Odisha CAG Report : ओडिशा सरकार के विभिन्न विभागों में सरकारी धन, जमीन, खनन, सड़क, शिक्षा और सिंचाई योजनाओं से जुड़ी कई अनियमितताएं सामने आई हैं। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक यानी CAG की 31 मार्च 2024 तक की अनुपालन ऑडिट रिपोर्ट में इन मामलों का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट में 2023-24 के टेस्ट-चेक के साथ पिछले वर्षों के ऐसे मामले भी शामिल हैं, जो पूर्व रिपोर्टों में दर्ज नहीं हो पाए थे।
बंद पड़ी सोलर जल परियोजनाओं से हजारों प्रभावित
बरगढ़ और ढेंकानाल की छह ग्राम पंचायतों में 2019 से 2021 के बीच करीब 43.30 लाख रुपये की लागत से नौ सोलर वाटर सप्लाई परियोजनाएं बनाई गई थीं। ऑडिट में इनमें से सभी परियोजनाएं बंद मिलीं। इनके बंद रहने से लगभग 28,820 लोगों को पेयजल सुविधा से वंचित होना पड़ा।
सरकारी परिसंपत्तियों पर कब्जे का मामला
ऑडिट में बरगढ़ और ढेंकानाल की पंचायत संस्थाओं की 25 परिसंपत्तियों पर अनधिकृत कब्जे का भी उल्लेख है। इनमें तीन मार्केट कॉम्प्लेक्स और 22 कल्याण मंडप शामिल हैं। इनका निर्माण लगभग 2.59 करोड़ रुपये में हुआ था। रिपोर्ट के अनुसार, इन संपत्तियों से मिलने वाली संभावित आय का भी स्थानीय निकायों को नुकसान हुआ।
बिना टेंडर करोड़ों के काम कराने पर सवाल
चार जिलों में 14 कार्यों पर करीब 3.30 करोड़ रुपये खर्च किए गए, लेकिन इन्हें बिना टेंडर प्रक्रिया के कराया गया। प्रत्येक कार्य की लागत 10 लाख रुपये से अधिक थी। CAG ने इसे निर्धारित प्रक्रिया से जुड़ी खामी के रूप में दर्ज किया है। वहीं, 77.80 लाख रुपये की अप्रदत्त पेंशन राशि अधिकारियों के पास अनधिकृत रूप से रखे जाने का मामला भी सामने आया।
सरकारी और वन भूमि के इस्तेमाल पर आपत्ति
ऑडिट में करीब 597.87 करोड़ रुपये मूल्य की 668.893 एकड़ सरकारी जमीन पर अनधिकृत कब्जे की बात सामने आई। इसके अलावा 504.768 एकड़ कृषि भूमि का इस्तेमाल गैर-कृषि गतिविधियों में किया गया। छह तहसीलों में 568.876 एकड़ वन भूमि को भी गैर-वन गतिविधियों में इस्तेमाल किए जाने का मामला दर्ज किया गया।
सड़क और शिक्षा योजनाओं में भी अनियमितता
PMGSY की जांच में कुछ कार्य अयोग्य ठेकेदारों को दिए जाने और 127 कार्यों में 40.55 करोड़ रुपये की लिक्विडेटेड डैमेज राशि वसूल नहीं किए जाने की बात सामने आई। शिक्षा विभाग में भी कई मामले दर्ज हुए। जाजपुर में ई-कंटेंट की दोहरी खरीद से 430 स्कूलों पर 7.39 करोड़ रुपये का खर्च बेअसर रहा।
सरकारी विमान और हेलीकॉप्टर पर खर्च
अप्रैल 2019 से मार्च 2024 तक सरकारी विमान और हेलीकॉप्टर सेवाओं की भी जांच की गई। रिपोर्ट में एजेंसी चयन प्रक्रिया को पारदर्शी नहीं बताया गया। जनवरी 2019 से नवंबर 2023 के बीच 22 बार चार्टर्ड विमान किराए पर लेने में करीब 6.91 करोड़ रुपये खर्च हुए। वहीं, 29 मौकों पर हेलीकॉप्टर सेवा के लिए लगभग 1.30 करोड़ रुपये दिए गए।
सिंचाई परियोजनाओं में मंजूरी की कमी
जल संसाधन विभाग की परियोजनाओं में पर्याप्त सर्वे और व्यवहार्यता अध्ययन नहीं होने की बात सामने आई। 38 माइनर इरिगेशन परियोजनाएं जमीन अधिग्रहण और वन मंजूरी के बिना शुरू की गईं। इनके अधूरे रहने से 91.57 करोड़ रुपये का खर्च बेकार होने की बात ऑडिट में कही गई है। पुराने चेक डैम को नए निर्माण के रूप में दिखाने की संभावना भी जांच में सामने आई।
खनन और पर्यावरण नियमों पर सवाल
खनन क्षेत्र में भी जरूरी अनुमति के बिना उत्पादन के मामले सामने आए। एक मामले में 79,535 मीट्रिक टन खनिज के उत्पादन से 45.59 करोड़ रुपये की वसूली योग्य राशि बनी। वहीं, दो कोयला खदानों से जुड़े मामले में पर्यावरण मंजूरी संबंधी नियमों के उल्लंघन के आधार पर 975.57 करोड़ रुपये की देनदारी का उल्लेख किया गया।
DMF फंड के इस्तेमाल पर CAG की टिप्पणी
छह जिला खनिज फाउंडेशन ने 2015-16 से 2023-24 के बीच 22,568.17 करोड़ रुपये जमा किए और 20,947.52 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी दी। रिपोर्ट के अनुसार, कई परियोजनाएं निर्धारित मानकों से बाहर स्वीकृत हुईं। सुंदरगढ़ में हॉकी स्टेडियम पर 136.77 करोड़ रुपये खर्च करने को लेकर भी ऑडिट ने नियमों के अनुपालन पर सवाल उठाए हैं।
रिपोर्ट में आगे कार्रवाई की अहमियत
CAG की रिपोर्ट में सामने आए मामले विभिन्न विभागों में प्रक्रिया, निगरानी और सरकारी धन के उपयोग से जुड़ी खामियों की ओर संकेत करते हैं। रिपोर्ट के निष्कर्षों के आधार पर संबंधित विभागों से जवाब और सुधारात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। इनमें भूमि, सड़क, शिक्षा, सिंचाई, खनन और DMF जैसी योजनाओं से जुड़े वित्तीय और प्रशासनिक मामलों की जांच शामिल है।
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