Noida Basement Death
Noida basement death: उत्तर प्रदेश के हाईटेक शहर नोएडा से एक बेहद दुखद और आक्रोश पैदा करने वाली खबर सामने आई है। सेक्टर-150 में एक निर्माणाधीन बेसमेंट में भरे पानी में डूबने से युवा इंजीनियर युवराज की जान चली गई। इस घटना ने न केवल शहर की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि देश की राजनीतिक गलियारों में भी हलचल पैदा कर दी है। प्रशासन अब डैमेज कंट्रोल में जुटा है, लेकिन स्थानीय निवासियों का गुस्सा सातवें आसमान पर है।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने इस घटना पर गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए सीधे तौर पर सरकार और सिस्टम की जवाबदेही पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से कहा कि भारत में आज सड़कें, पुल, आग, पानी और प्रदूषण—सब जानलेवा साबित हो रहे हैं। राहुल गांधी ने जोर देकर कहा कि हमारे शहरों का पतन पैसे या तकनीक की कमी की वजह से नहीं, बल्कि जवाबदेही की भारी कमी के कारण हो रहा है। उन्होंने ‘TINA’ (There Is No Accountability) का नारा देते हुए भ्रष्टाचार और लापरवाही को इस मौत का असल जिम्मेदार ठहराया।
घटना की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तत्काल संज्ञान लिया है। सीएम के निर्देश पर इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए ADG मेरठ जोन की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय एसआईटी (SIT) का गठन किया गया है। यह विशेष टीम अगले 5 दिनों के भीतर अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपेगी। सरकार ने संकेत दिए हैं कि रिपोर्ट में दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह कितना भी रसूखदार क्यों न हो।
प्रशासनिक स्तर पर इस लापरवाही की कीमत बड़े अधिकारियों को चुकानी पड़ रही है। मामले में पहली बड़ी कार्रवाई करते हुए नोएडा अथॉरिटी के सीईओ (CEO) लोकेश एम को उनके पद से हटा दिया गया है। इसके अलावा, नोएडा ट्रैफिक सेल के जूनियर इंजीनियर नवीन कुमार को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया गया है। पुलिस ने दो बिल्डरों के खिलाफ भी आपराधिक मामला दर्ज किया है और संबंधित विभाग के अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।
इस मामले में सबसे चौंकाने वाला खुलासा स्थानीय निवासियों ने किया है। सोसायटी के लोगों का आरोप है कि उन्होंने सेक्टर-150 के इस खतरनाक गड्ढे और जलभराव के बारे में नोएडा अथॉरिटी को कई बार लिखित और मौखिक शिकायतें दी थीं। लेकिन अधिकारियों ने इन चेतावनियों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया। जब इस बारे में एडिशनल सीईओ (A-CEO) सतीश पाल सिंह से सवाल किया गया, तो उन्होंने अनजान बनते हुए कहा कि उन्हें ऐसी किसी शिकायत की जानकारी ही नहीं थी।
सोसायटी के लोग सतीश पाल सिंह के दावों को सिरे से खारिज कर रहे हैं। निवासियों का कहना है कि वे कई बार व्यक्तिगत रूप से ए-सीईओ से मिले थे, लेकिन उन्होंने न केवल कार्रवाई करने से मना कर दिया, बल्कि शिकायतकर्ताओं के साथ बदसलूकी भी की। अधिकारियों द्वारा एक-दूसरे पर जिम्मेदारी थोपने (Passing the buck) के इस रवैये ने लोगों के गुस्से को और भड़का दिया है। युवराज की मौत ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि अफसरशाही की लापरवाही और बिल्डरों की मनमानी आम आदमी की जान पर कितनी भारी पड़ सकती है।
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