Nisha Mehta Nepal Health Minister: भारत के प्रतिष्ठित संस्थान अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), दिल्ली के लिए गर्व का एक ऐतिहासिक क्षण सामने आया है। एम्स के ‘कॉलेज ऑफ नर्सिंग’ की पूर्व छात्रा निशा मेहता को पड़ोसी देश नेपाल का नया स्वास्थ्य मंत्री नियुक्त किया गया है। यह उपलब्धि न केवल निशा के व्यक्तिगत करियर के लिए मील का पत्थर है, बल्कि यह दक्षिण एशिया की राजनीति और स्वास्थ्य नीति में नर्सिंग समुदाय के बढ़ते प्रभाव को भी रेखांकित करती है। एम्स प्रशासन ने इस पर हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि एक नर्स का नीति-निर्धारण (Policy Making) के सर्वोच्च शिखर तक पहुँचना पूरे चिकित्सा जगत के लिए प्रेरणादायक है।

निशा मेहता का एम्स दिल्ली से जुड़ाव और शैक्षणिक सफर
निशा मेहता की सफलता की जड़ें दिल्ली के एम्स संस्थान में गहरी जमी हुई हैं। उन्होंने वर्ष 2006 से 2010 के बीच एम्स दिल्ली से बी.एससी. ऑनर्स (नर्सिंग) की डिग्री प्राप्त की थी। संस्थान के रिकॉर्ड और शिक्षकों के अनुसार, निशा अपने छात्र जीवन के दौरान ही एक मेधावी और जिम्मेदार छात्रा के रूप में जानी जाती थीं। एम्स प्रशासन ने रविवार को जारी अपने आधिकारिक बयान में निशा की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने अपने शैक्षणिक काल में ही असाधारण नेतृत्व क्षमता का परिचय दिया था। बेडसाइड नर्सिंग से लेकर स्वास्थ्य मंत्रालय के गलियारों तक का उनका यह सफर नर्सिंग पेशे की असीमित संभावनाओं को दर्शाता है।
नेपाल की स्वास्थ्य व्यवस्था में क्रांतिकारी सुधारों की उम्मीद
निशा मेहता ने 27 मार्च, 2026 को नेपाल के स्वास्थ्य मंत्री के रूप में पद एवं गोपनीयता की शपथ ली। उनके कार्यभार संभालते ही नेपाल के चिकित्सा क्षेत्र में नई उम्मीदें जाग गई हैं। एक पेशेवर नर्स होने के नाते, उन्हें जमीनी स्तर की स्वास्थ्य समस्याओं और मरीजों की जरूरतों की गहरी समझ है। विशेषज्ञों का मानना है कि निशा नेपाल के सार्वजनिक स्वास्थ्य ढांचे, ग्रामीण चिकित्सा सेवाओं और महामारी प्रबंधन में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती हैं। उनकी नियुक्ति यह सिद्ध करती है कि स्वास्थ्य क्षेत्र का नेतृत्व यदि किसी अनुभवी स्वास्थ्यकर्मी के हाथ में हो, तो नीतियों का क्रियान्वयन अधिक प्रभावी ढंग से हो सकता है।
नेपाल चुनाव में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) की ऐतिहासिक जीत
निशा मेहता की यह महत्वपूर्ण नियुक्ति नेपाल के राजनीतिक परिदृश्य में आए एक बड़े भूचाल का परिणाम है। हाल ही में संपन्न हुए आम चुनावों में ‘राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी’ (RSP) ने अभूतपूर्व सफलता हासिल की है। 5 मार्च को हुए मतदान के परिणामों ने सबको चौंका दिया, जहाँ RSP ने प्रतिनिधि सभा की कुल 275 सीटों में से 182 सीटों पर विशाल बहुमत के साथ कब्जा किया। इस प्रचंड जीत ने नेपाल में पारंपरिक राजनीति के दौर को समाप्त कर एक नई और युवा सोच वाली सरकार के गठन का मार्ग प्रशस्त किया है, जिसका हिस्सा अब निशा मेहता भी हैं।
‘जेन-जी’ का विद्रोह और सत्ता में बड़ा बदलाव
नेपाल में यह सत्ता परिवर्तन अचानक नहीं हुआ है, बल्कि इसके पीछे लंबे समय से सुलग रहा जनाक्रोश था। पिछले साल सितंबर में पूर्व प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली की सरकार के खिलाफ ‘जेन-जी’ (Gen-Z) यानी युवाओं ने बड़े पैमाने पर मोर्चा खोल दिया था। भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और सोशल मीडिया पर लगाए गए प्रतिबंधों के विरोध में हुए इन प्रदर्शनों ने ओली सरकार की नींव हिला दी थी। युवाओं की इसी ताकत और बदलाव की इच्छा ने नई सरकार को जन्म दिया है। अब निशा मेहता जैसी शिक्षित और पेशेवर हस्तियों से यह अपेक्षा है कि वे युवाओं की आकांक्षाओं पर खरी उतरेंगी।


















