US-Iran Talks
US-Iran Talks: मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के बीच हुए हालिया सीजफायर ने दुनिया को राहत की सांस दी है, लेकिन अब सबकी निगाहें पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद पर टिकी हैं। यहाँ अमेरिका और ईरान के बीच एक ऐतिहासिक कूटनीतिक बैठक होने जा रही है।जहाँ एक तरफ इस वार्ता को शांति की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है, वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान के एक विवादास्पद फैसले ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया जगत में खलबली मचा दी है।
इस हाई-प्रोफाइल बैठक की कवरेज को लेकर पाकिस्तान सरकार का एक चौंकाने वाला फैसला सामने आया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान ने इस कूटनीतिक वार्ता की कवरेज के लिए भारतीय और इजरायली पत्रकारों को प्रवेश देने से साफ इनकार कर दिया है। जहाँ पूरी दुनिया इस बैठक के नतीजों का इंतजार कर रही है, वहीं दो महत्वपूर्ण देशों के मीडिया घरानों पर इस तरह की पाबंदी लगाना पाकिस्तान की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े करता है।हालांकि, इस्लामाबाद प्रशासन ने अभी तक इस भेदभावपूर्ण फैसले के पीछे की आधिकारिक वजह स्पष्ट नहीं की है, जिससे वैश्विक स्तर पर पाकिस्तान की आलोचना शुरू हो गई है।
ईरान और अमेरिका के बीच दशकों पुराने तनाव को कम करने के उद्देश्य से आयोजित इस बैठक को ‘इस्लामाबाद वार्ता’ का नाम दिया गया है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने व्यक्तिगत रूप से दोनों देशों के नेतृत्व को इस बातचीत के लिए आमंत्रित किया है। इस बैठक का मुख्य एजेंडा सीजफायर को स्थायी शांति समझौते में बदलना और क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव को कम करना है। पाकिस्तान इस आयोजन के जरिए खुद को मुस्लिम जगत और पश्चिम के बीच एक निष्पक्ष मध्यस्थ के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा है।
ईरान ने इस वार्ता के लिए अपने सबसे प्रभावशाली नेताओं को भेजा है। ईरानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बघेर गालिबफ कर रहे हैं। उनके साथ विदेश मंत्री अब्बास अराघची और अनुभवी राजनयिक माजिद तख्त रवांची भी मौजूद हैं। ईरान की टीम में सुरक्षा और आर्थिक मामलों के विशेषज्ञों की भारी मौजूदगी यह संकेत देती है कि ईरान प्रतिबंधों को हटाने और अपनी संप्रभुता की गारंटी पर कड़ा रुख अपना सकता है।
अमेरिका ने भी इस बैठक के महत्व को देखते हुए एक बेहद शक्तिशाली डेलीगेशन इस्लामाबाद भेजा है। अमेरिकी टीम का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस कर रहे हैं। इस डेलीगेशन में व्हाइट हाउस के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और डोनाल्ड ट्रंप के पूर्व वरिष्ठ सलाहकार जेरेड कुशनर की मौजूदगी सबसे अधिक ध्यान खींच रही है।कुशनर को अब्राहम एकॉर्ड्स और मध्य पूर्व कूटनीति का विशेषज्ञ माना जाता है। इसके अलावा, सैन्य संतुलन पर नजर रखने के लिए CENTCOM कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर भी वार्ता की मेज पर मौजूद रहेंगे।
पाकिस्तान इस बैठक की मेजबानी को अपनी बड़ी कूटनीतिक जीत मान रहा है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के साथ इस वार्ता में फील्ड मार्शल सैयद आसिम मुनीर और उप-प्रधानमंत्री इशाक डार भी शामिल होंगे। पाकिस्तान का सैन्य और नागरिक नेतृत्व एक साथ इस प्रक्रिया में शामिल है, जो यह दर्शाता है कि पाकिस्तान के लिए यह वार्ता केवल कूटनीति नहीं, बल्कि उसकी राष्ट्रीय साख का सवाल है।
इस्लामाबाद में शुरू हुई यह वार्ता वैश्विक शांति के लिए मील का पत्थर साबित हो सकती है, बशर्ते पारदर्शिता बनी रहे। भारत और इजरायल के पत्रकारों को दूर रखकर पाकिस्तान ने इस आयोजन की निष्पक्षता पर जो दाग लगाया है, वह कूटनीतिक गलियारों में लंबे समय तक चर्चा का विषय बना रहेगा। क्या यह पाबंदी किसी विशेष दबाव का नतीजा है या महज पाकिस्तान की पुरानी दुश्मनी का हिस्सा, इसका जवाब भविष्य की कूटनीति में छिपा है।
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