राष्ट्रीय

Nishikant Dubey News: मराठी भाषियों के अपमान का मामला; भाजपा सांसद को नासिक कोर्ट का बुलावा!

Nishikant Dubey News: भारतीय जनता पार्टी के फायरब्रांड सांसद निशिकांत दुबे एक बार फिर गंभीर कानूनी विवादों के केंद्र में आ गए हैं। उत्तर प्रदेश और बिहार में मराठी भाषी समुदाय के खिलाफ दिए गए उनके एक पुराने और कथित तौर पर आपत्तिजनक बयान ने अब उनके लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। महाराष्ट्र की नासिक जिला सत्र अदालत ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सांसद दुबे के खिलाफ समन जारी किया है। अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि उन्हें 7 अप्रैल 2026 को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होना होगा। इस अदालती आदेश के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।

विवाद की जड़: ‘पटक-पटक कर मारने’ वाला कथित बयान

सांसद निशिकांत दुबे पर आरोप है कि उन्होंने एक सार्वजनिक मंच से मराठी भाषी लोगों की अस्मिता को ठेस पहुँचाई थी। याचिकाकर्ता के अनुसार, दुबे ने अपने संबोधन में कहा था कि यदि महाराष्ट्र के मराठी लोग उत्तर प्रदेश या बिहार की धरती पर कदम रखते हैं, तो उन्हें ‘पटक-पटक कर’ मारा जाएगा। इस बयान के वायरल होने के बाद महाराष्ट्र में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली थी। विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठनों ने इसे क्षेत्रवाद को बढ़ावा देने वाला और सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने वाला कृत्य करार देते हुए उनकी गिरफ्तारी की मांग की थी।

मनसे की कानूनी लड़ाई: सुदाम कोंबडे की याचिका और चेतावनी

इस पूरे विवाद को न्यायिक दहलीज तक ले जाने का श्रेय नासिक जिला मनसे प्रमुख सुदाम कोंबडे को जाता है। उन्होंने जिला सत्र न्यायालय में याचिका दायर कर आरोप लगाया कि दुबे के बयान न केवल अपमानजनक हैं, बल्कि समाज में वैमनस्य फैलाने की एक सोची-समझी साजिश हैं। कोंबडे ने कड़े तेवर अपनाते हुए कहा कि निशिकांत दुबे लगातार राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे जैसे महाराष्ट्र के सम्मानित नेताओं का अपमान कर रहे हैं। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि अगर दुबे में साहस है, तो वे नासिक आकर दिखाएं। उनके अनुसार, मराठी अस्मिता का अपमान करने वाले किसी भी नेता को कानूनी सबक सिखाना अनिवार्य है।

राज ठाकरे का पलटवार: ‘डुबो-डुबो कर मारने’ की दी थी धमकी

निशिकांत दुबे की टिप्पणी के बाद महाराष्ट्र की राजनीति के दिग्गज नेता और मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने भी उस समय आक्रामक रुख अपनाया था। दुबे के ‘पटक-पटक कर मारने’ वाले बयान के जवाब में राज ठाकरे ने पलटवार करते हुए कहा था कि यदि भाजपा सांसद महाराष्ट्र की भूमि पर कदम रखते हैं, तो उन्हें ‘डुबो-डुबो कर मारेंगे’। इस जुबानी जंग ने दोनों राज्यों के राजनीतिक संबंधों में काफी तल्खी पैदा कर दी थी। याचिकाकर्ता कोंबडे का यह भी दावा है कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी दुबे को ऐसे भड़काऊ बयानों से बचने की सलाह दी थी, लेकिन इसका उन पर कोई असर नहीं हुआ।

7 अप्रैल को टिकी हैं सबकी निगाहें

निशिकांत दुबे को जारी किया गया यह समन उनके राजनीतिक करियर के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है। मराठी मानुस और उत्तर भारतीय राजनीति के बीच उपजा यह टकराव अब कानूनी मोड़ ले चुका है। अदालत की यह कार्यवाही यह तय करेगी कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और भड़काऊ बयानबाजी के बीच की रेखा कहां समाप्त होती है। अब पूरे देश और विशेषकर महाराष्ट्र की जनता की नजरें 7 अप्रैल पर टिकी हैं। क्या सांसद दुबे कानून का सम्मान करते हुए अदालत में हाजिर होंगे या इस मामले में कोई नया राजनीतिक मोड़ आएगा, यह देखना दिलचस्प होगा।

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