी करने को कहा है।” उन्होंने आगे कहा, ”आज (सोमवार) कोर्ट में एनएचएआई ने दलील दी कि ‘बिना काम के इतने सारे लोग सुबह-सुबह सड़कों पर क्यों निकल रहे हैं?” कोर्ट रूम में इस सवाल से हम हैरान रह गए। माननीय कोर्ट ने कहा कि इस तरह की दलील स्वीकार्य नहीं है। नतीजतन, आम नागरिक अब अपने घरों से सुरक्षित तरीके से नहीं निकल पाएगा। कोर्ट ने इस दलील को भी महत्व नहीं दिया।” वकील का सवाल, ”क्या अब से लोगों को अपने घरों से निकलने से पहले राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण से ‘अनुमति पत्र’ लेना होगा?”
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