Operation Sindoor : संसद का मानसून सत्र जारी है और सोमवार से ऑपरेशन सिंदूर पर विस्तृत चर्चा शुरू होने वाली है, जिसके लिए 16 घंटे का समय निर्धारित किया गया है। इस महत्वपूर्ण चर्चा से ठीक पहले, इंडिया गठबंधन के फ्लोर नेताओं ने सुबह 10 बजे एक बैठक बुलाई है। बैठक का मुख्य उद्देश्य संसद में सरकार को घेरने के लिए एक साझा रणनीति तैयार करना है। इस बैठक में विपक्षी दलों के नेता पहलगाम हमले, ऑपरेशन सिंदूर, सीजफायर पर डोनाल्ड ट्रंप के बयान और विदेश नीति से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करेंगे।
विपक्षी नेताओं की इस बैठक में मुख्य रूप से चार अहम मुद्दों पर चर्चा की जाएगी और इन पर एक ठोस रणनीति बनाई जाएगी, ताकि संसद में सरकार को घेरा जा सके। पहला मुद्दा पहलगाम हमले को लेकर होगा, जिसमें सरकार ने सुरक्षा में चूक मानते हुए जवाबदेही तय करने की बात की थी। विपक्ष सरकार से यह सवाल करेगा कि, “अब तक इस हमले के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई?” साथ ही, अटैक में शामिल चार आतंकियों का क्या हुआ और वे कहां हैं, इस पर भी सरकार से जवाब मांगा जाएगा।
दूसरा सबसे बड़ा मुद्दा ऑपरेशन सिंदूर को लेकर होगा। इस पर विपक्षी दल सरकार से यह सवाल करेंगे कि आखिरकार ऑपरेशन सिंदूर अचानक क्यों रुक गया? क्या इसके पीछे कोई रणनीतिक कारण था या फिर कोई और पहलू था? विपक्षी नेताओं का आरोप है कि इस महत्वपूर्ण ऑपरेशन के ठप होने से आतंकवादियों को राहत मिली है और सुरक्षा के मोर्चे पर सरकार की निष्क्रियता साफ नजर आती है। इस मुद्दे पर सरकार के जवाब से ही आगे की दिशा तय होगी।
तीसरा महत्वपूर्ण मुद्दा पाकिस्तान और भारत के बीच सीजफायर को लेकर होगा। जब पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान के साथ सीजफायर का ऐलान किया था, तो विपक्षी नेताओं ने यह सवाल उठाया है कि, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ट्रंप के इस बयान पर चुप क्यों हैं?” इसके अलावा, विपक्षी दलों का आरोप है कि प्रधानमंत्री ने इस महत्वपूर्ण मामले पर अपनी चुप्पी क्यों बनाए रखी और सरकार की ओर से इस मुद्दे पर कोई बयान क्यों नहीं दिया गया।
अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण सवाल भारत की विदेश नीति को लेकर होगा। विपक्षी दल सरकार से पूछेंगे कि भारत ने वैश्विक मंच पर अपनी ताकत का प्रदर्शन क्यों नहीं किया और खासकर पाकिस्तान के खिलाफ उठाए गए कदमों में कोई स्पष्टता क्यों नहीं है? विपक्षी नेताओं का कहना है कि पाकिस्तान से लगातार भारत की खिलाफत करने वाला चीन आज भारत के साथ गलबहियां क्यों कर रहा है? क्या सरकार को चीन के साथ रिश्तों में पारदर्शिता दिखानी चाहिए? इन सवालों पर विपक्ष सरकार को घेरने के लिए पूरी तरह तैयार है।
इसके अलावा, विपक्षी नेताओं की बैठक में बिहार में चुनाव आयोग द्वारा किए गए एसआईआर (स्वीपिंग इन्क्वायरी रिपोर्ट) के मुद्दे पर भी चर्चा होगी। विपक्षी दलों का आरोप है कि चुनाव आयोग ने बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले यह कदम उठाकर सत्ताधारी दल को फायदा पहुंचाने का प्रयास किया है। उनका कहना है कि चुनाव आयोग का यह कदम पूरी तरह से पक्षपाती है और इसने लोकतंत्र की स्वतंत्रता को चुनौती दी है। विपक्षी दल इस मुद्दे को संसद में प्रमुखता से उठाने की योजना बना रहे हैं।
इंडिया गठबंधन के नेता इस बात पर जोर देंगे कि पहले संसद में सरकार को इन सभी मुद्दों पर जवाब देना चाहिए। उनकी योजना है कि सरकार के जवाब के बाद इन सवालों को और जोर-शोर से उठाया जाए और सरकार को कटघरे में खड़ा किया जाए। विपक्ष के नेताओं का कहना है कि इन मुद्दों को केवल राजनीतिक नफे-नुकसान के हिसाब से नहीं देखा जा सकता, बल्कि ये राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति से जुड़ी बेहद महत्वपूर्ण बातें हैं, जिन पर सरकार को जवाब देना जरूरी है।
ऑपरेशन सिंदूर और पहलगाम हमले के बाद उठ रहे सवालों को लेकर विपक्षी दल सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। उनका मानना है कि सरकार ने सुरक्षा मामलों में कई महत्वपूर्ण फैसले लेने में देर की है, जिसके कारण आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा मिला है। वहीं, सीजफायर के मामले में ट्रंप के बयान के बाद सरकार की चुप्पी विपक्ष के लिए एक और मुद्दा है, जिस पर वे सरकार से जवाब मांगने की योजना बना रहे हैं।
इंडिया गठबंधन के इस बैठक से यह स्पष्ट हो गया है कि विपक्षी दल सरकार को हर मोर्चे पर घेरने के लिए एकजुट हैं। चुनाव आयोग के एसआईआर के मुद्दे से लेकर ऑपरेशन सिंदूर तक, विपक्षी दल इन सभी मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगने के लिए तैयार हैं। विपक्षी दलों का कहना है कि अगर सरकार इन मुद्दों पर संसद में स्पष्ट और संतोषजनक जवाब नहीं देती है, तो यह साबित होगा कि सरकार अपने दायित्वों को निभाने में असफल रही है।
इस बैठक में तय की गई रणनीति के तहत विपक्षी दल संसद में इन सभी मुद्दों को उठाकर सरकार से जवाब मांगने के लिए तैयार हैं। इसमें कोई शक नहीं कि यह सत्र विपक्ष के लिए सरकार को घेरने का एक अहम मौका बन सकता है, खासकर जब वह सुरक्षा, विदेश नीति और चुनाव आयोग के मुद्दों पर सरकार को कटघरे में खड़ा करने की योजना बना रहे हैं।
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