OIC Kashmir Statement : विदेश मंत्रालय ने बुधवार को जम्मू-कश्मीर को लेकर ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन (OIC) के संबंधित समूह की ओर से जारी संयुक्त बयान को खारिज कर दिया। भारत ने बयान में किए गए दावों को बेबुनियाद और तथ्यों के लिहाज से गलत बताया है। यह प्रतिक्रिया न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान OIC कॉन्टैक्ट ग्रुप की बैठक के बाद सामने आई है।
भारत ने OIC के अधिकार क्षेत्र पर उठाया सवाल
विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि जम्मू-कश्मीर से जुड़े मामले भारत के आंतरिक विषय हैं और OIC के संबंधित समूह को इन पर टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है। मंत्रालय के अनुसार, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न हिस्से हैं। भारत ने यह भी कहा कि राजनीतिक उद्देश्य से किसी दावे या प्रचार को बार-बार दोहराने से वास्तविक स्थिति नहीं बदलती।
विदेश मंत्रालय ने दावों को पूरी तरह खारिज किया
भारत की ओर से कहा गया कि OIC कॉन्टैक्ट ग्रुप के संयुक्त बयान में भारत से जुड़े जिन दावों का उल्लेख किया गया है, उन्हें सरकार पूरी तरह अस्वीकार करती है। विदेश मंत्रालय ने बयान को तथ्यात्मक आधार से रहित बताया और कहा कि भारत अपने आंतरिक मामलों पर बाहरी संस्थाओं की टिप्पणियों को स्वीकार नहीं करता।
UNGA के दौरान न्यूयॉर्क में हुई OIC बैठक
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, OIC कॉन्टैक्ट ग्रुप की जम्मू-कश्मीर पर मंत्री स्तरीय बैठक 22 सितंबर को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र से इतर हुई। पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री मोहम्मद इशाक डार ने इस बैठक को संबोधित किया। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने बैठक और संयुक्त कम्युनिके की जानकारी अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर जारी की है।
इशाक डार ने OIC देशों से एकजुटता की अपील की
पाकिस्तान के आधिकारिक बयान के अनुसार, इशाक डार ने जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर OIC सदस्य देशों के बीच समन्वय और एकजुटता बनाए रखने की अपील की। पाकिस्तान लंबे समय से इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाता रहा है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने अपनी UNGA संबंधी तैयारियों में भी OIC कॉन्टैक्ट ग्रुप की बैठक को प्रमुख कार्यक्रमों में शामिल किया था।
पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र प्रस्तावों का किया हवाला
पाकिस्तान की ओर से कहा गया कि जम्मू-कश्मीर के विवाद के समाधान के लिए वह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों और कश्मीरी लोगों की इच्छा के अनुरूप समाधान की मांग करता है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने इसे अपनी विदेश नीति का लगातार उठाया जाने वाला मुद्दा बताया है।
भारत-पाकिस्तान के बीच फिर सामने आया कश्मीर मुद्दा
OIC की बैठक और भारत की प्रतिक्रिया के बाद जम्मू-कश्मीर का मुद्दा एक बार फिर भारत और पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक बयानबाजी का विषय बन गया है। भारत का रुख है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उसके अभिन्न हिस्से हैं तथा इस विषय पर किसी बाहरी संगठन को टिप्पणी करने का अधिकार नहीं है। वहीं पाकिस्तान इसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाने की अपनी नीति के तहत पेश करता रहा है।
UNGA के मंच पर कश्मीर को लेकर दोनों देशों के अलग-अलग रुख
संयुक्त राष्ट्र महासभा के मौजूदा सत्र के दौरान जम्मू-कश्मीर को लेकर भारत और पाकिस्तान की स्थिति अलग-अलग रही है। पाकिस्तान की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, उसके प्रतिनिधि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस मुद्दे को उठाने की बात कर रहे हैं। वहीं भारत OIC जैसे संगठनों की ओर से जम्मू-कश्मीर के उल्लेख को अपने आंतरिक मामले में हस्तक्षेप के रूप में देखता है।
OIC कॉन्टैक्ट ग्रुप में कई देश शामिल हैं
OIC का जम्मू-कश्मीर कॉन्टैक्ट ग्रुप पहले भी संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्रों के दौरान बैठक करता रहा है। पाकिस्तान के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, इस समूह में पाकिस्तान के साथ अजरबैजान, तुर्किये, सऊदी अरब और नाइजर शामिल हैं। 2025 में भी इसी समूह की बैठक न्यूयॉर्क में हुई थी और जम्मू-कश्मीर को लेकर संयुक्त कम्युनिके जारी किया गया था।
भारत ने अपने रुख को फिर किया स्पष्ट
ताजा घटनाक्रम में भारत ने OIC के बयान पर अपनी आपत्ति दोहराते हुए जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को भारत का अभिन्न हिस्सा बताया है। दूसरी ओर, पाकिस्तान OIC और संयुक्त राष्ट्र जैसे बहुपक्षीय मंचों पर इस मुद्दे को उठाने की अपनी नीति जारी रखे हुए है। इससे UNGA के दौरान दोनों देशों के बीच कश्मीर को लेकर कूटनीतिक मतभेद एक बार फिर सामने आए हैं।
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