Balochistan Conflict
Balochistan Conflict: पाकिस्तान का सबसे अशांत प्रांत बलूचिस्तान एक बार फिर रणक्षेत्र में तब्दील हो गया है। बलूच बागियों और पाकिस्तानी सेना के बीच जारी खूनी संघर्ष दूसरे दिन भी थमने का नाम नहीं ले रहा है। रविवार, 1 फरवरी 2026 को बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री सरफराज बुगती ने दावा किया कि सुरक्षा बलों ने 40 घंटे तक चली भीषण मुठभेड़ में 145 उग्रवादियों को मार गिराया है। दूसरी ओर, अलगाववादी संगठन बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा है कि उनका ‘ऑपरेशन हेरोफ फेज 2’ अभी भी सफलतापूर्वक जारी है। क्षेत्र में तनाव इतना अधिक है कि संचार व्यवस्था और आवाजाही पूरी तरह बाधित हो गई है।
संसाधन संपन्न लेकिन विकास में पिछड़े इस प्रांत में बढ़ती हिंसा ने इस्लामाबाद की नींद उड़ा दी है। आंतरिक मंत्री तलाल चौधरी के अनुसार, विद्रोही नागरिकों के वेश में स्कूलों, अस्पतालों और बाजारों में छिपकर हमला कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बागियों ने आम जनता को ‘ह्यूमन शील्ड’ (मानव ढाल) के रूप में इस्तेमाल किया। मुख्यमंत्री बुगती ने इन ऑपरेशनों को दशकों की सबसे बड़ी सैन्य सफलता बताया है। हालांकि, इस संघर्ष की कीमत निर्दोषों को भी चुकानी पड़ी है; ग्वादर में एक मजदूर के घर पर हुए हमले में पांच महिलाओं और तीन बच्चों की हत्या कर दी गई, जिसकी चारों ओर निंदा हो रही है।
बीएलए के प्रवक्ता जीयांद बलूच ने एक बयान जारी कर कहा कि उनके लड़ाकों ने खारन, मस्तुंग, दलबंदिन और पसनी जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में अपने उद्देश्य पूरे कर लिए हैं। बीएलए का दावा है कि उन्होंने पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के 200 से अधिक जवानों को मार गिराया है और 17 को बंदी बना लिया है। संगठन का कहना है कि उन्होंने कई शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों पर अस्थायी रूप से कब्जा कर लिया और सेना को पीछे हटने पर मजबूर किया। हालांकि, पाकिस्तान सरकार ने इन आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और स्थानीय खबरें भीषण नुकसान की ओर इशारा कर रही हैं।
इस बार के संघर्ष में बीएलए ने अपनी ‘मजीद ब्रिगेड’ की महिला फिदायीनों के शामिल होने की जानकारी देकर सबको चौंका दिया है। 24 वर्षीय महिला फिदायीन आसिफा मेंगल ने 31 जनवरी 2026 को नोशकी स्थित आईएसआई (ISI) मुख्यालय पर विस्फोटक से भरी गाड़ी (VBIED) के जरिए बड़ा आत्मघाती हमला किया। इसके अलावा, एक अन्य महिला लड़ाकू हवा बलूच ने ग्वादर में सेना के साथ सीधे मुकाबले में अपनी जान गंवाई। इन घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि बलूच विद्रोह अब एक नए और अधिक घातक चरण में प्रवेश कर चुका है।
बलूचिस्तान पाकिस्तान का क्षेत्रफल के हिसाब से सबसे बड़ा प्रांत है, लेकिन आबादी के मामले में सबसे छोटा। यह क्षेत्र प्राकृतिक गैस, सोना और तांबे जैसे संसाधनों से समृद्ध है, लेकिन यहां के निवासियों का आरोप है कि इस्लामाबाद की सरकार और सेना इन संसाधनों को लूट रही है। अलगाववादी समूह ‘स्वायत्तता’ और ‘स्वतंत्रता’ की मांग को लेकर दशकों से हथियार उठाए हुए हैं। चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) और ग्वादर पोर्ट जैसी परियोजनाओं ने इस असंतोष को और भड़का दिया है, क्योंकि स्थानीय लोग इन्हें अपनी जमीन पर विदेशी कब्जा मानते हैं।
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