Noida engineer death case
Noida engineer death case: लापरवाही ने ली मासूम जान, एक्शन में नोएडा पुलिस नोएडा के सेक्टर-150 में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की दर्दनाक मौत के मामले ने पूरे प्रशासन को हिलाकर रख दिया है। जलभराव और निर्माण कार्य में बरती गई घोर लापरवाही के कारण हुई इस घटना में पुलिस ने अब बड़ा एक्शन लिया है। ग्रेटर नोएडा की नॉलेज पार्क थाना पुलिस ने मंगलवार को एमजेड विसटाउन (MZ Vishtown) के मालिक और मुख्य आरोपी बिल्डर अभय कुमार सिंह को गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरफ्तारी युवराज के पिता राजकुमार मेहता द्वारा दर्ज कराई गई प्राथमिकी और मुख्यमंत्री के कड़े रुख के बाद संभव हुई है।
नोएडा पुलिस ने इस मामले में दर्ज FIR के आधार पर पहली सफलता हासिल की है। नॉलेज पार्क पुलिस के अनुसार, घटना की गंभीरता को देखते हुए दो बिल्डरों—एमजेड विसटाउन और लोटस ग्रीन—को नामजद किया गया था। जांच में पाया गया कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी और बेसमेंट में पानी भरने की वजह से यह हादसा हुआ। पुलिस का कहना है कि अभय कुमार सिंह की गिरफ्तारी तो बस शुरुआत है, इस मामले में शामिल अन्य बिल्डर और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी सघन जांच की जा रही है।
हादसे के दिन केवल युवराज का शव ही निकाला जा सका था, जबकि उनकी कार मलबे और गहरे पानी में कहीं खो गई थी। मंगलवार दोपहर करीब 12:00 बजे एनडीआरएफ (NDRF) और पेशेवर गोताखोरों की टीम ने नावों के साथ मौके पर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। करीब तीन घंटे की मशक्कत के बाद आखिरकार युवराज की कार को ढूंढ लिया गया। अधिकारियों के मुताबिक, कार दो बेसमेंट के बीच खतरनाक तरीके से फंसी हुई है, जिसे निकालने के लिए विशेष उपकरणों की मदद ली जा रही है।
सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मौत पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गहरा दुख व्यक्त किया है और प्रशासनिक ढिलाई पर कड़ी नाराजगी जताई है। सीएम योगी के निर्देश पर तत्काल तीन सदस्यीय विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया गया है। एडीजी जोन मेरठ, भानु भास्कर के नेतृत्व में बनी इस टीम में मेरठ मंडल के कमिश्नर और पीडब्ल्यूडी के चीफ इंजीनियर शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने साफ निर्देश दिए हैं कि 5 दिनों के भीतर पूरी जांच रिपोर्ट सौंपी जाए ताकि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।
एसआईटी के अध्यक्ष भानु भास्कर और नोएडा पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने मंगलवार को घटनास्थल का मुआयना किया। इसके बाद टीम ने नोएडा प्राधिकरण के कार्यालय में पहुंचकर कई घंटों तक संबंधित अधिकारियों से पूछताछ की। इस जांच का मुख्य केंद्र यह है कि निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों का उल्लंघन कैसे हुआ और प्राधिकरण के किस स्तर पर निगरानी में कमी रही। गौरतलब है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए प्राधिकरण के एक जेई (JE) को पहले ही निलंबित किया जा चुका है।
युवराज मेहता की मौत ने नोएडा और ग्रेटर नोएडा में निर्माणाधीन प्रोजेक्ट्स की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। एसआईटी की टीम अब उन तकनीकी पहलुओं की जांच कर रही है कि क्या बेसमेंट में सुरक्षा की दीवारें कमजोर थीं। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि एसआईटी की रिपोर्ट आने के बाद इस मामले में कई बड़े नामों पर गाज गिर सकती है और आने वाले दिनों में और भी गिरफ्तारियां होना तय है। पीड़ित परिवार को अब न्याय और दोषियों को सख्त सजा मिलने की उम्मीद है।
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