Nimisha Priya : केरल की रहने वाली नर्स निमिषा प्रिया, जो यमन की जेल में हत्या के आरोप में मौत की सजा काट रही हैं, एक बार फिर चर्चा में हैं। उनकी बेटी मिशेल अपनी माँ की जान बचाने के लिए अपने पिता टॉमी थॉमस के साथ यमन पहुंची हैं। मिशेल ने भावुक अपील करते हुए कहा, “मैं अपनी माँ से बहुत प्यार करती हूँ, कृपया उन्हें घर वापस ले जाने में मेरी मदद करें।”
मिशेल अपनी माँ को पिछले 10 वर्षों से नहीं देख पाई है। वह भारत में रह रही है, जबकि उसकी माँ यमन की जेल में बंद है। अब वह अपने पिता के साथ यमन पहुंची है, जहाँ वह यमनी अधिकारियों से दया और क्षमा की गुहार लगा रही है। माँ-बेटी की इस पीड़ा को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता और मानवाधिकार संगठनों ने भी चिंता जताई है।
पलक्कड़, केरल की निवासी निमिषा प्रिया 2008 में यमन में नर्स का काम करने गई थीं। वहां उन्होंने एक स्थानीय नागरिक तलाल अब्दो महदी के साथ मिलकर 2015 में एक क्लिनिक खोला। लेकिन साझेदारी में तनाव बढ़ा और 2017 में महदी की मौत के आरोप में निमिषा को गिरफ्तार किया गया। 2018 में यमन की अदालत ने उन्हें मौत की सजा सुनाई।
निमिषा के मुताबिक, महदी ने उनके पासपोर्ट और पैसे जब्त कर लिए, उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया, और ड्रग्स लेने के लिए मजबूर किया। उनकी शिकायतों को प्रशासनिक स्तर पर नजरअंदाज किया गया। 25 जुलाई 2017 को, उन्होंने महदी को नींद का इंजेक्शन देकर बेहोश करने की कोशिश की, लेकिन ओवरडोज़ के कारण उसकी मौत हो गई।
महदी की मौत के बाद, निमिषा ने अपनी सहयोगी हनान के साथ मिलकर शव के टुकड़े किए और पानी की टंकी में डाल दिया। उसी महीने, जब वह यमन से भागने की कोशिश कर रही थीं, तब उन्हें पकड़ लिया गया। इसके बाद से वह यमन की जेल में बंद हैं, जहाँ उन्हें फाँसी की सजा सुनाई गई है।
निमिषा के परिवार ने लगातार भारत सरकार से हस्तक्षेप की मांग की। उन्होंने यमन की सुप्रीम कोर्ट में भी अपील की, लेकिन सजा बरकरार रखी गई। भारत के सर्वोच्च न्यायालय में भी याचिका दाखिल की गई, जिसमें केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की गुहार लगाई गई, लेकिन केंद्र ने कहा कि उनके पास सीमित अधिकार हैं।
मिशेल और उसके पिता टॉमी थॉमस ने मीडिया और यमनी अधिकारियों के सामने भावुक अपील की है। बेटी मिशेल ने कहा, “मैं अपनी माँ से मिलना चाहती हूँ, मैं उनसे बहुत प्यार करती हूँ।” वहीं पिता टॉमी ने दुनिया से अपील करते हुए कहा, “कृपया मेरी पत्नी की जान बचाइए, वह एक निर्दोष माँ है।”
इस पूरे मामले में अब मिशेल की अपील अंतरराष्ट्रीय दया याचिका का रूप ले रही है। विभिन्न सामाजिक संगठनों और मानवाधिकार संस्थाओं ने भारत सरकार और यमनी अधिकारियों से दया और मानवीय दृष्टिकोण से इस केस को देखने की अपील की है। बेटी और पति की उम्मीद अब यमन सरकार की दया पर टिकी है।
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