Naxal Free Districts
Naxal Free Districts: ओडिशा के लाल गलियारे (Red Corridor) से एक बेहद सकारात्मक और ऐतिहासिक खबर सामने आई है। राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि बोलांगीर और बरगढ़ जिले अब पूरी तरह से ‘नक्सल मुक्त’ हो चुके हैं। लंबे समय से इन क्षेत्रों में विकास कार्यों और सुरक्षा बलों की उपस्थिति में बाधा डालने वाले माओवादी नेटवर्क को ध्वस्त कर दिया गया है। यह घोषणा राज्य में शांति बहाली की दिशा में एक मील का पत्थर मानी जा रही है, जिससे अब इन आदिवासी बहुल क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं और सरकारी योजनाओं का लाभ तेजी से पहुँच सकेगा।
इस बड़ी सफलता के पीछे माओवादियों का हृदय परिवर्तन और सुरक्षा बलों का दबाव एक प्रमुख कारण रहा है। ओडिशा पुलिस के अनुसार, इस बेल्ट में सक्रिय 15 माओवादियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है। दिलचस्प बात यह है कि इन माओवादियों ने पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में आत्मसमर्पण किया है। चूंकि महासमुंद की सीमा बरगढ़ जिले से सटी हुई है, इसलिए ये विद्रोही बरगढ़-बोलांगीर-महासमुंद के त्रिकोणीय बेल्ट में सक्रिय थे। इनके आत्मसमर्पण से इस पूरे इलाके में माओवादी संगठन की कमर टूट गई है।
ओडिशा के पुलिस महानिदेशक (DGP) वाई बी खुरानिआ ने इस उपलब्धि पर गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि यह राज्य में लंबे समय से चलाए जा रहे निरंतर और संयुक्त एंटी-नक्सल अभियानों (Anti-Naxal Operations) का परिणाम है। उन्होंने बताया कि ओडिशा पुलिस, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) और सीमा सुरक्षा बल (BSF) के बीच बेहतर समन्वय के कारण माओवादियों के छिपने के ठिकाने खत्म हो गए हैं। डीजीपी ने आत्मसमर्पण करने वाले पूर्व कैडरों को सरकार की पुनर्वास नीति का लाभ देने और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का भरोसा दिलाया है।
बोलांगीर और बरगढ़ के जुड़ने के साथ ही ओडिशा में अब कुल 7 जिले नक्सल मुक्त घोषित किए जा चुके हैं। इस सूची में निम्नलिखित जिलों के नाम शामिल हैं:
नुआपाड़ा
नबरंगपुर
कोरापुट
मलकानगिरी
बौध
बोलांगीर
बरगढ़ किसी समय मलकानगिरी और कोरापुट जैसे जिले नक्सलवाद के सबसे बड़े केंद्र माने जाते थे, लेकिन अब वहां की स्थिति में क्रांतिकारी सुधार हुआ है। डीजीपी ने स्पष्ट किया कि राज्य में अब केवल 25 सक्रिय माओवादी ही बचे हैं, जो संगठन की गिरती साख और सुरक्षा बलों की बढ़ती पकड़ को दर्शाता है।
भले ही राज्य का एक बड़ा हिस्सा अब सुरक्षित है, लेकिन ओडिशा पुलिस के लिए चुनौतियाँ अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। राज्य के तीन प्रमुख जिलों—कंधमाल, रायगढ़ा और कालाहांडी में अभी भी माओवादी गतिविधियां छिटपुट रूप से जारी हैं। इन इलाकों की दुर्गम भौगोलिक स्थिति और घने जंगलों का फायदा उठाकर बचे हुए माओवादी अभी भी सक्रिय हैं। हालांकि, पुलिस प्रशासन का दावा है कि बहुत जल्द इन जिलों को भी उग्रवाद से मुक्त करा लिया जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले समय में पूरे ओडिशा को ‘शून्य नक्सल’ (Zero Naxal) राज्य बनाया जाए।
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