Operation Sindoor
Operation Sindoor: भारतीय नौसेना के प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर एक ऐसा खुलासा किया है, जिसने रक्षा गलियारों में हलचल मचा दी है। बुधवार को एक विशेष कार्यक्रम के दौरान उन्होंने बताया कि पिछले साल पाकिस्तान के साथ बढ़े सैन्य तनाव के दौरान भारतीय नौसेना अरब सागर में पूरी तरह आक्रामक मुद्रा में थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय युद्धपोत पाकिस्तान पर भीषण समुद्री हमला करने के बेहद करीब थे और महज कुछ ही मिनटों की देरी थी, तभी पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ‘सैन्य कार्रवाई रोकने’ की गुहार लगाई। नेवी चीफ का यह बयान भारत की बढ़ती सैन्य ताकत और दुश्मन को दहलाने की क्षमता को रेखांकित करता है।
पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, एडमिरल त्रिपाठी नौसेना अलंकरण समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस गरिमामय अवसर पर उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान अदम्य साहस और विशिष्ट सेवा प्रदर्शित करने वाले दो शीर्ष नौसेना अधिकारियों को ‘युद्ध सेवा पदक’ से सम्मानित किया। नेवी चीफ ने अपने संबोधन में गर्व के साथ कहा, “यह अब कोई गुप्त जानकारी नहीं है कि जब पाकिस्तान ने सैन्य अभियान रोकने का अनुरोध किया, उस समय हम समुद्र से उस पर प्रहार करने के लिए पूरी तरह तैयार थे।” उन्होंने बताया कि भारतीय नौसेना के इस अलर्ट मोड ने पाकिस्तान के रणनीतिकारों के पसीने छुड़ा दिए थे।
पहलगाम आतंकी हमले के बाद शुरू हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में भारतीय नौसेना की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही। नेवी चीफ के मुताबिक, नौसेना न केवल चौकस थी, बल्कि हमले के लिए ‘कॉक-लोडेड’ स्थिति में थी। इसका सीधा अर्थ यह है कि यदि सीमा पर हालात और बिगड़ते, तो वायुसेना की सर्जिकल स्ट्राइक के बाद नौसेना भी भीषण गोलाबारी शुरू कर देती। हालांकि, भारतीय सेना और वायुसेना के संयुक्त दबाव के आगे पाकिस्तान टिक नहीं सका और उसने घुटने टेक दिए। अपनी हार सुनिश्चित देख पाकिस्तान संघर्ष विराम (सीजफायर) के लिए गिड़गिड़ाने लगा, जिससे एक बड़े पूर्ण-स्तरीय युद्ध की स्थिति टल गई।
इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत 26 अप्रैल 2025 को हुई थी, जब पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में एक कायराना हमले को अंजाम दिया था। इस हमले में 26 निर्दोष लोगों की जान चली गई थी। भारत ने इस शहादत का बदला लेने के लिए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ लॉन्च किया। 6 और 7 मई की दरम्यानी रात भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने सीमा पार पीओके और पाकिस्तान के भीतर घुसकर आतंकी ठिकानों को मलबे में तब्दील कर दिया। इस ऑपरेशन का मुख्य लक्ष्य आतंकियों के लॉन्चपैड और हथियार डिपो को नष्ट करना था, जिसमें 100 से अधिक आतंकवादी मारे गए थे।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत की तकनीकी श्रेष्ठता भी पूरी दुनिया के सामने आई। जब बौखलाए पाकिस्तान ने जवाबी कार्रवाई के लिए अपनी मिसाइलें और ड्रोन दागे, तो भारतीय ‘एयर डिफेंस सिस्टम’ ने उन्हें हवा में ही नष्ट कर दिया। इसके विपरीत, भारत की सटीक मिसाइलों ने पाकिस्तान के कई प्रमुख एयरबेसों को भारी नुकसान पहुँचाया। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि लाहौर में तैनात पाकिस्तान का गौरव माना जाने वाला चीनी एयर डिफेंस सिस्टम ‘HQ-9’ भी भारतीय प्रहार के सामने ताश के पत्तों की तरह ढह गया। इस सैन्य बढ़त ने पाकिस्तान को रक्षात्मक होने पर मजबूर कर दिया।
एडमिरल त्रिपाठी के इस खुलासे ने यह साफ कर दिया है कि भारत अब केवल सीमा पर रक्षात्मक होने तक सीमित नहीं है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने साबित किया कि भारत की तीनों सेनाएं—थल, नभ और जल—एक साथ मिलकर दुश्मन के घर में घुसकर उसे तबाह करने की क्षमता रखती हैं। नौसेना का पाकिस्तान के तटों के करीब तक पहुंच जाना और हमले की तैयारी करना यह दर्शाता है कि कराची और अन्य तटीय शहर अब भारतीय मिसाइलों की सीधी जद में हैं। यह खुलासा न केवल सैनिकों का मनोबल बढ़ाता है, बल्कि पड़ोसी देशों के लिए एक कड़ा सबक भी है कि भारत के धैर्य को उसकी कमजोरी न समझा जाए।
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