Onion Price Hike: देश के कई हिस्सों में प्याज की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। बढ़ते दामों ने आम परिवारों की रसोई का बजट प्रभावित करना शुरू कर दिया है। कीमतों पर नियंत्रण के लिए केंद्र सरकार अब अपने बफर स्टॉक में रखे प्याज को बाजार में उतारने की तैयारी कर रही है। सरकार का उद्देश्य उन शहरों और क्षेत्रों में प्याज की उपलब्धता बढ़ाना है, जहां खुदरा कीमतें सामान्य से काफी अधिक हैं। सरकारी स्टॉक बाजार में पहुंचने से आपूर्ति बढ़ने और कीमतों पर दबाव कम होने की उम्मीद है।
एक साल में करीब 45 फीसदी महंगा हुआ प्याज
शनिवार को देश में प्याज का औसत खुदरा भाव करीब 42 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया। बताया जा रहा है कि यह कीमत पिछले साल की समान अवधि की तुलना में लगभग 45 फीसदी अधिक है। वहीं, पिछले महीने के मुकाबले प्याज के दाम में करीब 19 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है। सरकार को आशंका है कि अगर समय रहते कीमतों को नियंत्रित नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में आम उपभोक्ताओं को और महंगे प्याज का सामना करना पड़ सकता है।
दिल्ली और चेन्नई में भी ऊंचे दाम
देश के अलग-अलग शहरों में प्याज की कीमतों में बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है। दिल्ली में प्याज करीब 65 रुपये प्रति किलो तक बिकने की जानकारी सामने आई है। वहीं चेन्नई में खुदरा कीमत लगभग 58 रुपये प्रति किलो पहुंच गई। कई अन्य क्षेत्रों में भी कीमतें बढ़ने से उपभोक्ताओं की परेशानी बढ़ी है। इसी वजह से सरकार ने अधिक कीमत वाले इलाकों में बफर स्टॉक भेजने की रणनीति बनाई है।
बफर स्टॉक से बाजार में बढ़ेगी प्याज की आपूर्ति
सरकार जरूरी खाद्य वस्तुओं का बफर स्टॉक इसलिए रखती है, ताकि बाजार में कमी या कीमतों में अचानक उछाल आने पर उसका इस्तेमाल किया जा सके। मौजूदा स्थिति में प्याज के दाम बढ़ने के बाद इसी भंडार का इस्तेमाल करने की तैयारी है। सरकारी स्टॉक से प्याज को उन क्षेत्रों में भेजा जाएगा जहां कीमतें सबसे ज्यादा हैं। इससे बाजार में उपलब्धता बढ़ेगी और दाम नीचे लाने में मदद मिल सकती है।
जरूरत वाले क्षेत्रों पर रहेगा सरकार का फोकस
सरकार बफर स्टॉक का प्याज पूरे देश में एक साथ उतारने के बजाय मांग और कीमतों के आधार पर अलग-अलग क्षेत्रों में भेजने की योजना बना रही है। जिस शहर या इलाके में प्याज की कीमत अधिक होगी, वहां सरकारी स्टॉक की आपूर्ति को प्राथमिकता दी जाएगी। इससे सीमित सरकारी संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने और महंगाई पर प्रभावी तरीके से नियंत्रण पाने में मदद मिल सकती है।
फिर दौड़ सकती है ‘कांदा एक्सप्रेस’
प्याज की आपूर्ति बढ़ाने के लिए सरकार एक बार फिर ‘कांदा एक्सप्रेस’ जैसी विशेष रेल सेवा का इस्तेमाल कर सकती है। यह व्यवस्था अक्टूबर 2024 में शुरू की गई थी। इसके माध्यम से महाराष्ट्र के नासिक से देश के अलग-अलग हिस्सों में बफर स्टॉक का प्याज भेजा गया था। अब नासिक से दिल्ली, चेन्नई, कोच्चि और गुवाहाटी जैसे शहरों तक प्याज पहुंचाने की तैयारी की जा रही है।
लंबी दूरी की ढुलाई में मिलेगी मदद
‘कांदा एक्सप्रेस’ के जरिए बड़ी मात्रा में प्याज को लंबी दूरी तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है। रेल परिवहन के इस्तेमाल से आपूर्ति को अपेक्षाकृत व्यवस्थित तरीके से उन बाजारों तक पहुंचाया जा सकता है जहां कीमतें अधिक हैं। इससे एक ओर बाजार में प्याज की उपलब्धता बढ़ेगी, वहीं दूसरी ओर लंबी दूरी तक परिवहन में लगने वाले समय और लागत को नियंत्रित करने में सहायता मिल सकती है।
सरकार किसानों के साथ भी बना रही भंडार
सरकार केवल मौजूदा बफर स्टॉक के सहारे कीमतों को नियंत्रित करने की योजना नहीं बना रही है। आने वाले महीनों में मांग को पूरा करने और संभावित कमी से बचने के लिए किसानों के साथ मिलकर भी प्याज का भंडार तैयार किया जा रहा है। सरकार की रणनीति तत्काल महंगाई पर नियंत्रण के साथ भविष्य में आपूर्ति संतुलित रखने की भी है।
चीनी की कीमतों में भी तेज उछाल
प्याज के अलावा चीनी की कीमतों में भी बढ़ोतरी की खबर है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शनिवार को चीनी का भाव करीब 62.50 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया, जबकि एक महीने पहले इसकी कीमत लगभग 46 रुपये प्रति किलो बताई गई थी। दिल्ली और मुंबई में खुदरा कीमतें क्रमशः करीब 65 और 69 रुपये प्रति किलो तक पहुंचने की जानकारी सामने आई है। इससे घरेलू बजट पर महंगाई का अतिरिक्त दबाव बढ़ सकता है।
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