Nitish Kumar Hijab Row: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान महिला डॉक्टर का हिजाब हटाने का मामला अब राष्ट्रीय स्तर पर तूल पकड़ चुका है। इस घटना की गूंज अब जम्मू-कश्मीर तक पहुँच गई है, जहाँ राजनीतिक गलियारों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री की इस हरकत को लेकर न केवल उनकी आलोचना हो रही है, बल्कि उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी शुरू हो गई है।
Nitish Kumar Hijab Row: इल्तिजा मुफ्ती की कड़ी चेतावनी और श्रीनगर में FIR
पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की नेता और महबूबा मुफ्ती की बेटी इल्तिजा मुफ्ती ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाया है। शुक्रवार को उन्होंने श्रीनगर में नीतीश कुमार के खिलाफ आधिकारिक प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई। मीडिया से मुखातिब होते हुए इल्तिजा ने नीतीश कुमार को सीधा संदेश दिया। उन्होंने कहा, “आपको कोई हक नहीं है कि आप हमारे हिजाब या नकाब को हाथ लगाएं।” उन्होंने चेतावनी देते हुए आगे कहा कि यदि भविष्य में ऐसी हरकत दोबारा हुई, तो मुस्लिम महिलाएं उन्हें ऐसा सबक सिखाएंगी जिसे वे कभी नहीं भूलेंगे।
Nitish Kumar Hijab Row: सत्ता पक्ष की बयानबाजी पर भड़कीं इल्तिजा
इल्तिजा मुफ्ती ने केवल मुख्यमंत्री ही नहीं, बल्कि भाजपा नेताओं के बयानों पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार को अपनी गलती के लिए माफी मांगनी चाहिए थी, लेकिन इसके उलट सत्ता पक्ष के नेता जैसे गिरिराज सिंह बेहद आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी महिला की गरिमा और उसके पहनावे का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
क्या थी पूरी घटना? पटना के कार्यक्रम का सच
विवाद की शुरुआत 15 दिसंबर को पटना में आयोजित एक सरकारी समारोह से हुई। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 1,283 आयुष डॉक्टरों को नियुक्ति पत्र बांट रहे थे। इसी दौरान डॉ. नुसरत परवीन नाम की एक महिला डॉक्टर अपना नियुक्ति पत्र लेने मंच पर आईं। नुसरत ने हिजाब पहन रखा था। जैसे ही वे नीतीश कुमार के पास पहुँचीं, मुख्यमंत्री ने अचानक सबका ध्यान खींचने के लिए या किसी अन्य मंशा से महिला का हिजाब खींच दिया। यह पूरी घटना कैमरों में कैद हो गई और देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल हो गई।
उमर अब्दुल्ला का सवाल: महिला की गरिमा का क्या?
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इसे धार्मिक चश्मे से हटाकर एक महिला की गरिमा के रूप में देखा जाना चाहिए। अब्दुल्ला ने सवाल उठाया, “किसी भी महिला के कपड़ों को इस तरह छूना या खींचना कैसे सही हो सकता है?” उन्होंने नीतीश कुमार को सलाह दी कि वे डॉ. नुसरत को बुलाकर व्यक्तिगत रूप से माफी मांगें। उन्होंने भाजपा पर भी निशाना साधा कि वे केवल इसलिए इस हरकत का बचाव कर रहे हैं क्योंकि पीड़ित महिला एक मुसलमान है।
आहत डॉ. नुसरत ने छोड़ी सरकारी नौकरी और बिहार
इस अपमानजनक घटना का सबसे बुरा असर डॉ. नुसरत परवीन के मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नुसरत इस कदर आहत हैं कि उन्होंने बिहार सरकार की नौकरी न करने का फैसला लिया है। उनके परिवार ने बताया कि घटना के अगले ही दिन वे कोलकाता वापस लौट आईं और तब से सदमे में हैं। 20 दिसंबर को उन्हें जॉइन करना था, लेकिन उन्होंने साफ कर दिया है कि वे अब बिहार वापस नहीं जाएंगी।
परिजनों के अनुसार, नुसरत ने फोन पर रोते हुए बताया कि वहां मौजूद लोग उन पर हंस रहे थे, जिससे उन्हें गहरा मानसिक आघात पहुँचा है। फिलहाल वे कोलकाता में अपने घर पर हैं और किसी से भी बात करने की स्थिति में नहीं हैं।
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