Tariq Rahman Oath Ceremony: पड़ोसी देश बांग्लादेश में हाल ही में संपन्न हुए 13वें संसदीय चुनाव के परिणामों ने दक्षिण एशिया की राजनीति में एक नई हलचल पैदा कर दी है। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने इस चुनाव में भारी बहुमत हासिल कर सत्ता में शानदार वापसी की है। पार्टी द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, बीएनपी के शीर्ष नेता तारिक रहमान 17 फरवरी को नए प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेंगे। यह मोड़ बांग्लादेश के राजनीतिक इतिहास में एक मील का पत्थर माना जा रहा है, क्योंकि लगभग दो दशकों के बाद देश की सत्ता की कमान अवामी लीग के हाथों से निकलकर बीएनपी के पास आई है।

शपथ ग्रहण समारोह में भारत की उपस्थिति: कूटनीतिक संदेश
तारिक रहमान के शपथ ग्रहण समारोह को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी काफी दिलचस्पी देखी जा रही है। सूत्रों के हवाले से खबर है कि इस ऐतिहासिक अवसर पर भारत की ओर से लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला नई दिल्ली का प्रतिनिधित्व करेंगे। उनके साथ भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी भी ढाका पहुंचेंगे। भारत की इस उच्चस्तरीय भागीदारी को एक सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि नई सरकार के साथ शुरुआती संवाद स्थापित करने और संबंधों को पटरी पर लाने के लिए भारत ने यह कदम उठाया है, जो भविष्य की विदेश नीति की दिशा तय करेगा।
भारत-बांग्लादेश संबंधों में जमी बर्फ पिघलने की उम्मीद
जुलाई 2024 में बांग्लादेश में हुए हिंसक विद्रोह और उसके बाद शेख हसीना सरकार के पतन ने दोनों देशों के बीच कूटनीतिक दूरियां बढ़ा दी थीं। शेख हसीना के भारत में शरण लेने और ढाका द्वारा उनके प्रत्यर्पण की मांग ने तनाव को और गहरा कर दिया था। इसके अतिरिक्त, अल्पसंख्यकों, विशेषकर हिंदुओं के खिलाफ हुई हिंसा की घटनाओं ने भारत में चिंता और आक्रोश पैदा किया था। हालांकि, अब सत्ता परिवर्तन के साथ ही सुधार की सुगबुगाहट शुरू हो गई है। तारिक रहमान के प्रमुख सलाहकार हुमायूं कबीर ने स्पष्ट किया है कि उनकी सरकार भारत के साथ द्विपक्षीय संबंधों को फिर से मजबूत करना चाहती है, हालांकि उन्होंने यह भी संकेत दिया कि संबंधों को सुधारने की पहल की बड़ी जिम्मेदारी नई दिल्ली पर भी निर्भर करती है।
चुनावी आंकड़े: बीएनपी की प्रचंड जीत और अवामी लीग का सूपड़ा साफ
बांग्लादेश चुनाव आयोग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, 13वें संसदीय चुनाव में बीएनपी ने 300 में से 209 सीटों पर जीत दर्ज कर स्पष्ट बहुमत प्राप्त किया है। वहीं, उनकी सहयोगी पार्टी जमात-ए-इस्लामी को 68 सीटें मिली हैं। गौरतलब है कि इस बार के चुनावों में मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने अवामी लीग को चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित कर दिया था, जिसके कारण शेख हसीना की पार्टी चुनावी दौड़ से बाहर रही। भारी सुरक्षा और कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच हुए इस मतदान में कुल 59.44 प्रतिशत वोटिंग दर्ज की गई, जो जनता के बदलाव की लहर को स्पष्ट रूप से दर्शाती है।
दक्षिण एशिया की राजनीति पर प्रभाव और चुनौतियां
बीएनपी की वापसी केवल बांग्लादेश तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर पूरे दक्षिण एशियाई क्षेत्र पर पड़ेगा। तारिक रहमान के सामने सबसे बड़ी चुनौती देश की लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था को संभालना और भारत के साथ बिगड़े हुए सुरक्षा व व्यापारिक संबंधों को फिर से व्यवस्थित करना होगा। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि नई सरकार अवामी लीग के दौर के समझौतों और वर्तमान कूटनीतिक चुनौतियों के बीच कैसे संतुलन बनाती है।


















