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Garba no entry controversy: गरबा में ‘नो एंट्री’ पर मचा बवाल: मध्य प्रदेश में नवरात्रि पर राजनीति गरमाई, हिंदू संगठनों की चेतावनी से बढ़ा विवाद

Garba no entry controversy: देशभर में नवरात्रि 2025 की धूम है, लेकिन मध्य प्रदेश में यह पर्व भक्ति और श्रद्धा के साथ-साथ अब सियासत और धार्मिक ध्रुवीकरण का केंद्र बनता जा रहा है। गरबा पंडालों में गैर हिंदुओं की एंट्री पर रोक को लेकर हिंदू संगठनों और बीजेपी नेताओं के बयानों ने नया विवाद खड़ा कर दिया है।

गरबा पंडालों में ‘गैर हिंदू वर्जित’

भोपाल और इंदौर समेत कई शहरों में गरबा आयोजकों को गाइडलाइन जारी की जा रही हैं, जिनमें साफ तौर पर कहा गया है कि “जिहादियों का प्रवेश वर्जित है, पकड़े जाने पर घर वापसी कराई जाएगी।” ऐसे होर्डिंग्स गरबा पंडालों के बाहर लगाए गए हैं और कुछ स्थानों पर हाथों में लट्ठ लिए कार्यकर्ता भी नजर आ रहे हैं। हिंदू संगठनों का कहना है कि यह कदम ‘लव जिहाद’ और ‘गरबा जिहाद’ को रोकने के लिए जरूरी है।

बाबा बागेश्वर की विवादित सलाह

बागेश्वर धाम पीठ के धीरेंद्र शास्त्री उर्फ बाबा बागेश्वर ने भी इस बहस में हस्तक्षेप किया है। उन्होंने कहा:”जब हम हज में नहीं जाते तो वो गरबा में क्यों आएं? गरबा गेट पर गोमूत्र छिड़कना चाहिए ताकि जिहादी डरें।”उनकी यह टिप्पणी सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है और सांप्रदायिक ध्रुवीकरण को बढ़ावा देने का आरोप लग रहा है।

बीजेपी नेताओं की चेतावनी

भोपाल के बीजेपी सांसद आलोक शर्मा ने कहा कि जो लोग टीका लगाकर, केसरिया गमछा पहनकर पंडालों में घुसते हैं, उन्हें अब बख्शा नहीं जाएगा। भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने भी दो टूक कहा:”अगर गरबा देखना है, तो देवी का प्रसाद लो, माता का आशीर्वाद लो और हिंदू धर्म स्वीकार करो।”राज्य सरकार के मंत्री विश्वास सारंग ने भी गरबा को “भक्ति का पर्व, न कि मनोरंजन का मंच” बताते हुए गैर हिंदुओं के प्रवेश पर आपत्ति जताई।

विपक्ष और मुस्लिम नेताओं की प्रतिक्रिया

बीजेपी के बयानों के बीच कांग्रेस के मुस्लिम पार्षदों ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि मुस्लिम युवाओं को गरबा में जाना ही नहीं चाहिए ताकि सांप्रदायिक उकसावे का बहाना ना मिले।कांग्रेस का आरोप है कि बीजेपी हर त्योहार से पहले विवाद खड़ा करती है ताकि सांप्रदायिक ध्रुवीकरण हो।

क्या गरबा बनेगा धार्मिक टकराव का केंद्र?

नवरात्रि माता की उपासना और सांस्कृतिक उल्लास का पर्व माना जाता है। गरबा सिर्फ नृत्य नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक साधना है। लेकिन ‘गरबा जिहाद’ जैसे शब्दों के प्रयोग और धार्मिक आधार पर एंट्री रोकने के प्रयास से इसकी सांप्रदायिक पहचान गहराने का खतरा बढ़ गया है।

मध्य प्रदेश में गरबा अब सिर्फ भक्ति का नहीं, बल्कि राजनीति और धार्मिक पहचान का मुद्दा बन गया है। सवाल यह है कि क्या धार्मिक आयोजनों में भेदभाव करके समाज में दूरियां नहीं बढ़ेंगी?नवरात्रि का पर्व समावेश और संस्कृति का प्रतीक है, इसे राजनीतिक हथियार बनाना कहीं इस उत्सव की आत्मा को कमजोर न कर दे।

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