US Protests
US Protests: मध्य-पूर्व में गहराते युद्ध के बादलों और ईरान के साथ बढ़ते सैन्य संघर्ष ने न केवल अंतरराष्ट्रीय कूटनीति को प्रभावित किया है, बल्कि अमेरिका के भीतर भी एक बड़े जन-आंदोलन को जन्म दे दिया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की युद्ध नीतियों और आर्थिक फैसलों के विरोध में अमेरिका के दर्जनों शहरों में ‘नो किंग्स’ (No Kings) विरोध प्रदर्शन आयोजित किए गए। प्रदर्शनकारियों का मानना है कि व्हाइट हाउस की नीतियां देश को एक अनावश्यक युद्ध की ओर धकेल रही हैं, जिसका सीधा असर आम जनता की जेब और सुरक्षा पर पड़ रहा है।
सीएनएन (CNN) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, शनिवार को अमेरिका के मेट्रो शहरों से लेकर ग्रामीण इलाकों तक भारी भीड़ सड़कों पर उतरी। इन प्रदर्शनों का मुख्य उद्देश्य ट्रंप प्रशासन की आक्रामक विदेश नीति और देश में बढ़ती महंगाई के प्रति अपना आक्रोश दर्ज कराना था। दिलचस्प बात यह है कि ये प्रदर्शन केवल डेमोक्रेटिक गढ़ों तक सीमित नहीं रहे, बल्कि रिपब्लिकन राज्यों में भी लोगों ने छोटे-छोटे समूहों में इकट्ठा होकर सरकार के खिलाफ आवाज उठाई। प्रदर्शन के दौरान संगीत, नृत्य और सांस्कृतिक गतिविधियों के जरिए अपनी बात शांतिपूर्ण तरीके से रखने की कोशिश की गई।
न्यूयॉर्क शहर के मिडटाउन मैनहट्टन में हजारों लोगों ने मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों के हाथों में ईरान के साथ युद्ध रोकने और इमिग्रेशन नीतियों में सुधार की मांग वाले बैनर थे। वहीं, पश्चिमी तट पर स्थित सैन फ्रांसिस्को के एम्बार्केडेरो प्लाजा में भी भारी जमावड़ा देखा गया। यहाँ लोगों ने न केवल ट्रंप प्रशासन की आलोचना की, बल्कि यूक्रेन के समर्थन और ट्रांसजेंडर अधिकारों जैसे सामाजिक मुद्दों को भी युद्ध विरोधी प्रदर्शनों के साथ जोड़ा। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे एक ऐसी सरकार चाहते हैं जो ‘राजा’ की तरह नहीं बल्कि जनसेवक की तरह व्यवहार करे।
मिनेसोटा के सेंट पॉल में आयोजित रैली इस आंदोलन का केंद्र बिंदु बनकर उभरी। यहाँ मशहूर रॉक गायक ब्रूस स्प्रिंगस्टीन ने अपनी प्रस्तुति से प्रदर्शनकारियों में जोश भर दिया। उन्होंने इस साल जनवरी में फेडरल इमिग्रेशन एजेंटों की कार्रवाई में मारे गए एलेक्स प्रीटी और रेनी गुड को श्रद्धांजलि दी। स्प्रिंगस्टीन ने कड़े शब्दों में कहा कि अमेरिकी शहरों पर किसी भी तरह का अधिनायकवादी हमला बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मिनेसोटा के गवर्नर टिम वाल्ज़ ने भी प्रदर्शनकारियों का साथ देते हुए संघीय इमिग्रेशन नीतियों की तीखी आलोचना की।
मिनेसोटा के गवर्नर ने रैली को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप पर सीधा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि जब व्हाइट हाउस में बैठा व्यक्ति ‘तानाशाह’ की तरह व्यवहार करने की कोशिश करता है और अप्रशिक्षित अधिकारियों को स्थानीय समुदायों में आतंक फैलाने के लिए भेजता है, तब नागरिक अपने पड़ोसियों और मानवीय मूल्यों की रक्षा के लिए खड़े होते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यह ‘नो किंग्स’ विरोध प्रदर्शनों की तीसरी बड़ी लहर है, जो पिछले साल के दो बड़े आयोजनों की तुलना में अधिक व्यापक और संगठित नजर आ रही है।
अमेरिका में यह विरोध प्रदर्शन ऐसे समय में हो रहे हैं जब देश ईंधन की बढ़ती कीमतों और धीमी पड़ती अर्थव्यवस्था से जूझ रहा है। जनता का मानना है कि पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध ने घरेलू संसाधनों को कम कर दिया है। हालांकि अधिकांश प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे, लेकिन फ्लोरिडा के वेस्ट पाम बीच में ट्रंप के समर्थकों और विरोधियों के बीच तीखी मौखिक झड़पें भी देखी गईं। स्थिति को संभालने के लिए भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा। ये प्रदर्शन स्पष्ट करते हैं कि आगामी चुनावों से पहले ट्रंप की नीतियों को लेकर अमेरिकी जनता के बीच भारी असंतोष पनप रहा है।
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