Nitesh Rane vs Rahul Gandhi
Nitesh Rane vs Rahul Gandhi: मध्य प्रदेश के कद्दावर नेता और कांग्रेस के वरिष्ठ राजनीतिज्ञ दिग्विजय सिंह द्वारा भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और आरएसएस की संगठनात्मक शक्ति की प्रशंसा किए जाने के बाद देश का सियासी पारा चढ़ गया है। अक्सर भगवा विचारधारा के कट्टर आलोचक रहे दिग्विजय सिंह के इन बदले हुए सुरों ने न केवल कांग्रेस के भीतर हलचल मचा दी है, बल्कि विपक्षी खेमे को भी हमलावर होने का मौका दे दिया है। इसी क्रम में महाराष्ट्र सरकार के मंत्री और बीजेपी के फायरब्रांड नेता नितेश राणे ने इस पर चुटकी लेते हुए कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को आड़े हाथों लिया है।
नितेश राणे ने दिग्विजय सिंह के बयान पर अपनी पहली प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सत्य को स्वीकार करने में भले ही समय लगा हो, लेकिन अंततः कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं को भी जमीनी हकीकत समझ आने लगी है। राणे ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा, “दिग्विजय सिंह जैसे लोगों के लिए यह ‘देर आए दुरुस्त आए’ वाली स्थिति है। जो लोग वर्षों तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को कोसते रहे, आज उन्हें उसी संगठन की शक्ति, अनुशासन और राष्ट्र निर्माण के प्रति समर्पण का अहसास हो रहा है, तो यह स्वागत योग्य है।” उन्होंने इसे संघ की विचारधारा की जीत बताया।
नितेश राणे यहीं नहीं रुके, उन्होंने कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और महासचिव प्रियंका गांधी को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने सुझाव दिया कि केवल दिग्विजय सिंह ही क्यों, राहुल गांधी को भी एक बार संघ की शाखा में आकर अनुभव लेना चाहिए। राणे के अनुसार, आरएसएस एक ऐसा संगठन है जिसके लिए ‘राष्ट्र सर्वोपरि’ का सिद्धांत सबसे ऊपर होता है। उन्होंने कहा कि यदि राहुल गांधी और प्रियंका गांधी शाखा में आकर बैठेंगे और संघ की कार्यप्रणाली को करीब से देखेंगे, तो उनका अपना भी भला होगा और उन्हें देश की जड़ों को समझने में मदद मिलेगी।
बीजेपी नेता ने जोर देकर कहा कि आरएसएस का मुख्य उद्देश्य राष्ट्र का पुनर्निर्माण और अखंडता को बनाए रखना है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर कांग्रेस का नेतृत्व संघ की कार्यसंस्कृति को अपना ले, तो उन्हें राष्ट्र विरोधी ताकतों को पहचानने और उन्हें खत्म करने में बड़ी मदद मिलेगी। राणे का मानना है कि कांग्रेस के भीतर वैचारिक शून्यता आ गई है, जिसे केवल राष्ट्रवाद की विचारधारा से ही भरा जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि दिग्विजय सिंह का यह बयान इस बात का प्रमाण है कि बीजेपी-आरएसएस का संगठनात्मक ढांचा अद्वितीय है।
दिग्विजय सिंह के इस बयान और उस पर बीजेपी की प्रतिक्रियाओं ने महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश सहित पूरे देश में एक नई बहस छेड़ दी है। जहां कांग्रेस के कुछ नेता इस बयान को दिग्विजय सिंह का व्यक्तिगत अवलोकन बताकर पल्ला झाड़ रहे हैं, वहीं बीजेपी इसे अपनी नैतिक और संगठनात्मक जीत के रूप में पेश कर रही है। नितेश राणे जैसे नेताओं के बयानों से यह स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में ‘मराठी मानुस’ और ‘हिंदुत्व’ के मुद्दों पर राजनीति और अधिक आक्रामक होने वाली है।
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