Niranjan Das
Niranjan Das IAS Property: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अब तक की सबसे बड़ी और निर्णायक कार्रवाई को अंजाम दिया है। ED के रायपुर जोनल ऑफिस ने भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए पूर्व आईएएस अधिकारी और तत्कालीन आबकारी कमिश्नर निरंजन दास सहित 31 आबकारी अधिकारियों पर शिकंजा कसा है। जांच एजेंसी ने इन अधिकारियों की लगभग 38.21 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियों को प्रोविजनल तौर पर कुर्क (Attach) कर लिया है। इस कार्रवाई ने प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है, क्योंकि यह घोटाला राज्य के खजाने को 2800 करोड़ रुपये से अधिक का चूना लगाने से जुड़ा है।
ED की तफ्तीश में जो तथ्य सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। जांच के अनुसार, पूर्व आईएएस निरंजन दास इस पूरे सिंडिकेट के मुख्य स्तंभों में से एक थे। उन्होंने इस घोटाले के जरिए अकेले 18 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध संपत्ति अर्जित की। खुलासे में यह भी बात सामने आई है कि भ्रष्टाचार को निर्बाध रूप से चलाने के लिए वह हर महीने 50 लाख रुपये की ‘फिक्स रिश्वत’ लेते थे। इन 31 अधिकारियों ने मिलकर सरकारी पद और प्रभाव का दुरुपयोग करते हुए कुल 89.56 करोड़ रुपये का अवैध मुनाफा कमाया, जिसे अब सरकारी कब्जे में लिया जा रहा है।
भ्रष्टाचार की कमाई से खड़ी की गई विलासिता की मीनारों को ED ने जमींदोज कर दिया है। कुर्क की गई संपत्तियों की सूची काफी लंबी है:
अचल संपत्तियां (21.65 करोड़): इसमें अधिकारियों के स्वामित्व वाले 78 आलीशान बंगले, प्रीमियम रिहायशी इलाकों में फ्लैट, व्यापारिक दुकानें और कई एकड़ की महंगी कृषि भूमि शामिल है।
चल संपत्तियां (16.57 करोड़): जांच एजेंसी ने भ्रष्टाचार के निवेश चक्र को तोड़ते हुए 197 से ज्यादा बैंक खातों को फ्रीज कर दिया है। इसके अलावा भारी-भरकम फिक्स्ड डिपॉजिट (FD), शेयर बाजार में निवेश, म्यूचुअल फंड्स और महंगी जीवन बीमा पॉलिसियों को भी सीज किया गया है।
ED ने उस सिंडिकेट को बेनकाब किया है जिसने छत्तीसगढ़ के आबकारी विभाग को एक तरह से ‘हाइजैक’ कर लिया था। निरंजन दास और एपी त्रिपाठी (तत्कालीन एमडी, CSMCL) ने मिलकर एक समानांतर व्यवस्था बनाई थी, जिसे विभागीय कोड में ‘पार्ट-बी’ कहा जाता था।
इस खेल के तहत, सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज किए बिना ही दुकानों से अवैध शराब बेची जाती थी। इसके लिए नकली होलोग्राम और बिना पंजीकरण वाली बोतलों का निर्माण किया जाता था। शराब फैक्ट्रियों से सीधे दुकानों तक पहुंचती थी, जिससे सरकारी गोदामों और टैक्स व्यवस्था को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया। इस अवैध व्यापार के बदले आबकारी अधिकारियों को प्रति केस 140 रुपये का कमीशन मिलता था।
ED की इस कार्रवाई ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सरकारी खजाने की लूट में शामिल किसी भी रसूखदार को बख्शा नहीं जाएगा। जांच एजेंसी अब उन कड़ियों को जोड़ रही है जो इस पैसे के अंतिम लाभार्थियों (End Beneficiaries) तक पहुंचती हैं। आने वाले दिनों में कुछ और बड़े नामों पर गाज गिर सकती है। छत्तीसगढ़ में इस मामले को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां भी तेज हो गई हैं, क्योंकि यह घोटाला सीधे तौर पर तत्कालीन शासन व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल खड़े करता है।
Read More: Justice For Angel Chakma: देहरादून में एंजेल चकमा की हत्या पर उबाल, जंतर-मंतर पर NSUI का कैंडल मार्च
Kerala Election 2026: भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने केरल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए अपनी…
Assam Election 2026 : असम विधानसभा चुनाव 2026 की सरगर्मियां अब अपने चरम पर पहुंच…
Balrampur Corruption: छत्तीसगढ़ के बलरामपुर-रामानुजगंज जिले से भ्रष्टाचार का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने…
Kerala ADR Report: एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) और केरल इलेक्शन वॉच की नवीनतम रिपोर्ट…
Gold Silver Price Today: भारतीय सर्राफा बाजार के लिए 19 मार्च 2026 की सुबह बड़ी…
Trump warning Netanyahu: मध्य पूर्व (Middle East) एक बार फिर युद्ध की भीषण ज्वाला में…
This website uses cookies.