NHM Strike : छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत कार्यरत 16,000 से अधिक संविदा कर्मियों का आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है। पिछले 20 दिनों से हड़ताल पर बैठे कर्मचारियों ने सोमवार से नवा रायपुर में जल-सत्याग्रह शुरू कर दिया है। इससे पहले सामूहिक इस्तीफा और खून से लिखे गए पत्रों के जरिए सरकार का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की गई, लेकिन अब आंदोलन ने और उग्र रूप ले लिया है।
रायपुर जिला NHM संघ के संगठन मंत्री अमन दास ने कहा कि सरकार अब तक केवल आश्वासन देती रही है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द कोई समाधान नहीं निकला तो विधानसभा का घेराव किया जाएगा और मंत्री-विधायकों के बंगलों के बाहर उग्र प्रदर्शन होंगे।
NHM कर्मचारियों ने पहले ही सामूहिक इस्तीफे देकर सरकार को झटका दे दिया था।
रायपुर में 1600
दुर्ग में 850
रायगढ़ में 500 कर्मचारियों ने इस्तीफा सौंपा।
हालांकि रायपुर CMHO डॉ. मिथिलेश चौधरी ने बताया कि इस्तीफे अभी स्वीकार नहीं किए गए हैं, केवल ज्ञापन लिया गया है।
आंदोलन को भावनात्मक और प्रतीकात्मक ताकत देने के लिए NHM कर्मचारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, और स्वास्थ्य मंत्री को खून से पत्र लिखे हैं। उनका कहना है कि जन स्वास्थ्य के लिए दिन-रात सेवा देने वाले संविदा कर्मियों के साथ भेदभाव हो रहा है, जिसे अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
स्वास्थ्य विभाग ने 3 सितंबर को 25 संविदा कर्मियों को बर्खास्त कर दिया। इसमें NHM संविदा कर्मचारी संगठन के प्रदेश संरक्षक हेमंत सिन्हा और महासचिव कौशलेश तिवारी भी शामिल हैं। बर्खास्तगी के बाद से आंदोलन और ज़्यादा तेज़ हो गया है। कर्मचारियों का कहना है कि यह फैसला आंदोलन को दबाने की साजिश है।
प्रदेश के ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों में टीकाकरण, प्रसव सेवा, और प्राथमिक स्वास्थ्य जांच जैसी सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह आंदोलन और लंबा खिंचा, तो राज्य की जन स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।
संविदा कर्मियों की मुख्य मांगें:
नियमितीकरण
समान कार्य के लिए समान वेतन
सामाजिक सुरक्षा और स्थायी सेवा शर्तें
मनमानी बर्खास्तगी पर रोक
छत्तीसगढ़ में NHM कर्मचारियों का यह आंदोलन अब राजनीतिक और सामाजिक दबाव का मुद्दा बनता जा रहा है। जल-सत्याग्रह, सामूहिक इस्तीफे और खून से लिखे गए पत्र जैसे कदम यह दर्शाते हैं कि कर्मियों का धैर्य अब जवाब दे चुका है। सरकार को अब जल्द और स्पष्ट समाधान निकालना होगा, वरना इसका असर स्वास्थ्य सेवाओं से लेकर आने वाले चुनावों तक पड़ सकता है।
Shani Jayanti 2026 : सनातन धर्म में शनि देव को न्याय और कर्मों का फल…
Crude Oil Price Hike : अमेरिका और ईरान के बीच गहराते भू-राजनीतिक संकट का सीधा…
NEET Paper Leak : देश की सबसे प्रतिष्ठित और बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी (NEET-UG…
Ambikapur News: छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर शहर के सबसे व्यस्त और संवेदनशील माने जाने वाले इलाके…
Putin Xi Jinping Talks : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया चीन दौरे ने पूरी…
Japan Earthquake : जापान में शुक्रवार को एक बार फिर धरती डोल उठी, जिससे देश…
This website uses cookies.