Nitin Gadkari News
Nitin Gadkari News: केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने एक बार फिर अपने बेबाक बयानों से देश की राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। मंगलवार को एक पुस्तक विमोचन कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कांग्रेस की नीतियों और विचारधारा पर तीखा प्रहार किया। गडकरी का मानना है कि आजादी के बाद से भारत जिन हिंदू-मुस्लिम समस्याओं और सांप्रदायिक चुनौतियों का सामना कर रहा है, उसकी जड़ें कांग्रेस की ‘वोट बैंक की राजनीति’ और धर्मनिरपेक्षता (सेक्युलरिज्म) की उनकी अपनी विशेष परिभाषा में छिपी हैं। गडकरी ने स्पष्ट किया कि शब्दकोश के अर्थ और कांग्रेस द्वारा प्रचारित अर्थ में बड़ा अंतर है, जिसने समाज में विभाजन के बीज बोए हैं।
नितिन गडकरी ने ‘सेक्युलर’ (Secular) शब्द की व्याख्या करते हुए कांग्रेस को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी शब्द ‘सेक्युलर’ का वास्तविक हिंदी अनुवाद ‘धर्मनिरपेक्ष’ नहीं, बल्कि ‘सर्व धर्म समभाव’ होना चाहिए। उनके अनुसार, सच्ची धर्मनिरपेक्षता का अर्थ है—“सभी के लिए न्याय और किसी का भी तुष्टिकरण नहीं।” गडकरी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने अपनी राजनीतिक सुविधानुसार इस शब्द की गलत व्याख्या की और इसे तुष्टिकरण के औजार के रूप में इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि इसी ‘विकृत’ सोच के कारण देश आज भी समाज में धार्मिक तनाव और अस्थिरता का सामना कर रहा है।
पूर्व भाजपा अध्यक्ष ने ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में बात करते हुए कहा कि 1947 में आजादी मिलने के बाद कांग्रेस को देश पर लंबे समय तक शासन करने का अवसर मिला। लेकिन उस दौरान उन्होंने कुछ ऐसी नीतियां अपनाईं और ऐसे ‘बीज’ बोए, जिससे हिंदू-मुस्लिम समस्याओं को फलने-फूलने का मौका मिला। गडकरी का तर्क है कि कांग्रेस ने राष्ट्र प्रथम (Nation First) की विचारधारा के बजाय वोट बैंक को प्राथमिकता दी। उन्होंने उदय माहुरकर की पुस्तक ‘माई आइडिया ऑफ नेशन फर्स्ट’ के विमोचन पर कहा कि कांग्रेस के इसी सेक्युलरवाद ने उन समस्याओं को जन्म दिया है, जो वर्तमान पीढ़ी के लिए भी परेशानी का सबब बनी हुई हैं।
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के शब्दों को याद करते हुए गडकरी ने गर्व से कहा, “भारत एक सेक्युलर देश है, यह सेक्युलर था और सदैव सेक्युलर ही रहेगा।” हालांकि, उन्होंने इसके पीछे का कारण भाजपा या आरएसएस को नहीं, बल्कि भारतीय और सनातन संस्कृति को बताया। उन्होंने कहा कि भारत का धर्मनिरपेक्ष चरित्र यहाँ की हिंदू संस्कृति की देन है, जहाँ सदियों से ‘विश्व का कल्याण हो’ का नारा लगाया जाता है। यह संस्कृति किसी एक समुदाय के तुष्टिकरण पर नहीं, बल्कि ‘वसुधैव कुटुंबकम’ के सिद्धांत पर आधारित है।
नितिन गडकरी ने किसी का नाम लिए बिना नेहरू-गांधी परिवार पर परोक्ष रूप से कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में हम ‘विश्व के कल्याण’ की बात करते हैं, हम कभी यह नहीं कहते कि ‘सिर्फ मेरा कल्याण हो’ या ‘सिर्फ मेरे परिवार का कल्याण हो’। उन्होंने परिवारवाद की राजनीति को राष्ट्रवाद के विपरीत बताया। गडकरी ने इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि हिंदू राजाओं का कोई ऐसा रिकॉर्ड नहीं है जहाँ उन्होंने दूसरे धर्मों के पूजा स्थलों को नष्ट किया हो, क्योंकि विस्तारवाद या अधिकारवाद हमारे ‘आनुवंशिकी’ (Genetics) में नहीं है।
अपने संबोधन के अंत में केंद्रीय मंत्री ने इतिहास को याद रखने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इतिहास को केवल अतीत की घटनाओं के रूप में नहीं, बल्कि एक शिक्षक के रूप में देखा जाना चाहिए। अतीत में हुई रणनीतिक और वैचारिक ‘गलतियों’ को याद करना इसलिए आवश्यक है ताकि वर्तमान और भविष्य की सरकारें उन्हें दोबारा न दोहराएं। गडकरी के अनुसार, जब तक हम तुष्टिकरण की राजनीति का त्याग कर ‘राष्ट्र प्रथम’ के मार्ग पर नहीं चलेंगे, तब तक सामाजिक समस्याओं का पूर्ण समाधान संभव नहीं है।
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