Nirjala Ekadashi 2026 : सनातन धर्म में एकादशी व्रतों का अत्यंत विशेष स्थान है, जिनमें से ‘निर्जला एकादशी’ को सभी व्रतों में सर्वोच्च और अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो भक्त वर्ष भर की सभी एकादशियों का व्रत करने में असमर्थ होते हैं, वे यदि केवल निर्जला एकादशी का विधि-विधान से पालन करें, तो उन्हें उन सभी एकादशियों का पुण्य फल एक साथ प्राप्त हो जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, पांडु पुत्र भीम ने महर्षि व्यास के निर्देश पर इस कठिन व्रत का पालन किया था, जिसके कारण इसे ‘भीमसेनी एकादशी’ भी कहा जाता है। ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की तिथि पर आने वाली यह एकादशी मोक्ष प्रदान करने वाली मानी गई है।

कठोर व्रत और मोक्ष प्राप्ति का मार्ग
निर्जला एकादशी का व्रत अपनी कठिन तपस्या के लिए जाना जाता है। जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, इस दिन व्रती बिना जल ग्रहण किए उपवास रखते हैं। भक्त सूर्योदय से लेकर अगले दिन के सूर्योदय तक जल की एक बूंद भी ग्रहण नहीं करते हैं। आध्यात्मिक दृष्टि से, इस दिन की गई साधना का प्रभाव इतना गहरा होता है कि आत्मा जन्म-मरण के चक्र से मुक्त होकर बैकुंठ धाम का मार्ग प्रशस्त करती है। यह व्रत न केवल शारीरिक शुद्धि का माध्यम है, बल्कि यह मन और आत्मा को भगवान विष्णु के चरणों में समर्पित करने का एक श्रेष्ठ अवसर भी है।

सुख-समृद्धि के लिए तुलसी मंजरी के विशेष उपाय
इस पवित्र दिन पर तुलसी पूजन का विशेष महत्व है। भगवान विष्णु को प्रिय तुलसी की मंजरी (तुलसी के बीज) का उपयोग करके कुछ विशेष उपाय करने से जीवन की दरिद्रता और समस्याओं का नाश होता है:
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धन वृद्धि के लिए: निर्जला एकादशी पर तुलसी की मंजरी को एक लाल रेशमी कपड़े में बांधकर इसे भगवान विष्णु के चरणों का स्पर्श कराएं। तत्पश्चात, इसे अपनी तिजोरी या धन रखने के स्थान पर रख दें। मान्यता है कि इससे घर में धन का निरंतर आगमन होता है।
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कर्ज मुक्ति के लिए: शाम के समय तुलसी की मंजरी को कच्चे दूध में मिलाकर भगवान विष्णु का अभिषेक करें। इस उपाय से आर्थिक संकटों से मुक्ति मिलती है और आय के नए स्रोत खुलते हैं।
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नकारात्मकता दूर करने के लिए: एक तांबे के पात्र में गंगाजल भरें और उसमें थोड़ी तुलसी की मंजरी डालें। इस जल का घर के हर कोने में छिड़काव करने से नकारात्मक ऊर्जा नष्ट होती है।
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पारिवारिक शांति के लिए: घर के तुलसी के पौधे पर लाल रंग का कलावा बांधें और भगवान से सुख-शांति की प्रार्थना करें। इससे घर में व्याप्त क्लेश समाप्त होता है।
निर्जला एकादशी 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त
द्रिक पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में निर्जला एकादशी का व्रत 25 जून, गुरुवार को रखा जाएगा। इस एकादशी तिथि का प्रारंभ 24 जून 2026 को शाम 06:12 बजे से हो रहा है। वहीं, एकादशी तिथि का समापन 25 जून 2026 को रात 08:09 बजे होगा। सूर्योदय व्यापिनी तिथि होने के कारण गृहस्थ और वैष्णव जन इसी दिन व्रत का पालन करेंगे। भक्तों को चाहिए कि वे इस दिन भगवान विष्णु की आराधना करते हुए मन में भक्ति भाव रखें और संभव हो तो दान-पुण्य भी करें, ताकि इस व्रत का पूर्ण फल प्राप्त हो सके।
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