FIFA World Cup 2026 : फीफा वर्ल्ड कप के ‘राउंड ऑफ 32’ मुकाबले में जब नार्वे का सामना आइवरी कोस्ट से हुआ, तो दुनियाभर के फुटबॉल प्रेमियों की निगाहें केवल एर्लिंग हालैंड पर टिकी थीं। मैच का पहला हाफ आधा बीत चुका था और दर्शक हालैंड के किसी जादुई प्रदर्शन की प्रतीक्षा कर रहे थे। तभी 39वें मिनट में एक ऐसा पल आया जिसने पूरे स्टेडियम और टीवी स्क्रीन के सामने बैठे दर्शकों को झकझोर दिया।

कमेंटेटर की चीख ने सबका ध्यान अपनी ओर खींचा और स्क्रीन पर ‘नार्वे के नेमार’ कहे जाने वाले 21 वर्षीय एंटोनियो नूसा का गोल देखकर सब दंग रह गए। अपनी अद्वितीय ड्रिब्लिंग और चपलता से नूसा ने यह साबित कर दिया कि वे केवल एक विंगर नहीं, बल्कि मैच का रुख मोड़ने वाले खिलाड़ी हैं। आइवरी कोस्ट के डिफेंडरों ने जब हालैंड को घेर रखा था, तब नूसा ने दूर से ही एक शानदार शॉट मारकर नार्वे को 1-0 की बढ़त दिलाई।

आइवरी कोस्ट की वापसी की कोशिश और अमाद डियालो का कौशल
दूसरे हाफ में आइवरी कोस्ट ने मुकाबले में बने रहने के लिए अपने खेल की गति को बढ़ाया। मैच के 60वें मिनट में मैदान पर आए अमाद डियालो ने खेल का नक्शा बदलने का प्रयास किया। 74वें मिनट में डियालो ने व्यक्तिगत कौशल का परिचय देते हुए नार्वे के रक्षापंक्ति को छकाते हुए एक लंबा रन लिया और जबरदस्त शॉट के जरिए गेंद को गोल पोस्ट के भीतर पहुँचा दिया। डियालो के इस गोल ने न केवल स्कोर को बराबर किया, बल्कि आइवरी कोस्ट की उम्मीदों को भी पुनर्जीवित कर दिया। ऐसा लगने लगा था कि मुकाबला अतिरिक्त समय या पेनल्टी शूटआउट की ओर बढ़ सकता है।
हालैंड का जादुई स्पर्श और नार्वे की निर्णायक जीत
जब आइवरी कोस्ट को लगा कि वे मैच को अतिरिक्त समय में खींचने में सफल होंगे, तभी उनसे एक घातक चूक हो गई। आइवरी कोस्ट के डिफेंडर एर्लिंग हालैंड की उपस्थिति को नजरअंदाज कर गए, और फुटबॉल के मैदान पर हालैंड जैसे शिकारी को एक पल की छूट देना ही सबसे बड़ी भूल होती है। पैट्रिक बर्ग द्वारा दिए गए एक सटीक और खूबसूरत पास पर हालैंड ने बड़ी चतुराई से अपना पैर लगाया। गेंद धीरे-धीरे लुढ़कते हुए गोल के भीतर चली गई। 86वें मिनट में आए इस गोल ने नार्वे को फिर से बढ़त दिला दी और मैच का पासा पूरी तरह पलट दिया।
रोमांचक अंत और नार्वे का प्री-क्वार्टर फाइनल में प्रवेश
मैच के अंतिम क्षणों में आइवरी कोस्ट को बराबरी का गोल करने के लिए एक फ्री-किक का मौका भी मिला, लेकिन नार्वे के गोलकीपर ने डियालो के शॉट को रोककर उनकी सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। अंततः यह मुकाबला नार्वे के पक्ष में रहा और उन्होंने नॉकआउट दौर में अपनी स्थिति मजबूत कर ली। यह मैच इस बात का प्रमाण रहा कि नार्वे की टीम केवल हालैंड पर ही निर्भर नहीं है, बल्कि एंटोनियो नूसा जैसे युवा सितारे भी टीम को नई ऊंचाई पर ले जाने का दम रखते हैं। नार्वे की इस जीत ने टूर्नामेंट को और अधिक रोमांचक बना दिया है।
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