TMC Crisis : तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर चल रहे घमासान और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी तथा बागी सांसदों के बीच जारी खींचतान के मामले में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। फिलहाल, इस मामले में स्पीकर ने कोई भी अंतिम फैसला सुनाने के बजाय दोनों पक्षों को अपना पक्ष रखने का अवसर प्रदान किया है। न्यूज एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार, लोकसभा सचिवालय ने टीएमसी के 20 बागी सांसदों और अभिषेक बनर्जी को आधिकारिक निर्देश जारी किए हैं। इन सभी को 19 जून 2026 की शाम 5 बजे तक संसद भवन में स्पीकर ओम बिरला के आधिकारिक चैंबर में उपस्थित होकर अपना पक्ष स्पष्ट करने के लिए कहा गया है। स्पीकर का स्पष्ट मानना है कि इस संवेदनशील मामले में कोई भी निर्णय लेने से पहले सभी संबंधित पक्षों की बात सुनना न्यायसंगत होगा।

अभिषेक बनर्जी को मिला नोटिस: पक्ष रखने की दी गई मोहलत
लोकसभा अध्यक्ष के कार्यालय द्वारा इस मामले में निष्पक्षता बरतते हुए अभिषेक बनर्जी को औपचारिक नोटिस भेजा गया है। उन्हें 19 जून की शाम 5 बजे तक का समय दिया गया है ताकि वे पार्टी के भीतर मचे इस विवाद और सांसदों के रुख पर अपनी स्थिति साफ कर सकें। गौरतलब है कि स्पीकर ओम बिरला का यह रुख इस बात को दर्शाता है कि वे संसदीय प्रक्रिया का पालन करते हुए पूरे विवाद की गहराई तक जाना चाहते हैं। दोनों पक्षों को सुनने के बाद ही आगे की कानूनी और संवैधानिक कार्रवाई की दिशा तय की जाएगी। यह समयसीमा टीएमसी नेतृत्व के लिए काफी अहम मानी जा रही है, क्योंकि पार्टी के भविष्य और लोकसभा में उसकी स्थिति को लेकर यह सुनवाई निर्णायक साबित हो सकती है।

विवाद की जड़: क्या है अभिषेक बनर्जी की शिकायत?
इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई थी जब टीएमसी संसदीय दल के नेता और राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को एक पत्र लिखा था। इस पत्र में बनर्जी ने उन मीडिया रिपोर्ट्स पर चिंता जताई थी जिनमें यह दावा किया गया था कि टीएमसी के कुछ लोकसभा सांसद अलग गुट के रूप में मान्यता पाने के लिए स्पीकर कार्यालय को सूचना दे चुके हैं या ऐसा करने का प्रस्ताव रखते हैं। बनर्जी ने पार्टी के भीतर अनुशासन बनाए रखने और अपनी सांसद सदस्यता के प्रति सतर्कता बरतते हुए स्पीकर से इस पूरे मामले की गंभीरता को समझने की मांग की थी। इसी शिकायत के बाद राजनीतिक हलकों में टीएमसी की टूट को लेकर अटकलें और अधिक तेज हो गईं।
चुनौतियों से घिरे अभिषेक बनर्जी: ईडी की जांच और राजनीतिक दबाव
ममता बनर्जी के भतीजे और टीएमसी के प्रभावशाली नेता अभिषेक बनर्जी के लिए यह समय व्यक्तिगत और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर काफी चुनौतीपूर्ण है। एक ओर जहां उन्हें पार्टी के भीतर बगावत का सामना करना पड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर जांच एजेंसियों का दबाव भी उन पर बढ़ता जा रहा है। हाल ही में, बंगाल के कथित शिक्षक भर्ती घोटाले (Teacher Recruitment Scam) के सिलसिले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अभिषेक बनर्जी से सोमवार को 11 घंटे से अधिक समय तक मैराथन पूछताछ की थी। इस कड़ी पूछताछ के बाद बनर्जी ने काफी आक्रामक रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया कि वे भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सामने झुकने वाले नहीं हैं। अब देखना यह होगा कि 19 जून की सुनवाई के बाद टीएमसी का यह आंतरिक विवाद क्या नया राजनीतिक मोड़ लेता है।
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