Odisha Naxal Surrender
Odisha Naxal Surrender: छत्तीसगढ़ और ओडिशा की सीमा पर तैनात सुरक्षा बलों को नक्सलवाद के खिलाफ जारी अभियान में एक अभूतपूर्व सफलता मिली है। सुकमा जिले से सटे ओडिशा के मलकानगिरी में 22 सक्रिय नक्सलियों ने एक साथ आत्मसमर्पण कर राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) के समक्ष अपने हथियार डाल दिए हैं। इस सामूहिक सरेंडर को बस्तर और उससे लगे सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय माओवादी नेटवर्क के लिए अब तक का सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है।
इस आत्मसमर्पण की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सरेंडर करने वालों में केवल निचले स्तर के सदस्य ही नहीं, बल्कि कमांडर स्तर के खूंखार नक्सली भी शामिल हैं। सुरक्षा एजेंसियों द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले अधिकांश नक्सली केरलापाल एरिया कमेटी से जुड़े हुए थे। इसके अलावा, दोरनापाल एलओएस (LOS) के कई प्रभावशाली नेताओं ने भी मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया है। इन कमांडरों का संगठन छोड़ना यह दर्शाता है कि नक्सली विचारधारा अब अपने ही शीर्ष नेतृत्व के बीच अपनी पकड़ खो रही है।
आत्मसमर्पण करने वाले इन 22 नक्सलियों का कार्यक्षेत्र काफी विस्तृत था। इनमें से 19 नक्सली मुख्य रूप से केरलापाल, जगरगुंडा एरिया कमेटी और प्लाटून नंबर 26 से जुड़े थे। ये वो इलाके हैं जिन्हें लंबे समय से नक्सलियों का सुरक्षित गढ़ माना जाता रहा है। इसके अतिरिक्त, आंध्र-ओडिशा बॉर्डर स्पेशल जोनल कमेटी (AOBSZC) के 3 सक्रिय नक्सलियों ने भी आत्मसमर्पण किया है। इतनी महत्वपूर्ण कमेटियों से एक साथ इतने सदस्यों का बाहर निकलना नक्सली संगठन की आंतरिक संरचना को पूरी तरह से हिला देने वाला कदम है।
आत्मसमर्पण के दौरान नक्सलियों ने केवल हिंसा का रास्ता ही नहीं त्यागा, बल्कि अपने साथ आधुनिक हथियारों का एक बड़ा जखीरा भी पुलिस को सौंपा। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों ने 1 AK-47 राइफल, 2 इन्सास (INSAS) राइफल, और 1 एसएलआर (SLR) समेत कुल 9 घातक हथियार सौंपे हैं। इसके साथ ही भारी मात्रा में गोला-बारूद, डेटोनेटर और अन्य विस्फोटक सामग्री भी बरामद की गई है। इन हथियारों की बरामदगी से यह स्पष्ट है कि ये नक्सली क्षेत्र में किसी बड़ी साजिश को अंजाम देने की फिराक में थे, जिसे अब विफल कर दिया गया है।
ओडिशा और छत्तीसगढ़ की सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि यह सरेंडर नक्सल विरोधी अभियानों की एक निर्णायक जीत है। पुलिस महानिदेशक ने इस मौके पर कहा कि सरकार की पुनर्वास नीतियों और विकास कार्यों से प्रभावित होकर नक्सली अब हिंसा का रास्ता छोड़ रहे हैं। इस घटना के बाद सुकमा और मलकानगिरी के सीमावर्ती गांवों में शांति बहाली की उम्मीदें और मजबूत हो गई हैं। सुरक्षा बलों का मानना है कि इस सामूहिक आत्मसमर्पण से अन्य सक्रिय नक्सलियों पर भी मुख्यधारा में लौटने का मनोवैज्ञानिक दबाव बनेगा, जिससे आने वाले समय में बस्तर संभाग और ओडिशा सीमा पर लाल आतंक के प्रभाव में भारी कमी आएगी।
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