Nitin Gadkari on E20 Fuel : भारत में पेट्रोल के साथ इथेनॉल मिलाने यानी E20 फ्यूल को लेकर जारी विवाद पर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बड़ा बयान दिया है। भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) के एक कार्यक्रम में उन्होंने दावा किया कि E20 ईंधन के खिलाफ चलाया गया विरोध पैसे देकर संचालित किया गया अभियान था। गडकरी के अनुसार, करीब तीन महीने पहले इस मुद्दे पर काफी विरोध देखने को मिला था, लेकिन अब लोगों की नाराजगी कम हो गई है। उनके इस बयान के बाद इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को लेकर बहस फिर चर्चा में आ गई है।

जीवाश्म ईंधन के आयात पर निर्भरता घटाना चाहती है सरकार
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत को जीवाश्म ईंधन के आयात पर अपनी निर्भरता कम करने की जरूरत है। इससे देश की बहुमूल्य विदेशी मुद्रा बचाने में मदद मिल सकती है। इथेनॉल जैसे वैकल्पिक ईंधनों को बढ़ावा देना इसी रणनीति का हिस्सा है। पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने का उद्देश्य आयातित पेट्रोलियम उत्पादों की खपत घटाना और वैकल्पिक ईंधन के इस्तेमाल को प्रोत्साहित करना है। इसी बीच, सरकार ने फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों से जुड़े नियमों में भी बदलाव किया है, जिससे अधिक इथेनॉल वाले ईंधनों पर चलने वाले वाहनों के प्रमाणन का रास्ता स्पष्ट हुआ है।

E100 ईंधन को लेकर सरकार ने क्या बदला?
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में संशोधन किया है। 26 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित अधिसूचना के तहत वाहन उत्सर्जन मानकों में E100 ईंधन को भी शामिल किया गया है। इस बदलाव से वाहन निर्माता कंपनियों को E85 और E100 जैसे उच्च इथेनॉल मिश्रण वाले ईंधनों पर चलने के लिए डिजाइन किए गए वाहनों को निर्धारित मानकों के अनुसार प्रमाणित कराने का रास्ता मिलता है। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि बाजार में मौजूद हर पेट्रोल वाहन अब इन ईंधनों का इस्तेमाल कर सकता है। वाहन को संबंधित तकनीकी और नियामकीय मानकों के अनुरूप होना जरूरी है।
E85 और E100 फ्यूल में क्या अंतर है?
E85 ऐसा ईंधन है, जिसमें अधिकतम 85 प्रतिशत इथेनॉल होता है। वहीं E100 को लगभग शुद्ध इथेनॉल वाला ईंधन माना जाता है। इन ईंधनों पर चलने के लिए फ्लेक्स-फ्यूल वाहन तैयार किए जाते हैं। ऐसे वाहनों के इंजन, फ्यूल सिस्टम और अन्य जरूरी हिस्सों को इस तरह डिजाइन किया जाता है कि वे निर्माता की मंजूरी के अनुसार पेट्रोल और इथेनॉल के अलग-अलग मिश्रण का इस्तेमाल कर सकें। इससे वाहन तकनीक के आधार पर अलग-अलग ईंधन विकल्पों के उपयोग की संभावना बढ़ती है।
क्या पुरानी पेट्रोल कार में इस्तेमाल कर सकते हैं E100?
E100 से जुड़े नए नियमों के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या सामान्य पेट्रोल कार में भी यह ईंधन डाला जा सकेगा। इसका जवाब है—नहीं, हर कार में ऐसा करना सुरक्षित या अनुमत नहीं है। केवल उन्हीं वाहनों में E85 या E100 का इस्तेमाल किया जाना चाहिए, जिन्हें निर्माता ने संबंधित ईंधन के अनुकूल डिजाइन और प्रमाणित किया हो। किसी कार का E10 या E20 पेट्रोल के अनुकूल होना इस बात की गारंटी नहीं देता कि वह E85 या E100 पर भी चल सकती है। वाहन मालिकों को ईंधन बदलने से पहले निर्माता के निर्देशों की जांच करनी चाहिए।

राजमार्गों की गुणवत्ता पर भी गडकरी ने दिया भरोसा
कार्यक्रम के दौरान नितिन गडकरी ने देश के राजमार्गों की खराब स्थिति को लेकर सोशल मीडिया पर मिली शिकायतों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि हाल ही में लगभग 700 से 800 राजमार्ग परियोजनाओं की समीक्षा की गई है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि सड़क निर्माण की गुणवत्ता से किसी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि अगले दो वर्षों में राजमार्गों पर यात्रा करने वाले लोगों को असुविधा से बचाने के लिए आवश्यक प्रयास किए जाएंगे। अब वाहन ईंधन से जुड़े नए नियमों और राजमार्गों की गुणवत्ता सुधारने के सरकारी प्रयासों पर लोगों की नजर बनी हुई है।
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