Pakistan Earthquake
Pakistan Earthquake : पड़ोसी देश पाकिस्तान में शनिवार की सुबह किसी सामान्य दिन जैसी नहीं रही। तड़के सुबह जब लोग अपने घरों में थे, तभी अचानक धरती कांपने लगी और भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। रिक्टर पैमाने पर इस भूकंप की तीव्रता 4.6 मापी गई है। जैसे ही झटके महसूस हुए, कई इलाकों में लोग डर के मारे अपने घरों से बाहर निकल आए। राहत की बात यह रही कि खबर लिखे जाने तक किसी भी प्रकार के बड़े जान-माल के नुकसान या किसी इमारत के गिरने की सूचना प्राप्त नहीं हुई है। हालांकि, झटकों की तीव्रता इतनी थी कि पंखे और खिड़कियाँ हिलने लगीं, जिससे स्थानीय निवासियों में असुरक्षा का माहौल बन गया है।
पाकिस्तान के लिए यह हफ्ता भूगर्भीय दृष्टि से बेहद अशांत रहा है। शनिवार को आया यह भूकंप पिछले तीन दिनों में लगातार तीसरी घटना है। इससे पहले शुक्रवार को भी देश के कई हिस्सों में 4.5 तीव्रता के झटके महसूस किए गए थे। वहीं, गुरुवार 26 मार्च को भी 4.6 तीव्रता का भूकंप आया था। लगातार तीन दिनों तक धरती का इस तरह कांपना विशेषज्ञों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। हालांकि, 4.6 की तीव्रता को वैज्ञानिक दृष्टि से ‘मध्यम’ श्रेणी में रखा जाता है और यह बहुत अधिक विनाशकारी नहीं माना जाता, लेकिन बार-बार आने वाले ये झटके किसी बड़ी प्राकृतिक आपदा का संकेत भी हो सकते हैं।
पाकिस्तान, अफगानिस्तान और उत्तर भारत का भौगोलिक क्षेत्र दुनिया के सबसे अधिक ‘भूकंपीय सक्रिय क्षेत्रों’ (Seismic Zones) में आता है। इसका मुख्य कारण यह है कि यह पूरा क्षेत्र भारतीय और यूरेशियन विवर्तनिक (Tectonic) प्लेटों के मिलन बिंदु पर स्थित है। ये दोनों विशाल प्लेटें लगातार एक-दूसरे की ओर बढ़ रही हैं और आपस में टकरा रही हैं। इस टकराव और रगड़ के कारण जमीन के नीचे भारी ऊर्जा पैदा होती है, जो भूकंप के रूप में बाहर निकलती है। चूंकि पाकिस्तान कई प्रमुख ‘फॉल्ट लाइनों’ (Fault Lines) के मुहाने पर बसा है, इसलिए यहाँ भूकंप आने की आशंका दुनिया के अन्य देशों के मुकाबले काफी अधिक रहती है।
भौगोलिक स्थिति के अनुसार, पाकिस्तान के अलग-अलग प्रांत विभिन्न प्लेटों के किनारों पर स्थित हैं। बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा और गिलगित-बाल्टिस्तान जैसे इलाके यूरेशियन प्लेट के दक्षिणी किनारे पर बसे हैं, जो बेहद अस्थिर है। वहीं, पंजाब प्रांत भारतीय प्लेट के उत्तर-पश्चिमी छोर पर स्थित है, जो इसे भूकंपीय गतिविधियों के प्रति अतिसंवेदनशील बनाता है। बलूचिस्तान विशेष रूप से अरब और यूरेशियन प्लेटों की सक्रिय सीमा के निकट होने के कारण सबसे ज्यादा जोखिम में रहता है। सिंध प्रांत हालांकि थोड़ा कम संवेदनशील है, लेकिन अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण वह भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं कहा जा सकता।
भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदा का कोई सटीक पूर्वानुमान नहीं लगाया जा सकता, इसलिए बचाव ही एकमात्र उपाय है। भूगर्भ शास्त्रियों और आपदा प्रबंधन विशेषज्ञों का कहना है कि जब भी भूकंप के झटके महसूस हों, तो तुरंत किसी खुली और सुरक्षित जगह पर चले जाना चाहिए। किसी भी ऊंची इमारत, बिजली के खंभों या पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचें। यदि आप घर के अंदर हैं और बाहर निकलना संभव नहीं है, तो किसी मजबूत मेज या पलंग के नीचे छिप जाएं और अपने सिर को सुरक्षित रखें। लिफ्ट का प्रयोग बिल्कुल न करें और शांत रहकर दूसरों की मदद करें।
Read More: IMD Weather Alert: दिल्ली-यूपी सहित इन राज्यों में आंधी-बारिश का अलर्ट, ओलावृष्टि की भारी चेतावनी
US Israel Iran Conflict : पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी भीषण संघर्ष के बीच…
LPG Cylinder Crisis : छत्तीसगढ़ के प्रमुख शहरों में इन दिनों रसोई गैस सिलेंडर की…
Surguja Jal Jeevan Mission : छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले से प्रशासन को हिला देने वाली…
Bilaspur Bird Flu Alert : छत्तीसगढ़ के न्यायधानी बिलासपुर में बर्ड फ्लू (Bird Flu) के…
Weather Alert : छत्तीसगढ़ में इन दिनों मौसम के दो अलग-अलग रूप देखने को मिल…
Bomb Threat : छत्तीसगढ़ के न्यायधानी बिलासपुर में एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती…
This website uses cookies.