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Operation Sindoor : ऑपरेशन सिंदूर: किराना हिल्स पर कथित हमले के दावे से फिर उभरा विवाद

Operation Sindoor :  करीब दो महीने पहले भारत-इजराइल संयुक्त ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को अंजाम देने के बाद भी इसकी गूंज शांत नहीं हुई है। अब विदेशी सैटेलाइट इमेज विशेषज्ञ डेमियन साइमन ने नया दावा किया है कि ऑपरेशन के दौरान भारत ने न केवल पाकिस्तानी ठिकानों को निशाना बनाया, बल्कि पाकिस्तान के परमाणु हथियारों के संभावित ठिकाने किराना हिल्स पर भी हमला किया गया।

सैटेलाइट तस्वीरों ने बढ़ाई संदेह की लकीर

साइमन का कहना है कि हाल ही में उन्होंने गूगल अर्थ की सैटेलाइट तस्वीरों का विश्लेषण किया, जिसमें मई 2025 के आसपास किराना हिल्स पर हुई संभावित क्षति साफ़ तौर पर दिख रही है। उनके मुताबिक, इन तस्वीरों में पहाड़ी की सतह पर दरारें और उखड़े हुए इलाके ऐसे संकेत हैं जो मिसाइल हमले का पक्ष ले सकते हैं।

वार जोन में दर्ज एक और निशाना: सारगोधा एयर बेस

इतना ही नहीं, साइमन ने एक और सैटेलाइट इमेज भी साझा की है, जो पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के सारगोधा एयर बेस की है। तस्वीरों में एयर बेस के रनवे पर मरम्मत की स्पष्ट गतिविधियां दिख रही हैं। उनका दावा है कि यह भी मई के मध्य में हुई मरम्मत से स्पष्ट है, जो इस बात का संकेत है कि पहले वहां हमला हुआ था।

एयर मार्शल ने खारिज किया हमला, डी-एमिनेशन में बयान

किराना हिल्स पर हमले के इन दावों पर पाकिस्तानी वायुसेना के एक वरिष्ठ अधिकारी, एयर मार्शल, ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने स्पष्ट कहा: “भारत ने किराना हिल्स जैसी किसी जगह पर हमला नहीं किया है। हमारे पास ऐसी कोई जानकारी नहीं है।” उनका कहना था कि यदि ऐसी घटना हुई होती तो उन्हें इसकी जानकारी होती और वे उसकी जाँच करते।

किराना हिल्स: क्यों है यह रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण?

किराना हिल्स पाकिस्तान के सरगोधा जिले में स्थित एक पहाड़ी इलाका है, जिसे देश के सबसे बड़े सामरिक ठिकानों में गिना जाता है। बताया जाता है कि पाकिस्तान ने अपने लगभग 170 परमाणु हथियारों को विभिन्न ठिकानों में रखा है, जिनमें से किराना हिल्स भी एक हो सकता है। भारत की ओर से कथित हमला इस रणनीतिक भंडार को नुकसान पहुंचाने की मंशा का संकेत हो सकता है।

विशेषज्ञों की राय: क्या सैटेलाइट इमेज पर्याप्त प्रमाण हैं?

सैटेलाइट इमेज से छपी तस्वीरों का विश्लेषण करते हुए कई रक्षा विशेषज्ञों ने कहा है कि यह दावे मजबूत हो सकते हैं, लेकिन इन्हें एकतरफा रूप से सैद्धांतिक आधार पर नहीं लाया जा सकता। तस्वीरों में दिखी अस्थायी मरम्मत, मिट्टी के उठे निशान, और भवनों की क्षति, ये संकेत हैं, लेकिन निश्चितता तभी आएगी जब इनके साथ अन्य विधियों से तस्दीक हो—जैसे मल्टी-स्पेक्ट्रल इमेजिंग या ऑन-ग्राउंड ऑब्जर्वेशन।

विदेश विभाग चुप्पी साधे – राजनयिक पहलू की गूंज

अब तक न ही भारत की तरफ से, न ही पाकिस्तान की ओर से आधिकारिक पुष्टि या खंडन आया है। दोनों देशों के विदेश विभाग चुप्पी साधे हैं। इससे तरह-तरह की अटकलें बढ़ गई हैं। खासतौर पर यह गतिरोध उस समय और गहरा गया जब भारत को हमेशा अपनी सैन्य नीतियों पर पारदर्शिता का दावा करता देखा गया है, वहीं पाकिस्तान की ओर से भी यह सवाल उठ रहा है कि अगर हमला हुआ होता तो उस पर प्रतिक्रिया क्यों नहीं हुई।

सोशल मीडिया और पत्रकारिता में उहापोह

सोशल मीडिया पर दोनों तरफ से प्रतिक्रियाएं तेज़ हो रही हैं। भारतीय समर्थकों का मानना है कि अगर हमला हुआ होता तो इसका सार्वभौमिक रूप से प्रचार किया जाता—विशेषकर पाकिस्तान के परमाणु ठिकानों को निशाना बनाया जाना एक बड़ी सैन्य उपलब्धि होती। वहीं पाकिस्तानियों की प्रतिक्रिया है कि यह दावा पूरी तरह से निराधार और भ्रामक है। स्थानीय मीडिया में भी यह बहस तेज गहमागहमी के साथ चल रही है।

अगले कदम क्या हो सकते हैं?

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह दावा गंभीर है, तो राजनयिक स्तर पर इसका सामना अब अवॉयडेंस की स्थिति में नहीं किया जा सकता। संयुक्त राष्ट्र या अन्य अंतरराष्ट्रीय निरीक्षण एजेंसियों से जांच की मांग हो सकती है। वहीं दूसरे अनुमान को तरजीह दी जा रही है कि भारत की यह क्रिया न सिर्फ पाकिस्तान, बल्कि वैश्विक तौर पर लैटिन अमेंडमेंट और परमाणु अप्रसार संधि के प्रत्यक्ष दृष्टिकोण से सवाल खड़े कर सकती है।

‘ऑपरेशन सिंदूर’ को दो महीने हो चुके हैं, लेकिन इसके प्रभाव दूरगामी दिख रहे हैं। डेमियन साइमन के सैटेलाइट इमेज विश्लेषण ने एक बार फिर किराना हिल्स संदेह को हवा दी है। हालांकि अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं मिली है, लेकिन फिलहाल यह साफ है कि इस मसले ने भारत–पाकिस्तान के बीच न सिर्फ सैन्य, बल्कि राजनैतिक और अंतरराष्ट्रीय सोच को भी एक बार फिर केंद्र में ला दिया है। आगे की जाँच और जवाबदेही से ही इस विवाद का रास्ता साफ़ होगा।

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